Asaram bail Supreme Court नई दिल्ली: नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे स्वयंभू संत आसाराम को सुप्रीम कोर्ट से फिलहाल कोई राहत नहीं मिली है. शीर्ष अदालत ने उनकी अंतरिम जमानत याचिका पर तत्काल राहत देने से इनकार करते हुए राजस्थान सरकार को नोटिस जारी किया है. अदालत ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार का पक्ष सुने बिना जमानत पर फैसला नहीं लिया जा सकता.
Asaram bail Supreme Court:कोर्ट ने क्या कहा?
जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस शील नागू की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि फिलहाल आसाराम को जमानत नहीं दी जा सकती. अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता एक प्रभावशाली व्यक्ति हैं, इसलिए जमानत पर विचार करते समय सभी पहलुओं का सावधानीपूर्वक परीक्षण आवश्यक है.
पीठ ने यह भी निर्देश दिया कि जेल प्रशासन द्वारा आसाराम को उपलब्ध कराई जा रही चिकित्सीय सुविधाएं पहले की तरह जारी रखी जाएं.
स्वास्थ्य के आधार पर मांगी थी अंतरिम जमानत
आसाराम की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता दामा शेषाद्री नायडू ने दलील दी कि उनके मुवक्किल की उम्र 80 वर्ष से अधिक है और वे कई गंभीर बीमारियों से पीड़ित हैं. इसी आधार पर अंतरिम जमानत की मांग की गई.
हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल गंभीर और जीवन के लिए खतरा पैदा करने वाली स्वास्थ्य आपात स्थिति में ही जमानत पर विचार किया जा सकता है.
राजस्थान सरकार ने क्या कहा?
राजस्थान सरकार की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि 2 जून को आसाराम को चिकित्सकीय जांच के लिए अस्पताल ले जाया गया था और फिलहाल उनकी स्वास्थ्य स्थिति सामान्य है. इस पर अदालत ने राज्य सरकार से विस्तृत जवाब दाखिल करने को कहा.
‘सोशल मीडिया ट्रायल’ की दलील पर भी हुई बहस
सुनवाई के दौरान आसाराम के वकील ने दावा किया कि उनके मुवक्किल “सोशल मीडिया ट्रायल” का शिकार हुए हैं. वहीं, पीड़ित पक्ष के वकील ने इस तर्क का विरोध करते हुए अदालत को याद दिलाया कि मामला एक नाबालिग पीड़िता से जुड़ा गंभीर आपराधिक मामला है.
राजस्थान हाई कोर्ट के फैसले को दी है चुनौती
आसाराम ने राजस्थान हाई कोर्ट के उस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, जिसमें वर्ष 2013 के नाबालिग से रेप मामले में उनकी उम्रकैद की सजा बरकरार रखी गई थी. साथ ही उन्होंने खराब स्वास्थ्य का हवाला देते हुए अंतरिम जमानत की भी मांग की है.
हाई कोर्ट ने क्या फैसला दिया था?
राजस्थान हाई कोर्ट ने मई 2026 में अपने फैसले में सह-आरोपियों को बरी कर दिया था. वहीं, आसाराम को गैंगरेप और POCSO एक्ट की कुछ धाराओं से राहत देते हुए भी रेप के आरोप में दोषसिद्धि को बरकरार रखा. अदालत ने कहा था कि रेप के आरोप को साबित करने के लिए पर्याप्त और विश्वसनीय साक्ष्य मौजूद हैं, इसलिए निचली अदालत द्वारा सुनाई गई उम्रकैद की सजा में हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं बनता.
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने आसाराम की अंतरिम जमानत पर कोई राहत नहीं दी है. अब मामले में राजस्थान सरकार का जवाब आने के बाद ही अदालत आगे की सुनवाई करेगी और जमानत याचिका पर निर्णय लेगी.





