MLC Election:कांग्रेस की हार पर PM मोदी के तंज को सीजेपी ने लपका,पीएम से पूछा बड़ा सवाल

MLC Election PM Modi Tweet : चार राज्यों के विधान परिषद (MLC) चुनावों के नतीजों को लेकर आ रही  राजनीतिक बयानबाजी रोचक हो गई है. एमएलसी चुनाव के रिजल्ट में कांग्रेस की कई सीटों पर हुई हार के बाद  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तंज कसते हुए एक ट्वीट किया कि बैलेट पेपर से चुनाव हुए फिर भी पार्टी को कितनी सीटें मिलीं ? पीएम मोदी का ट्वीट सुर्खियां बटोर रही रहा था कि इस पर आशुतोष रांका ने जोरदार प्रतिक्रिया है.

रांका ने प्रधानमंत्री के पोस्ट पर सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या सरकार देश के सभी चुनाव मतपत्र यानी बैलेट पेपर के माध्यम से कराने के लिए तैयार है? उनके इस सवाल ने चुनाव प्रक्रिया, इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) और विपक्ष की ओर से उठाई जाने वाली बैलेट पेपर की मांग को फिर चर्चा में ला दिया है.

आशुतोष रांका ने PM मोदी से क्या पूछा?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए आशुतोष रांका ने एक्स पर लिखा, ‘क्या इसका मतलब यह है कि आप सभी चुनाव मतपत्रों के माध्यम से कराने के लिए तैयार हैं?’

रांका ने इस सवाल को पूछ कर एअक बार फिर से चुनावों में EVM के इस्तेमाल और बैलेट पेपर से मतदान कराने की मांग को लेकर चल रही राजनीति को चर्चा में ला दिया है.

प्रधानमंत्री मोदी ने MLC चुनाव के परिणामों के संदर्भ में कांग्रेस के प्रदर्शन पर कटाक्ष किया था। रांका ने इसी टिप्पणी को आधार बनाकर चुनाव कराने की व्यवस्था को लेकर सवाल उठाया. उनकी प्रतिक्रिया का मुख्य मुद्दा यह था कि यदि बैलेट पेपर से हुए चुनावों के नतीजों को कांग्रेस के प्रदर्शन पर टिप्पणी करने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है, तो क्या सभी चुनावों में भी इसी व्यवस्था को अपनाया जा सकता है?

PM मोदी ने कांग्रेस पर क्यों कसा तंज?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को एक्स पर पोस्ट करते हुए कांग्रेस के चुनावी प्रदर्शन पर सवालिया अंदाज में टिप्पणी की। उन्होंने लिखा, ‘अनुमान लगाइए कि कांग्रेस ने कितनी सीटें जीतीं?’

यह टिप्पणी चार राज्यों की विधान परिषद की 28 सीटों से जुड़े चुनाव परिणामों के संदर्भ में की गई थी. इन चुनावों में स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों की सीटें शामिल थीं.

प्रधानमंत्री की टिप्पणी को कांग्रेस के प्रदर्शन और विपक्ष की ओर से EVM को लेकर उठाए जाने वाले सवालों के संदर्भ में देखा जा रहा है. विपक्ष के कुछ नेता चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर सवाल उठाते रहे हैं और बैलेट पेपर से मतदान कराने की मांग भी करते रहे हैं.

चार राज्यों की 28 MLC सीटों के नतीजों पर चर्चा

वर्ष 2026 के विधान परिषद चुनावों में उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र और कर्नाटक के स्नातक तथा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों की सीटें शामिल थीं. इन चुनावों के नतीजों को लेकर राजनीतिक दलों के बीच प्रतिक्रियाएं सामने आईं.

उत्तर प्रदेश में 11, बिहार में 8, महाराष्ट्र में 5 और कर्नाटक में 4 सीटों के लिए चुनाव हुए। इस तरह चारों राज्यों में कुल 28 सीटों पर चुनावी प्रक्रिया पूरी हुई.

इन सीटों के चुनाव सामान्य विधानसभा चुनावों से अलग होते हैं. स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में निर्धारित पात्रता रखने वाले पंजीकृत मतदाता मतदान करते हैं, जबकि शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में निर्धारित शर्तों को पूरा करने वाले पंजीकृत शिक्षक मतदाता होते हैं.

इसी वजह से MLC चुनावों का मतदाता आधार विधानसभा या लोकसभा चुनावों की तुलना में अलग होता है. इन चुनावों के परिणामों को समझते समय संबंधित निर्वाचन क्षेत्र और उसकी मतदाता संरचना को ध्यान में रखना जरूरी है.

उत्तर प्रदेश और बिहार में कितनी सीटों पर हुए चुनाव?

उत्तर प्रदेश में विधान परिषद की 11 सीटों के लिए चुनाव हुए. इनमें पांच स्नातक निर्वाचन क्षेत्र और छह शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र शामिल थे.

बिहार में आठ सीटों पर चुनाव हुए. इनमें चार स्नातक और चार शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र थे.

महाराष्ट्र में पांच सीटों के लिए मतदान हुआ, जिनमें तीन स्नातक और दो शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र शामिल थे. वहीं, कर्नाटक में चार सीटों पर चुनाव हुए.इन चारों राज्यों के परिणामों को लेकर प्रधानमंत्री मोदी की टिप्पणी के बाद कांग्रेस के प्रदर्शन पर चर्चा शुरू हुई.

कर्नाटक में कांग्रेस को चारों सीटों पर हार का सामना

कर्नाटक की चारों MLC सीटों पर कांग्रेस को हार मिली. इस परिणाम को लेकर भी राजनीतिक चर्चा हो रही है.

महाराष्ट्र में सत्ताधारी महायुति गठबंधन और विपक्षी महा विकास अघाड़ी (MVA) के बीच मुकाबला रहा. चुनाव परिणामों में कांग्रेस के प्रदर्शन को लेकर सवाल उठे, जबकि अन्य राज्यों में भी दलों के बीच सीटों का बंटवारा राजनीतिक चर्चा का विषय बना. हालांकि, इन चुनावों के नतीजों के आधार पर पूरे देश में किसी दल के जनसमर्थन का निष्कर्ष निकालना ठीक नहीं है, क्योंकि स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों का मतदाता वर्ग सीमित और विशिष्ट होता है.

EVM बनाम बैलेट पेपर की बहस फिर चर्चा में

भारत में चुनावों में EVM के इस्तेमाल को लेकर समय-समय पर राजनीतिक बहस होती रही है। विपक्ष के कुछ दलों ने चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता को लेकर सवाल उठाए हैं. कुछ नेताओं ने बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग भी की है.

दूसरी ओर, चुनाव आयोग की ओर से चुनाव प्रक्रिया और EVM की सुरक्षा को लेकर निर्धारित नियमों तथा तकनीकी व्यवस्थाओं का हवाला दिया जाता रहा है.

प्रधानमंत्री मोदी की कांग्रेस पर टिप्पणी के बाद आशुतोष रांका ने सभी चुनाव बैलेट पेपर से कराने को लेकर सवाल उठाया है और यही सवाल अब तमाम विपक्ष के लिए हथियार बन सकता है.

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