India China Border Dispute पुणे: भारत और चीन के बीच लंबे समय से जारी सीमा विवाद पर पूर्व भारतीय सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे का एक महत्वपूर्ण बयान सामने आया है। पुणे में आईटी और बैंकिंग क्षेत्र के पेशेवरों को संबोधित करते हुए उन्होंने साफ कहा कि चीन के साथ सीमा विवाद को सुलझाने के लिए सैन्य कदम कोई स्थायी समाधान नहीं है। विवादों को बातचीत और कूटनीति के जरिए सुलझाना ही भारत की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए.
#WATCH | Pune, Maharashtra | Former Indian Army Chief General Manoj Mukund Naravane says, “There is no doubt that we have hostile neighbours to both our west and our north. However, that does not mean we have to remain in a state of war or conflict all the time. As our leaders have consistently stated, including our External Affairs Minister, we must try to resolve our disputes through dialogue. That should be our first objective…The use of force should be the last resort, not the first. That does not mean we should shy away from using force when necessary. When it is required, it must be used. We demonstrated this during Operation Sindoor, when we made it clear that enough was enough. We would no longer tolerate such actions and would strike where it hurts…We stopped precisely because we had achieved the objective we wanted to accomplish. Unlike what is happening in other parts of the world, where conflicts seem to have no clear end, we could have continued as well, but then the reins of when to stop would not have been in our hands…”
(22.10)
— ANI (@ANI) October 22, 2026
गलवान के बाद भारत ने दिया कड़ा संदेश
पूर्व सेना प्रमुख ने वर्ष 2020 की गलवान घाटी की हिंसक झड़प का जिक्र करते हुए कहा कि इस घटना के बाद वैश्विक मंच पर भारत की स्थिति और अधिक मजबूत हुई है। भारत ने सैन्य, कूटनीतिक और राजनीतिक तीनों मोर्चों पर खुद को सशक्त किया है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत ने चीन को यह संदेश दे दिया है कि ताकत के बल पर एकतरफा तरीके से सीमाओं की स्थिति बदलने का प्रयास किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं होगा। गलवान के बाद आए इस बदलाव ने दोनों देशों के बीच बातचीत की प्रक्रिया को नई गति दी है, जिससे विशेष प्रतिनिधियों (Special Representatives) की वार्ता का महत्व और बढ़ गया है।
‘बाउंड्री’ तय नहीं, इसलिए होते हैं टकराव
जनरल नरवणे ने कहा कि भारत के उत्तर और पश्चिम दोनों दिशाओं में चुनौतीपूर्ण पड़ोसी मौजूद हैं, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि देश लगातार युद्ध के माहौल में रहे।
चीन सीमा का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि वह जानबूझकर अंतरराष्ट्रीय सीमा (Border) की जगह ‘बाउंड्री’ शब्द का प्रयोग कर रहे हैं, क्योंकि दोनों देशों के बीच सीमा अभी पूरी तरह स्पष्ट और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित नहीं है। जब तक मतभेद वाले क्षेत्र बने रहेंगे, तब तक छिटपुट टकराव की आशंका बनी रहेगी।
बल प्रयोग पहला नहीं, आखिरी रास्ता होना चाहिए
पूर्व आर्मी प्रमुख ने कहा कि ताकत का इस्तेमाल करना समाधान का पहला विकल्प नहीं बल्कि अंतिम रास्ता होना चाहिए। हालांकि, इसका मतलब यह कतई नहीं है कि जरूरत पड़ने पर भारत कार्रवाई करने से पीछे हटेगा।
‘ऑपरेशन सिंदूर’ का उदाहरण देते हुए नरवणे ने बताया कि भारत ने उस दौरान साफ कर दिया था कि अब पानी सिर से ऊपर जा चुका है। भारत ने दुश्मन के उस ठिकाने पर प्रहार किया जहाँ सबसे ज्यादा असर हो सकता था। उन्होंने यह भी बताया कि इस ऑपरेशन को समय रहते इसलिए रोक दिया गया क्योंकि भारत ने अपना तय लक्ष्य हासिल कर लिया था। यदि इसे बिना वजह आगे बढ़ाया जाता तो स्थिति पर नियंत्रण रखना कठिन हो सकता था।

