Haridwar Kanwar Yatra हरिद्वार : उत्तराखंड के हरिद्वार में इस बार कांवड़ यात्रा ने श्रद्धालुओं की संख्या का नया रिकॉर्ड कायम किया है. 13 दिनों तक चले कांवड़ मेले में 4 करोड़ 80 लाख 40 हजार से अधिक कांवड़िए हरिद्वार पहुंचे और हरकी पैड़ी समेत अलग-अलग घाटों से गंगाजल लेकर अपने गंतव्य की ओर रवाना हुए. प्रशासन के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले करीब 40 वर्षों में पहली बार इतनी बड़ी संख्या में शिवभक्त कांवड़ लेने हरिद्वार पहुंचे हैं.
हालांकि, करोड़ों श्रद्धालुओं की मौजूदगी के साथ हरिद्वार के सामने सफाई और कचरा प्रबंधन की बड़ी चुनौती भी खड़ी हुई. कांवड़ मेले के दौरान विभिन्न घाटों और आसपास के क्षेत्रों में करीब 7,000 मीट्रिक टन कचरा जमा हुआ. नगर निगम की टीमें लगातार सफाई अभियान में जुटी हैं और अब तक 5,500 मीट्रिक टन से अधिक कचरा साफ किए जाने की जानकारी सामने आई है.
Kanwar Yatra concludes in Haridwar…
Millions of devotees of Lord Shiva, Kanwariya’s attain salvation leaving behind 7,000 metric tonnes of garbage, undergarments, bottles filled with Urine across Ganga ghat and Har Ki Pauri.
Har Har Mahadev 𓉸𓆗🔱 pic.twitter.com/Nw8001IY3T
— D (@Deb_livnletliv) August 12, 2026
Haridwar Kanwar Yatra:13 दिनों में 4 करोड़ 80 लाख से ज्यादा कांवड़िए
इस साल कांवड़ मेले में शिवभक्तों की संख्या ने पिछले कई वर्षों के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया. मेला अवधि के 13 दिनों में कुल 4 करोड़ 80 लाख 40 हजार से अधिक कांवड़िए हरिद्वार पहुंचे.
श्रद्धालुओं ने हरकी पैड़ी और शहर के दूसरे गंगा घाटों पर स्नान किया. इसके बाद गंगाजल लेकर अपने-अपने राज्यों की ओर रवाना हुए. कांवड़ यात्रा के अंतिम चरण में हरिद्वार से लेकर उत्तर भारत के विभिन्न हिस्सों तक सड़कों और हाईवे पर कांवड़ियों की भारी भीड़ दिखाई दी.
पिछले साल यानी 2025 में करीब 4 करोड़ 52 लाख कांवड़िए हरिद्वार पहुंचे थे. इस लिहाज से इस साल श्रद्धालुओं की संख्या में करीब 28 लाख से अधिक की बढ़ोतरी हुई है.
घाटों पर जमा हुआ 7 हजार मीट्रिक टन कचरा
करोड़ों कांवड़ियों के हरिद्वार पहुंचने का असर शहर की सफाई व्यवस्था पर भी पड़ा. भारी भीड़ के चलते गंगा घाटों, सड़कों और आसपास के इलाकों में बड़ी मात्रा में कचरा जमा हुआ.
उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, कांवड़ मेले के दौरान करीब 7,000 मीट्रिक टन कचरा एकत्र हुआ. नगर निगम की सफाई टीमें लगातार अभियान चलाकर इसे हटाने में लगी हैं. अब तक 5,500 मीट्रिक टन से ज्यादा कचरा साफ किए जाने की बात सामने आई है.
नगर निगम के सामने अब मेले के बाद शहर और घाटों को पूरी तरह साफ करने की चुनौती है. बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की आवाजाही के कारण घाटों के अलावा पार्किंग क्षेत्रों, सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर भी सफाई व्यवस्था का दबाव बढ़ा.
चेंजिंग रूम में मिली पेशाब से भरी बोतलें
कांवड़ मेले के बाद हरिद्वार के कुछ घाटों पर सफाई के दौरान ऐसी तस्वीरें भी सामने आई हैं, जिन्होंने सफाई व्यवस्था के साथ-साथ सार्वजनिक स्थानों के इस्तेमाल को लेकर सवाल खड़े किए हैं.
