MLC Election Results नई दिल्ली : चार राज्यों की विधान परिषद सीटों पर हुए चुनाव में कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है.उत्तर प्रदेश,महाराष्ट्र,कर्नाटक और बिहार की कुल 28 सीटों पर हुए चुनाव में कांग्रेस को एक भी सीट नहीं मिली. पार्टी ने इनमें से 12 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन किसी भी सीट पर जीत दर्ज नहीं कर सकी.कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार होने के बावजूद पार्टी को विधान परिषद चुनाव में सफलता नहीं मिली.
वहीं, भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने इन चुनावों में 22 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे, जिनमें से 14 सीटों पर जीत हासिल करने का दावा दिए गए आंकड़ों में किया गया है. इन नतीजों ने कांग्रेस के संगठन, उम्मीदवारों के चयन और चुनावी रणनीति पर सवाल खड़े कर दिए हैं.
हालांकि, महाराष्ट्र की तीन सीटों पर मतगणना जारी होने की जानकारी भी सामने आई है. ऐसे में सभी सीटों के अंतिम नतीजों और पार्टीवार आंकड़ों की आधिकारिक पुष्टि के बाद ही चुनाव की पूरी तस्वीर स्पष्ट होगी.
12 सीटों पर चुनाव लड़ी कांग्रेस, सभी पर हार !
अब तक की जानकारी के अनुसार, कांग्रेस ने चार राज्यों में कुल 12 विधान परिषद सीटों पर चुनाव लड़ा था. इनमें बिहार की5 और महाराष्ट्र की 3 सीटें शामिल थीं. पार्टी को इन दोनों राज्यों में भी अपेक्षित सफलता नहीं मिली.
उत्तर प्रदेश में कांग्रेस ने 11 विधान परिषद सीटों में से किसी पर उम्मीदवार नहीं उतारा था. वहीं,कर्नाटक में सत्ता में होने के बावजूद पार्टी को इन चुनावों में कोई सीट नहीं मिली.
कांग्रेस के लिए यह परिणाम इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि पार्टी लगातार चुनाव प्रक्रिया और मतपत्रों के इस्तेमाल को लेकर सवाल उठाती रही है. विधान परिषद चुनाव में मतपत्रों का इस्तेमाल होने के बावजूद हार का सामना करने पर विरोधी दलों ने कांग्रेस पर निशाना साधा है.
बिहार में कांग्रेस के प्रदर्शन पर पार्टी के भीतर सवाल
बिहार में कांग्रेस के चुनावी प्रदर्शन को लेकर पार्टी के नेताओं ने चिंता जताई है.कांग्रेस सांसद मनोज कुमार ने मीडिया से बातचीत में कहा कि बिहार के नतीजे चिंताजनक हैं और नेताओं की जवाबदेही तय की जानी चाहिए.
उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी से संगठन की कमियों पर संज्ञान लेने की अपील की.मनोज कुमार के मुताबिक, चुनाव प्रचार में नेताओं को उचित जिम्मेदारी नहीं दी गई. उन्होंने कहा कि वह खुद अपनी इच्छा से सदाकत आश्रम स्थित पार्टी कार्यालय पहुंचे थे और उन्हें किसी ने प्रचार या संगठनात्मक काम नहीं सौंपा था.
उनकी टिप्पणी से बिहार में चुनावी प्रबंधन और संगठनात्मक समन्वय को लेकर पार्टी के भीतर उठ रहे सवाल सामने आए हैं.
कर्नाटक में बीजेपी-जेडीएस गठबंधन का प्रदर्शन
कर्नाटक में कांग्रेस के लिए सबसे बड़ा झटका सामने आया, जहां विधान परिषद की चार सीटों पर हुए चुनाव में बीजेपी और जनता दल (सेक्युलर) यानी जेडीएस गठबंधन ने सभी सीटें जीत लीं. इनमें बीजेपी ने तीन और जेडीएस ने एक सीट हासिल की.
यह परिणाम इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार है. चुनाव में शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के मतदाताओं ने हिस्सा लिया था. इन सीटों पर जीत के लिए स्थानीय समीकरण, उम्मीदवारों की पकड़ और शिक्षक-स्नातक मतदाताओं का समर्थन अहम होता है.
बीजेपी-जेडीएस गठबंधन की सफलता ने कांग्रेस के संगठनात्मक प्रबंधन और चुनावी तैयारी पर सवाल खड़े किए हैं. हालांकि, विधान परिषद की इन सीमित सीटों के नतीजों को पूरे राज्य के जनमत का सीधा संकेत नहीं माना जा सकता.
बैलेट पेपर पर चुनाव, बीजेपी ने कांग्रेस पर कसा तंज
इन चुनावों की चर्चा बैलेट पेपर के इस्तेमाल को लेकर भी हो रही है. कांग्रेस लंबे समय से ईवीएम की जगह बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग करती रही है ऐसे में बैलेट पेपर से हुए विधान परिषद चुनाव में पार्टी को कोई सीट नहीं मिलने पर बीजेपी नेताओं ने कांग्रेस पर निशाना साधा.
बीजेपी प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने कहा कि मतदाता ईवीएम और बैलेट पेपर, दोनों तरह के चुनावों में कांग्रेस को नकार रहे हैं. उन्होंने राहुल गांधी और कांग्रेस की चुनावी राजनीति पर भी सवाल उठाए.
हालांकि, इन चुनावों के नतीजों को समझते समय यह ध्यान रखना जरूरी है कि विधान परिषद के शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में मतदाता सामान्य विधानसभा या लोकसभा चुनावों के मतदाताओं से अलग होते हैं. इसलिए इन परिणामों से सभी मतदाताओं की पसंद के बारे में निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा.
महाराष्ट्र में मतगणना जारी, अंतिम तस्वीर का इंतजार
महाराष्ट्र में विधान परिषद की पांच सीटों पर मतगणना जारी रहने की जानकारी सामने आई है. कांग्रेस ने इनमें से तीन सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे. शुरुआती रुझानों में पार्टी के उम्मीदवारों को लेकर मुकाबला बना हुआ था, लेकिन अंतिम परिणाम आने तक जीत-हार की स्थिति को लेकर सावधानी बरतना जरूरी है.
चार राज्यों में हुए इन चुनावों ने कांग्रेस के सामने संगठनात्मक चुनौतियों को फिर चर्चा में ला दिया है. खास तौर पर बिहार में उम्मीदवार चयन और प्रचार की जिम्मेदारी को लेकर पार्टी नेताओं की टिप्पणियां बताती हैं कि नतीजों के बाद आत्ममंथन की मांग उठ रही है.
क्या कहते हैं चुनाव के नतीजे?
विधान परिषद चुनावों के नतीजे कांग्रेस के लिए चुनौतीपूर्ण हैं. पार्टी को कर्नाटक में सत्ता में होने के बावजूद सफलता नहीं मिली और बिहार में भी उसके उम्मीदवारों को हार का सामना करना पड़ा. दूसरी ओर, बीजेपी और उसके सहयोगियों ने कई सीटों पर जीत हासिल की.
अब कांग्रेस के सामने संगठनात्मक कमजोरियों की समीक्षा, उम्मीदवार चयन में सुधार और स्थानीय स्तर पर चुनावी प्रबंधन मजबूत करने की चुनौती है. महाराष्ट्र सहित जिन सीटों पर मतगणना जारी है, उनके अंतिम नतीजों के बाद ही चारों राज्यों की पूरी तस्वीर स्पष्ट होगी.

