Bhagalpur Bridge को लेकर मंत्री तेज प्रताप का बड़ा बयान-बीजेपी ने गिराया पुल….

पटना : बिहार में भागलपुर  के सुल्तानगंज अगवानी घाट पुल (Bhagalpur Bridge)के दोबारा ध्वस्त होने के बाद से ही पक्ष विपक्ष की तू तू-मैं मैं जारी है. बिहार सरकार के मंत्री तेज प्रताप यादव ने आज सनसनीखेज आरोप लगाते हुए कहा कि पुल बीजेपी ने गिराया है. मंत्री तेज प्रताप यादव ने कह कि हम लोग पुल बनाते हैं और बीजेपी के लोग पुल गिरा रहे हैं.

तेजस्वी यादव का दावा- पुल को हम गिराने वाले थे ..

आपको बता दें कि इससे पहले रविवार को घटना वाले दिन भी बिहार सरकार में डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव कह चुके है कि हम इस पुल को गिराकर दोबारा पुल बनाने की तैयारी कर रहे थे. बाकायदा तेजस्वी यादव ने IIT खड़गपुर की रिपोर्ट के साथ प्रेस कांफ्रेंस की और कहा कि सरकार इस पुल को गिरा कर पुल बनाने की तैयारी कर ही रही थी.

पुल बनाने का ठेका लेने वाली कंपनी पर भ्रष्टाचार के आरोप

दरअसल गंगा नदी पर सुल्तानगंज और अगवानी घाट को जोड़ने वाला ये पुल शुरु से ही विवादों में रही है. जिस एचपी  सिंगला कंपनी को इस पुल को बनाने का ठेका दिया गया है उस पर लगातार घटिया काम करने के आरोप लगते रहे हैं. सबसे बड़ा आरोप ये है कि, केवल कमिशन के बल पर ये कंपनी अपने लिए सरकारी प्रजेक्ट लेती रही है.

प्रतिबंधित एपपी सिंगला कंपनी को कैसे मिला ठेका?

पुल का टेंडर लेने वाली कंपनी को इसका ठेका उस समय दिया गया था जब ये कंपनी टेंडर के लिए लिस्टेड भी नहीं थी. कंपनी प्रतिबंधित थी इसके बावजूद कंपनी को इतना बड़ा कांट्रेक्ट दिया गया. सवाल ये भी है कि किसके दवाब में एक प्रतिबंधित कंपनी को इस पुल को बनाने का ठेका दिया गया.

अधिकारियों पर लगे थे भ्रष्टाचार को दबाने  के आरोप

14 महीने पहल जब इसी पुल का हिस्सा गिरा था तब भी कई अधिकारी इस कंपनी के भ्रष्टाचार को दबाने में लगे हुए थे. 600 करोड़ से शुरु हुआ प्रोजेक्ट 17 सौ करोड़, तक पहुंच गया औऱ शायद इसे 27 सौ करोड़ तक पहुंचाने की अधिकारियों की मंशा थी.  कहा जा रहा है कि कई अधिकारियों को इसके एवज में कमिशन मिल रहा था. इस पुल ने एक बार फिर से ध्वस्त होकर बिहार में नेताओं, अधिकारियों और ठेका लेने वाली कंपनियों के भ्रष्टाचार की पोल खोल दी है.

सरकार की मंशा पर सवाल

पिछले साल जब पुल का हिस्सा हल्की सी हवा के गिर गया था, तब भी सरकार ने जांच कराने और दोषियों पर कार्रवाई करने की बात कही थी. जांच भी हुई और रिपोर्ट भी आई लेकिन सरकार ने तब तक रिपोर्ट को पब्लिक नहीं किया जब तक हादसा हो नहीं गया.

ऐसे में सरकार की मंशा पर भी सवाल उठ रहे हैं. क्या सरकार किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार कर रही थी. आखिर रिपोर्ट आने के बावजूद उसे पब्लिक क्यों नहीं किया गया और काम कर रही कंपनी से इसके बारे में बात क्यों नहीं की गई. एच पी सिंगला कंपनी पर सरकार ने कोई कार्रवाई क्यों नही की ?

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पक्ष और विपक्ष का आरोप प्रत्यारोप का खेल

बिहार में पक्ष और विपक्ष एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप का खेल खेल रहा है. सत्तारुढ दल का आरोप है कि बीजेपी- जदयू की गठबंधन सरकार से समय में पुल की नींव रखी गई और इसका उद्धाटन खुद प्रधानमंत्री मोदी ने किया था. ऐसे में एपपी सिंगला कंपनी को इसका ठेका दिया गया था.

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कुल मिलाकर सवाल ये उठता है कि, अगर पुल में घटिया निर्माण सामग्री का इस्तेमाल हो रहा था, और सरकार के पास इसकी रिपोर्ट भी थी. इसके बावजूद सरकार किस बात की इंतजार कर रही थी?

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