हरकी पैड़ी समेत कुछ घाटों पर बनाए गए चेंजिंग रूम में पेशाब से भरी कई बोतलें मिलने की बात सामने आई है. सफाईकर्मियों का आरोप है कि कुछ कांवड़िए पानी की खाली बोतलों में पेशाब करके उन्हें चेंजिंग रूम के अंदर छोड़ गए.
सफाईकर्मियों के मुताबिक, चेंजिंग रूम में कपड़े बदलने के लिए आने वाले कुछ लोगों ने खाली बोतलों का इस तरह इस्तेमाल किया और उन्हें वहीं छोड़ दिया.
हरिद्वार में कांवड़ यात्रा संपन्न होने के बाद जब सफाई शुरू हुई तो हर की पैड़ी पर बने चेंजिंग रूम में बहुत सारी पानी की बोतलों के अंदर पेशाब भरा मिला है। सफाईकर्मियों का आरोप है कि कांवड़िए ऐसा करके गए हैं। pic.twitter.com/VYSrEeiuzf
— Sachin Gupta (@Sachingupta) August 12, 2026
गंगा स्नान के बाद गंगाजल लेकर लौटे शिवभक्त
कांवड़ मेले के दौरान देश के अलग-अलग राज्यों से शिवभक्त हरिद्वार पहुंचे. श्रद्धालुओं ने गंगा में स्नान किया और हरकी पैड़ी समेत अन्य घाटों से गंगाजल उठाया.
इसके बाद कांवड़िए पैदल और वाहनों के जरिए अपने-अपने क्षेत्रों की ओर रवाना हुए. मंगलवार को बड़ी संख्या में कांवड़ियों ने अपने-अपने क्षेत्रों में स्थित शिवालयों में पहुंचकर भगवान शिव का जलाभिषेक किया.
पुलिस-प्रशासन के सामने रही बड़ी चुनौती
इस बार कांवड़ियों की रिकॉर्ड संख्या ने पुलिस और प्रशासन के लिए भी बड़ी चुनौती खड़ी की. करोड़ों लोगों की आवाजाही को देखते हुए हरिद्वार और आसपास के क्षेत्रों में यातायात, सुरक्षा, पार्किंग, भीड़ नियंत्रण और सफाई व्यवस्था पर विशेष जोर दिया गया.
कांवड़ियों की भारी भीड़ के कारण हरिद्वार से निकलने वाले प्रमुख हाईवे और संपर्क मार्गों पर भी लगातार दबाव बना रहा. प्रशासन को भीड़ के प्रबंधन के साथ-साथ गंगा घाटों की व्यवस्था संभालनी पड़ी.
पिछले साल से कितनी बढ़ी कांवड़ियों की संख्या?
आंकड़ों पर नजर डालें तो इस साल कांवड़ यात्रा में श्रद्धालुओं की संख्या में बड़ा इजाफा हुआ है.
- 2025: करीब 4 करोड़ 52 लाख कांवड़िए
- 2026: 4 करोड़ 80 लाख 40 हजार से अधिक कांवड़िए
- बढ़ोतरी: करीब 28 लाख 40 हजार से अधिक
इस तरह इस साल कांवड़ मेले ने पिछले साल के आंकड़े को पीछे छोड़ते हुए नया रिकॉर्ड कायम किया।
आस्था के साथ स्वच्छता की चुनौती भी
हरिद्वार में करोड़ों श्रद्धालुओं का पहुंचना धार्मिक आस्था की विशालता को दर्शाता है, लेकिन इतनी बड़ी भीड़ के बाद शहर और गंगा घाटों पर सफाई बनाए रखना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन जाता है.
इस बार जहां कांवड़ियों की संख्या ने नया रिकॉर्ड बनाया, वहीं हजारों टन कचरे ने स्वच्छता और कचरा प्रबंधन को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं. ऐसे में भविष्य में इतने बड़े धार्मिक आयोजनों के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधा के साथ-साथ स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण पर और ज्यादा ध्यान देने की जरूरत होगी.

