UP Tourism Policy 2026 लखनऊ : उत्तर प्रदेश की पर्यटन नीति में जल्द ही महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल सकते हैं. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पर्यटन विभाग की समीक्षा बैठक में स्पष्ट किया कि पर्यटन विकास को केवल सड़क, भवन और अन्य आधारभूत संरचनाओं तक सीमित न रखा जाए, बल्कि इसे सांस्कृतिक पुनर्जागरण, स्थानीय अर्थव्यवस्था, रोजगार सृजन और प्रदेश की वैश्विक पहचान से जोड़कर आगे बढ़ाया जाए.
बैठक के दौरान नीम करोली बाबा सर्किट और बुंदेलखंड फोर्ट सर्किट जैसे नए पर्यटन क्षेत्रों के विकास पर विस्तार से चर्चा हुई. इसके साथ ही ‘परंपरा’ विरासत अनुभव केंद्र, कृषि पर्यटन (एग्री टूरिज्म) और वाइनयार्ड पर्यटन जैसी नई अवधारणाओं को भी बढ़ावा देने पर विचार किया गया.

UP Tourism Policy 2026:पर्यटन बनेगा सांस्कृतिक अर्थव्यवस्था का मजबूत आधार
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश केवल आस्था और धार्मिक पर्यटन का केंद्र नहीं है, बल्कि यह भारत की सांस्कृतिक चेतना, आध्यात्मिक परंपरा और ज्ञान विरासत का प्रतिनिधित्व करने वाला प्रदेश है. उन्होंने कहा कि पर्यटन क्षेत्र के विस्तार से स्थानीय उत्पादों, हस्तशिल्प, पारंपरिक कला, खानपान, संस्कृति और सेवा क्षेत्र को नए अवसर मिलेंगे.
सीएम योगी ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि पर्यटन विकास की योजनाएं ऐसी हों, जो प्रदेश के युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा करें और निवेश को आकर्षित करें.

ज्ञान भारतम् मिशन के तहत पांडुलिपियों के संरक्षण पर जोर
बैठक में मुख्यमंत्री ने भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण से जुड़े ज्ञान भारतम् मिशन की भी समीक्षा की. उन्होंने कहा कि भारत की प्राचीन पांडुलिपियां देश की सभ्यता, दर्शन, विज्ञान और सांस्कृतिक चेतना की अमूल्य धरोहर हैं.
अधिकारियों ने बताया कि अब तक 13.70 लाख से अधिक पांडुलिपियों का सर्वेक्षण, डिजिटलीकरण और संरक्षण किया जा चुका है. मुख्यमंत्री ने कहा कि यह कार्य केवल दस्तावेजों को सुरक्षित रखने का नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को अपनी जड़ों से जोड़ने का भी माध्यम है.
पर्यटन नीति-2022 में संशोधन की तैयारी
पर्यटन नीति-2022 में प्रस्तावित संशोधनों की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश को अनुभव-आधारित पर्यटन, नवाचार और निवेश का अग्रणी केंद्र बनाया जाना चाहिए.
उन्होंने कहा कि नई पर्यटन नीति ऐसी होनी चाहिए जो निवेशकों को आकर्षित करे, रोजगार बढ़ाए और देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को विशिष्ट और यादगार अनुभव प्रदान करे.
आगरा में बन रहे छत्रपति शिवाजी महाराज संग्रहालय की समीक्षा
मुख्यमंत्री ने आगरा में निर्माणाधीन छत्रपति शिवाजी महाराज संग्रहालय की भी समीक्षा की. उन्होंने कहा कि राष्ट्रनायकों की प्रेरक गाथाओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाना राष्ट्रीय दायित्व है.
संग्रहालय में छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन, स्वराज्य स्थापना, आगरा आगमन, औरंगजेब के दरबार में उनके साहस, ऐतिहासिक पलायन, राज्याभिषेक, सैन्य नेतृत्व और हिंदवी स्वराज्य की अवधारणा को आधुनिक तकनीकों के माध्यम से प्रदर्शित किया जाएगा.
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि संग्रहालय में मराठा साम्राज्य और उत्तर प्रदेश के ऐतिहासिक संबंधों, काशी विश्वनाथ मंदिर के पुनरुद्धार में अहिल्याबाई होल्कर की भूमिका, ब्रज संस्कृति और स्वतंत्रता संग्राम के नायकों को भी प्रमुखता दी जाए.
नैमिषारण्य को मिलेगा विश्वस्तरीय स्वरूप
बैठक में नैमिषारण्य के समग्र विकास की भी समीक्षा की गई. मुख्यमंत्री ने कहा कि नैमिषारण्य केवल एक तीर्थस्थल नहीं, बल्कि भारत की वैदिक ज्ञान परंपरा और आध्यात्मिक विरासत का जीवंत केंद्र है.
समग्र मास्टर प्लान के तहत यहां वेद विज्ञान केंद्र, वैदिक थीम पार्क, राजघाट रिवरफ्रंट, नैमिष हाट, तीर्थयात्री आवास, इंटरप्रिटेशन सेंटर और आधुनिक पर्यटन सुविधाओं का विकास किया जाएगा.
इंटरप्रिटेशन सेंटर में प्रोजेक्शन मैपिंग, लेजर शो, दशावतार विजुअलाइजेशन और पारंपरिक ग्रामीण जीवन के अनुभव को आधुनिक तकनीक के जरिए प्रस्तुत किया जाएगा. मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि इस महत्वाकांक्षी परियोजना को मिशन मोड में आगे बढ़ाया जाए.
उत्तर प्रदेश सरकार पर्यटन को केवल यात्रा और दर्शनीय स्थलों तक सीमित न रखकर उसे आर्थिक विकास, सांस्कृतिक संरक्षण और रोजगार सृजन के बड़े माध्यम के रूप में विकसित करने की दिशा में काम कर रही है. नीम करोली बाबा सर्किट, बुंदेलखंड फोर्ट सर्किट, कृषि पर्यटन और नैमिषारण्य जैसी परियोजनाएं आने वाले समय में प्रदेश को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान दिला सकती हैं.

