सीट बड़ी चीज नहीं, सरकार बदलनी है’, सपा से गठबंधन पर इमरान मसूद का बड़ा बयान

Imran Masood on SP-Congress Alliance:उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच गठबंधन और सीटों के बंटवारे को लेकर कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने बड़ी बात कही है. उन्उहोने कहा कि उनके लिए सीटों की संख्या से ज्यादा महत्वपूर्ण उत्तर प्रदेश में सरकार बदलना है. उन्होंने सीट बंटवारे पर जल्द फैसला होने की उम्मीद जताते हुए कहा कि बातचीत अब अंतिम चरण में पहुंचती दिख रही है.

अक्टूबर में सीट बंटवारा फाइनल होने की उम्मीद

इमरान मसूद ने कहा कि सीटों के बंटवारे को लेकर पार्टी के भीतर बातचीत चल रही है और उन्हें उम्मीद है कि अक्टूबर के भीतर फैसला हो जाएगा. उन्होंने गठबंधन टूटने की अटकलों को खारिज करते हुए कहा कि इंडिया गठबंधन कायम है और आगे भी रहेगा.

उनके इस बयान को सपा-कांग्रेस के बीच चल रही बातचीत के लिहाज से अहम माना जा रहा है. इससे पहले भी मसूद सीट बंटवारे को जल्द अंतिम रूप देने की मांग कर चुके हैं. 7 अक्टूबर को उन्होंने कहा था कि कांग्रेस सपा को गठबंधन में आगे रखना चाहती है, लेकिन पार्टी के सम्मान और हिस्सेदारी का भी ध्यान रखा जाना चाहिए.

कांग्रेस की 150 सीटों की मांग पर क्या बोले इमरान मसूद?

उत्तर प्रदेश विधानसभा में कांग्रेस के केवल दो विधायक होने और लोकसभा चुनाव में छह सीटें जीतने का हवाला देते हुए जब उनसे कांग्रेस की 150 सीटों की मांग पर सवाल किया गया, तो उन्होंने राजनीति में बदलाव के उदाहरण दिए.

मसूद ने कहा कि भाजपा ने दो सीटों से शुरुआत कर देशभर में अपना विस्तार किया, जबकि अरविंद केजरीवाल की पार्टी ने भी शून्य से 67 सीटों तक का सफर तय किया था. उनका तर्क था कि राजनीति में परिस्थितियां बदलती रहती हैं और चुनावी नतीजों का अनुमान पहले से लगाना आसान नहीं होता.

कांग्रेस नेताओं का कहना है कि पार्टी ने उत्तर प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों पर तैयारी की है. मसूद ने ये भी कहा कि गठबंधन में रहने पर सभी सीटों पर तैयारी करना जरूरी है. हालांकि, सभी सीटों पर तैयारी करने का मतलब यह नहीं है कि कांग्रेस गठबंधन में सभी सीटों पर चुनाव लड़ेगी.

सपा-कांग्रेस गठबंधन में सीटों को लेकर क्यों है खींचतान?

उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सपा और कांग्रेस के बीच सीट बंटवारे का मुद्दा चर्चा में है. कांग्रेस कम से कम 150 सीटों पर चुनाव लड़ने की मांग कर चुकी है, जबकि सपा ने 350 सीटों पर अपनी तैयारी का संकेत दिया है. इससे दोनों दलों के बीच संभावित समझौते को लेकर सवाल उठे हैं.

कांग्रेस के लिए यह चुनाव राज्य में अपना संगठन मजबूत करने और राजनीतिक जमीन बढ़ाने का अवसर है. वहीं, सपा की कोशिश विपक्षी वोटों को एकजुट रखकर भाजपा को चुनौती देने की है. ऐसे में दोनों दलों के लिए सीटों की संख्या के साथ-साथ उन क्षेत्रों का चयन भी अहम होगा, जहां गठबंधन के उम्मीदवार की जीत की संभावना ज्यादा हो.

इमरान मसूद के ताजा बयान से गठबंधन को लेकर सकारात्मक संकेत जरूर मिलता है, लेकिन सीट बंटवारे का अंतिम फैसला अभी दोनों दलों के नेतृत्व को करना है.

Latest news

Related news