Lucknow Fire Tragedy : लखनऊ के अलीगंज क्षेत्र में हुए भीषण अग्निकांड में 15 लोगों की दर्दनाक मौत के बाद प्रशासन ने जांच और कार्रवाई का सिलसिला तेज कर दिया है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर गठित दो सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) मंगलवार को घटनास्थल पर पहुंचा और हादसे के कारणों की गहन पड़ताल शुरू कर दी. SIT को सात दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपने का निर्देश दिया गया है.
Lucknow, Uttar Pradesh: ADG Lucknow Praveen Kumar says, “Following the directives of the Chief Minister, a Special Investigation Team has been constituted. We are currently conducting a spot inspection. We will investigate all aspects in depth, from the liability perspective of… pic.twitter.com/n6r0sIDL38
— IANS (@ians_india) June 23, 2026
Lucknow Fire Tragedy : 15 लोगों की गई जान, अधिकांश युवा छात्र
सोमवार को अलीगंज स्थित तीन मंजिला व्यावसायिक भवन में अचानक आग लग गई थी, इस हादसे में 15 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई लोग घायल हुए हैं. मृतकों में अधिकांश छात्र, प्रशिक्षु और एनीमेशन-गेमिंग संस्थान से जुड़े युवा बताए जा रहे हैं. आग इतनी तेजी से फैली कि कई लोगों को बाहर निकलने का मौका तक नहीं मिला. इस बिल्डिंग के अंदर एक लाइब्रेरी, एक गेमिंज जोन और एक पेट शॉप थी.
घटनास्थल पर पहुंची SIT, हर पहलू की होगी जांच
योगी सरकार के द्वारा गठित SIT में वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी शामिल हैं. जांच टीम यह पता लगाएगी कि आग लगने का वास्तविक कारण क्या था, भवन में अग्नि सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम थे या नहीं, और कहीं प्रशासनिक लापरवाही तो इस त्रासदी की वजह नहीं बनी ? प्रारंभिक रिपोर्ट में आग की शुरुआत एसी डक्ट या शॉर्ट सर्किट से होने की आशंका जताई गई है. बताया दा रहा है कि इस तीन मंजिला इमारत को बनाने में फायर सेफ्टी नियमों की खुल कर धज्जियां उड़ाई गई था. प्रदेश की राजधानी के सबसे पॉश इलाके में इतनी जबर्दस्त तरीके से नियम कायदों की धज्जियां उड़ाई जा रही है औऱ प्रशासनिक अधिकारियों का इसकी भनक तक नहीं लगी, या अधिकारियों ने जानबूझ कर आंखें बंद कर रखी थी. जानकारी के मुताबिक इस बिल्डिंग में लगभग ऐसी ही स्थिति देखी गई जैसी दिल्ली के मालवीय नगर में देखी गई थी.
Lucknow, Uttar Pradesh: A Special Investigation Team (SIT) arrived at the site of the coaching centre fire incident to conduct a probe. SIT member Amrit Abhijat and ADG Lucknow Praveen Kumar are part of the investigation team pic.twitter.com/B5TR8zOYGw
— IANS (@ians_india) June 23, 2026
(सोशल मीडिया )
4 आरोपी गिरफ्तार, 4 अधिकारियों पर भी हुई कार्रवाई
हादसे के बाद पुलिस ने भवन संचालन और सुरक्षा मानकों में कथित लापरवाही के आरोप में चार लोगों को गिरफ्तार किया है. गिरफ्तार लोगों में 62 साल के बिल्डिंग मालिक वीरेंद्र प्रसाद शुक्ला , पेट शॉप/क्लिनिक संचालक (43 वर्ष) रामकृष्ण उपाध्याय , एनिमेशन सेंटर संचालक तुषार कृष्ण जायसवाल (31 वर्ष) और स्टूडियो ऑपरेटर किरायेदार सुरेश कुमार शाहू शामलि है.
इसके अलावा चार अधिकारियो पर भी कार्रवाई की गई है.
मुख्यमंत्री के निर्देश पर इन चार अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है. मामले में पुलिस ने छह नामजद आरोपियों समेत कई जिम्मेदार लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है.
LDA की जांच में सामने आई बड़ी गड़बड़ी
लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि जिस भवन में आग लगी, वह मूल रूप से आवासीय उपयोग के लिए स्वीकृत था लेकिन वर्षों से व्यावसायिक गतिविधियों के लिए इस्तेमाल किया जा रहा था. इस मामले में 16 अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ गई है.
ध्वस्तीकरण नोटिस पर भी उठे सवाल
हादसे के बाद LDA ने संबंधित भवन को ध्वस्त करने का नोटिस जारी किया है. हालांकि इस फैसले को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. कई लोगों का कहना है कि जांच पूरी होने से पहले ध्वस्तीकरण की कार्रवाई साक्ष्यों को प्रभावित कर सकती है. इस मुद्दे की भी अलग से जांच की मांग उठ रही है.
मुख्यमंत्री ने किया मुआवजे का ऐलान
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मृतकों के परिजनों को पांच-पांच लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है. साथ ही घायलों के बेहतर इलाज के निर्देश भी दिए गए हैं। मुख्यमंत्री स्वयं घटनास्थल पर पहुंचे और राहत एवं बचाव कार्यों की समीक्षा की.
सुरक्षा व्यवस्था पर खड़े हुए बड़े सवाल
अलीगंज अग्निकांड ने एक बार फिर उत्तर प्रदेश के व्यावसायिक भवनों में अग्नि सुरक्षा मानकों की पोल खोल दी है. शुरुआती जांच में सामने आया है कि भवन में पर्याप्त आपातकालीन निकास मार्ग नहीं था और धुएं के कारण लोग अंदर फंस गए. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सुरक्षा मानकों का पालन किया गया होता तो इतने बड़े पैमाने पर जनहानि टाली जा सकती थी.

