जम्मू और कश्मीर विधानसभा ने सोमवार को सदन में लंबी बहस के बाद मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला का राज्य का दर्जा बहाल करने का प्रस्ताव statehood resolution पास कर दिया, जिसमें ऑटोनॉमी और स्पेशल स्टेटस का ज़िक्र है.
ऑटोनॉमी और आर्टिकल 370 की बहाली के रेफरेंस के साथ पास हुआ प्रस्ताव
यह प्रस्ताव, जो असल में अब्दुल्ला ने 25 सितंबर को पेश किया था, नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) और विपक्षी पार्टियों के कई सदस्यों के ऑटोनॉमी और आर्टिकल 370 की बहाली के रेफरेंस को शामिल करने के लिए अमेंडमेंट पेश करने के बाद बहुमत से पास हो गया.
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेताओं ने प्रस्ताव का विरोध किया और चर्चा के दौरान सदन के वेल में खड़े होकर नारे लगाते रहे. ट्रेजरी बेंच ने भी आर्टिकल 370 से जुड़े मुद्दों पर बहस की.
कांग्रेस ने लगाया BJP पर “अंधराष्ट्रवाद” और “संविधान को तोड़ने” का आरोप
कांग्रेस नेता निज़ामुद्दीन ने बहस के दौरान BJP पर “अंधराष्ट्रवाद” और “संविधान को तोड़ने” का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि अगर BJP नैतिकता में विश्वास करती और “जम्मू-कश्मीर की दोस्त” होती, तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह राज्य का दर्जा बहाल करने के अपने वादे को पूरा करते.
बीजेपी ने किया statehood resolution के खिलाफ विधानसभा से वॉकआउट
वहीं, BJP विधायकों ने सोमवार को जम्मू-कश्मीर विधानसभा में पेश किए गए राज्य के प्रस्ताव में सदन के 2000 के ऑटोनॉमी प्रस्ताव का ज़िक्र किए जाने पर विरोध प्रदर्शन किया. लेकिन जब प्रस्ताव पर वोटिंग का समय आया तो BJP ने विधानसभा से वॉकआउट कर दिया.
BJP legislators on Monday staged a protest in the Jammu and Kashmir Legislative Assembly over the reference to the House’s 2000 autonomy resolution in the statehood resolution moved by Chief Minister Omar Abdullah. pic.twitter.com/uljEHqaLv4
— Kashmir News Trust༝ (@newsagencyknt) September 28, 2026
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