सावन में घर पर कर सकते हैं रुद्राभिषेक, पंडित जी ने बताई पूरी विधि

करौली के आध्यात्मिक गुरु पं. हरिमोहन शर्मा कहते है कि रुद्राभिषेक में सामग्री से अधिक महत्व श्रद्धा और भक्ति का है. इसलिए घर पर पूजा करते समय मन को शांत रखते हुए भगवान शिव का ध्यान और 'ॐ नमः शिवाय' का जाप करना चाहिए. साथ ही इस सावन आप घर पर रुद्राभिषेक करना चाहते हैं तो उन्होंने इसके लिए एक सरल विधि भी बताई है.

सावन का पवित्र महीना भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष माना जाता है. इस दौरान शिवभक्त मंदिरों में जाकर भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक और रुद्राभिषेक करते हैं. हालांकि, यदि किसी कारणवश मंदिर जाना संभव न हो तो आप घर पर भी सरल विधि से भगवान शिव का रुद्राभिषेक कर सकते है.

धार्मिक मान्यता के अनुसार, श्रद्धा और शुद्ध मन से की गई शिव आराधना भगवान भोलेनाथ को प्रसन्न करने वाली मानी जाती है. करौली के आध्यात्मिक गुरु पंडित हरिमोहन शर्मा के अनुसार, रुद्राभिषेक की पूर्ण वैदिक विधि रुद्री पाठ और विशेष मंत्रोच्चार के साथ किसी विद्वान पंडित से करवाना उत्तम माना जाता है. लेकिन सामान्य श्रद्धालु घर पर भी सरल विधि से भगवान शिव का अभिषेक कर सकते हैं. इसके लिए सबसे जरूरी है श्रद्धा, स्वच्छता और भगवान शिव का निरंतर स्मरण.

घर पर रुद्राभिषेक करने से पहले स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें. पूजा स्थल को साफ करके वहां शिवलिंग स्थापित करें. शिवलिंग को थाली या पूजा चौकी पर रखा जा सकता है. इसके बाद दीपक जलाकर भगवान गणेश का स्मरण करें.

पूजा के लिए शिवलिंग, शुद्ध जल, गंगाजल, दूध, दही, घी, शहद, चीनी या मिश्री, बेलपत्र, सफेद फूल, अक्षत, चंदन, धूप, दीपक, कपूर और फल-मिठाई रख सकते हैं. उपलब्धता के अनुसार पंचामृत भी तैयार किया जा सकता है. इसके बाद संकल्प लेकर शुरू करें अभिषेक.
रुद्राभिषेक से पहले हाथ में जल, अक्षत और फूल लेकर भगवान शिव का स्मरण करते हुए अपनी मनोकामना का संकल्प लें. इसके बाद जल छोड़ दें. अब शिवलिंग पर अभिषेक शुरू करें और पूरी पूजा के दौरान 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का जाप करते रहें.

सबसे पहले शिवलिंग पर शुद्ध जल या गंगाजल की पतली धारा चढ़ाएं. इसके बाद दूध से अभिषेक करें और फिर जल से शिवलिंग को धोएं. इसी तरह दही, घी और शहद से अभिषेक करें और प्रत्येक द्रव्य के बाद जल अर्पित करें. इसके बाद चीनी या मिश्री के घोल अथवा पंचामृत से अभिषेक किया जा सकता है. अंत में एक बार फिर शुद्ध जल या गंगाजल से शिवलिंग का अभिषेक करें.

इसके बाद अभिषेक पूरा होने के बाद शिवलिंग को साफ कपड़े से हल्के हाथों से पोंछकर चंदन लगाएं. इसके बाद बेलपत्र, फूल और अक्षत अर्पित करें. धूप और दीपक जलाकर भगवान शिव की आराधना करें. धार्मिक मान्यता में बेलपत्र को भगवान शिव को प्रिय माना गया है.

पूजा के अंत में भगवान शिव को फल, मिठाई या पंचामृत का भोग लगाएं. इसके बाद कपूर या दीपक से आरती करें. श्रद्धालु अपनी श्रद्धा के अनुसार शिव आरती या भगवान शिव के अन्य स्तोत्र का पाठ कर सकते हैं. आरती के बाद हाथ जोड़कर भगवान शिव से अपनी मनोकामना पूरी करने की प्रार्थना करें. अंत में भगवान का प्रसाद स्वयं ग्रहण करें और परिवार के सदस्यों में भी बांटें

 

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