कांग्रेस नेता राहुल गांधी Rahul Gandhi ने बुधवार को कहा कि टाटा ग्रुप को “क्रिमिनल तरीके से बर्बाद” किया जा रहा है और कोई भी बिज़नेस लीडर एक शब्द भी कहने की हिम्मत नहीं कर रहा है, उन्होंने सवाल किया कि वे कब तक चुप रहेंगे.
Rahul Gandhi का बिजनेस लीडर्स से सवाल- आप कब तक चुप रहोगे?
उन्होंने X पर एक पोस्ट में कहा, “टाटा को क्रिमिनल तरीके से बर्बाद किया जा रहा है, और कोई भी बिज़नेस लीडर एक शब्द भी कहने की हिम्मत नहीं कर रहा है. आप कब तक चुप रहोगे? जब तक वे तुम्हें अपना नहीं बना लेते?
भारतीय बिज़नेस मोदी और शाह का खिलौना नहीं है. आपमें हिम्मत की कमी है. हममें नहीं है. हम इन अपराधों के लिए न्याय पक्का करेंगे.”
Tata is being criminally destroyed, and no business leader dares say a word. How long will you stay silent? Until they own you? Indian business is not Modi and Shah’s plaything. You lack courage. We don’t. We will ensure justice for these crimes.
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) October 28, 2026
खबर के लिखे जाने तक भारतीय जनता पार्टी (BJP) या टाटा ग्रुप की तरफ से तुरंत कोई जवाब नहीं आया.गांधी का यह पोस्ट देश के सबसे पुराने ग्रुप्स में से एक की होल्डिंग कंपनी टाटा संस और कंट्रोलिंग शेयरहोल्डर, टाटा ट्रस्ट्स के बीच पावर की लड़ाई के बीच आया है.
टाटा संस और टाटा ट्रस्ट्स के बीच जारी है पावर की लड़ाई
टाटा ट्रस्ट्स के चेयरपर्सन नोएल टाटा ने 17 सितंबर के उस प्रस्ताव का विरोध किया जिसमें एन चंद्रशेखरन को उनके मौजूदा कार्यकाल के खत्म होने के बाद पांच साल के और कार्यकाल के लिए टाटा संस का एग्जीक्यूटिव चेयरमैन फिर से नियुक्त करने का प्रस्ताव था. उन्होंने तर्क दिया कि बोर्ड ने 2022 में चंद्रशेखरन को फिर से नियुक्त करने के समय अपनाए गए संवैधानिक रास्ते से अलग रास्ता अपनाया.
ट्रस्ट का कहना है कि उनके नॉमिनी डायरेक्टर्स में से ज़्यादातर का सपोर्ट एक वैलिड रेज़ोल्यूशन के लिए एक शर्त थी और चेयरमैन का कास्टिंग वोट उस शर्त को पूरा न कर पाने की स्थिति को दूर नहीं कर सकता था.
टाटा संस ने कंपनी के आर्टिकल्स ऑफ़ एसोसिएशन (AoA) के आर्टिकल्स 104B, 118 और 121 की अलग-अलग रीडिंग पर भरोसा किया है, जिसमें वोट बराबर होने पर कास्टिंग वोट का प्रोविज़न भी शामिल है. दोनों पक्षों को मिली कानूनी राय में इस बात पर अलग-अलग विचार हैं कि क्या आर्टिकल 118 किसी मौजूदा चेयरमैन की दोबारा नियुक्ति पर लागू होता है और कास्टिंग वोट कैसे काम करता है.
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