Uttarakhand SIR Notice देहरादून : उत्तराखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision-SIR) अभियान के दौरान बड़े पैमाने पर नाम, पते और मतदाता रिकॉर्ड में विसंगतियां सामने आई हैं. इन त्रुटियों के चलते केवल आम नागरिक ही नहीं, बल्कि राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO), मंत्री, विधायक, पूर्व विधायक, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी और विभिन्न राजनीतिक दलों के पदाधिकारियों तक को नोटिस जारी किए गए हैं.
दूसरी ओर, उधमसिंह नगर के जसपुर में तीन जीवित मतदाताओं को रिकॉर्ड में मृत दर्शाए जाने और कई अन्य मतदाताओं को गलत तरीके से दूसरे स्थान पर स्थानांतरित दिखाने के आरोपों ने विवाद को और बढ़ा दिया है.
Uttarakhand SIR Notice :मुख्य निर्वाचन अधिकारी को भी मिला नोटिस
राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बीवीआरसी पुरुषोत्तम को उनके पिता के नाम की वर्तनी में त्रुटि पाए जाने के कारण नोटिस जारी किया गया. उन्होंने संबंधित दस्तावेज बीएलओ (बूथ लेवल अधिकारी) को सौंपकर मामले का निस्तारण कराया.
इसके अलावा कई वरिष्ठ अधिकारियों को भी नाम और पते में विसंगतियों के कारण नोटिस मिले हैं. इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं—
- कुमाऊं आयुक्त दीपक रावत
- काशीपुर एसडीएम अभय प्रताप सिंह
- वरिष्ठ कोषाधिकारी सीमा बंग्वाल
- एपीडी विम्मी जोशी
इन सभी को रिकॉर्ड सत्यापन और आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए.
राजनीतिक और सामाजिक हस्तियां भी दायरे में
SIR अभियान के दौरान कई प्रमुख राजनीतिक और सामाजिक हस्तियों को भी नोटिस जारी किए गए हैं.
इनमें शामिल हैं—
- सोनीपत सांसद एवं हरिद्वार के पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष सतपाल ब्रह्मचारी
- प्रसिद्ध साहित्यकार नरेंद्र कठैत
- बदरीनाथ विधानसभा से पूर्व प्रत्याशी नवल किशोर खाली
- वरिष्ठ राज्य आंदोलनकारी मुन्नी तिवारी
- पूर्व ब्लॉक प्रमुख कमलेश कैड़ा
इन मामलों में मतदाता सूची में नाम, पता या अन्य विवरणों के सत्यापन के लिए दस्तावेज मांगे गए हैं।
नेताओं और उनके परिजनों के नामों में भी मिली गड़बड़ी
मतदाता सूची पुनरीक्षण के दौरान कई राजनीतिक नेताओं और उनके परिवारों के रिकॉर्ड में भी विसंगतियां सामने आई हैं.
नोटिस पाने वालों में शामिल हैं—
- नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य के पुत्र संजीव आर्य और उनकी पत्नी
- उत्तराखंड क्रांति दल (यूकेडी) के केंद्रीय अध्यक्ष शिव शंकर भाटिया और उनकी पत्नी
- कांग्रेस जिलाध्यक्ष भूपेंद्र सिंह भोज (अल्मोड़ा)
- पूर्व कांग्रेस जिलाध्यक्ष निर्मला गहतोड़ी (चम्पावत)
- भाजपा जिलाध्यक्ष आशुतोष शर्मा (हरिद्वार)
- यूथ कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव ऋषेंद्र महर
इन सभी मामलों में नाम या पते में दर्ज विसंगतियों के सत्यापन की प्रक्रिया जारी है.
जसपुर में जिंदा मतदाताओं को ‘मृत’ दिखाने पर विवाद
उधमसिंह नगर जिले के जसपुर में SIR अभियान के दौरान बड़ा विवाद सामने आया है। आरोप है कि तीन जीवित मतदाताओं—शादाब अख्तर, नूरहसन और जुबेदा खातून—को रिकॉर्ड में मृत दर्शाकर उनके नाम पर आपत्ति दर्ज कर दी गई.
इसके अलावा अफरोजा और जरीना सहित कुछ अन्य मतदाताओं को उनके वर्तमान पते से स्थानांतरित (Shifted) दिखाया गया, जबकि वे अब भी उसी पते पर रह रहे हैं.
इस मामले की जानकारी मिलने पर स्थानीय विधायक आदेश चौहान संबंधित लोगों से मिले और पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली.
कोतवाली में दी गई शिकायत
प्रभावित मतदाताओं ने कोतवाली पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई और आरोप लगाया कि बिना किसी सत्यापन के फर्जी आपत्तियां दर्ज की गई हैं. उन्होंने दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है.
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस तरह की गलतियों से वास्तविक मतदाताओं के मतदान अधिकार प्रभावित हो सकते हैं.
विधायक ने लगाए गंभीर आरोप
जसपुर के विधायक आदेश चौहान ने आरोप लगाया कि पिछले तीन दिनों में लगभग 2,800 मतदाताओं के खिलाफ आपत्तियां दर्ज कराई गई हैं. उनका आरोप है कि एक विशेष समुदाय के मतदाताओं को निशाना बनाया जा रहा है.
उन्होंने कहा कि पूरे मामले को लेकर प्रशासन से संपर्क किया जा रहा है और निष्पक्ष जांच की मांग की जाएगी.
क्या है SIR अभियान?
विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision-SIR) अभियान का उद्देश्य मतदाता सूची को पूरी तरह अद्यतन और त्रुटिरहित बनाना है. इसके तहत निर्वाचन आयोग मतदाताओं के नाम, पता, आयु और अन्य विवरणों का सत्यापन कराता है ताकि फर्जी, दोहरे या गलत रिकॉर्ड हटाए जा सकें.
हालांकि उत्तराखंड में सामने आए इन मामलों ने इस प्रक्रिया की पारदर्शिता और सत्यापन प्रणाली को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं. अब सभी की नजर प्रशासन और निर्वाचन विभाग की आगे की कार्रवाई पर टिकी हुई है.

