पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव खत्म होने के ठीक एक दिन बाद, दिल्ली की एक अदालत ने गुरुवार को I-PAC के डायरेक्टर विनेश चंदेल को मनी लॉन्ड्रिंग केस में ज़मानत दे दी.
दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने चंदेल को राहत दी, क्योंकि एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट ने उनकी बेल का विरोध नहीं किया है और इसलिए बेल देने में प्रिवेंशन ऑफ़ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के सेक्शन 45 के तहत दो शर्तें लागू नहीं होतीं.
पहले कोर्ट ने अंतरिम बेल देने से किया था इनकार
यह बेल चंदेल को मंगलवार, 28 अप्रैल को अंतरिम बेल देने से मना किए जाने के ठीक दो दिन बाद आई है, जब कोर्ट ने फैसला सुनाया था कि उनकी याचिका ऐसी राहत देने के लिए ज़रूरी “असाधारण मानवीय आधार” की सीमा को पूरा नहीं करती है.
चंदेल ने इस आधार पर अंतरिम राहत मांगी थी कि उनकी 74 साल की मां की सेहत बिगड़ रही है. खबर है कि उन्हें डिमेंशिया है.
पटियाला हाउस कोर्ट की एडिशनल सेशंस जज शेफाली बरनाला टंडन ने कहा था कि कोर्ट को बुज़ुर्ग माता-पिता की मेडिकल कमज़ोरी का ध्यान था, लेकिन रिकॉर्ड में ऐसी कोई अचानक या जानलेवा स्थिति नहीं दिखी जिसके लिए आरोपी को तुरंत हाज़िर होना पड़े.
कोर्ट ने यह भी कहा कि ऐसे सबूतों की कमी है जो दिखाते हैं कि माँ की मेडिकल ज़रूरतें पूरी नहीं हो सकतीं.
कोर्ट ने यह भी कहा कि ऐसा कोई सबूत नहीं है जिससे पता चले कि माँ की मेडिकल ज़रूरतें हॉस्पिटल में भर्ती होने, प्रोफेशनल देखभाल या परिवार के दूसरे सदस्यों के सपोर्ट से पूरी नहीं हो सकतीं.
अप्रैल में गिरफ्तार किए गए थे चंदेल
चंदेल को पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले अप्रैल में एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट ने गिरफ्तार किया था. यह मामला पश्चिम बंगाल में कोयले की कथित गैर-कानूनी माइनिंग और ट्रांसपोर्टेशन से जुड़े एक मामले से जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग जांच का था. चंदेल पॉलिटिकल कंसल्टेंसी फर्म I-PAC के डायरेक्टर हैं और कंपनी में उनकी 33% हिस्सेदारी है.
जांच एजेंसी ने आरोप लगाया कि I-PAC को पश्चिम बंगाल कोयला माइनिंग रैकेट में हुए क्राइम से हवाला चैनलों के ज़रिए करीब ₹20 करोड़ मिले.
क्या है West Bangal I-PAC Case
यह पूरा विवाद जनवरी में प्रतीक जैन के आवास पर हुई छापेमारी से शुरू हुआ था. केंद्रीय एजेंसी ने आरोप लगाया है कि जब वे मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में सबूत जुटा रहे थे, तब मुख्यमंत्री ने मौके पर पहुंचकर न केवल हस्तक्षेप किया बल्कि कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज भी अपने साथ ले गईं. इसी आधार पर ईडी ने अब इस पूरे प्रकरण की जांच सीबीआई (CBI) से कराने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है.
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान भारतीय संविधान के शिल्पकारों का भी स्मरण किया. पीठ ने कहा कि एचएम सीरवई और डॉ. बीआर आंबेडकर जैसे महान संवैधानिक विशेषज्ञों ने शायद कभी ऐसी स्थिति की कल्पना भी नहीं की होगी, जहां एक मौजूदा मुख्यमंत्री किसी एजेंसी की चालू जांच में व्यक्तिगत रूप से दखल दे. कोर्ट ने इसे संस्थागत सीमाओं का उल्लंघन माना है.
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