Mahadev Betting App Case : महादेव ऑनलाइन बेटिंग ऐप से जुड़े कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए कारोबारी विकास गर्ग और उनसे जुड़ी संस्थाओं की करीब ₹940 करोड़ 77 लाख की संपत्तियों की कुर्की को स्थायी बनाने की दिशा में अहम कदम उठाया है. ईडी ने इस संबंध में धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) की एडजुडिकेटिंग अथॉरिटी के समक्ष शिकायत दाखिल की है. एजेंसी का कहना है कि ये सभी संपत्तियां कथित अपराध से अर्जित धन (Proceeds of Crime) से खरीदी गई थीं.
Mahadev Betting App Case:किन संपत्तियों पर ED की नजर?
ईडी के मुताबिक, कुर्क की गई संपत्तियों में एराया लाइफस्पेसेज के बड़ी संख्या में शेयर, दिल्ली, गोवा, उत्तराखंड और राजस्थान में स्थित कई लग्जरी अचल संपत्तियां शामिल हैं. जांच एजेंसी का आरोप है कि महादेव ऑनलाइन बेटिंग नेटवर्क से जुड़े अवैध धन को विभिन्न कंपनियों और निवेश माध्यमों के जरिए लगाया गया तथा शेयर बाजार में निवेश और कथित हेरफेर के लिए भी उसका इस्तेमाल किया गया.
एजेंसी का दावा है कि जांच के दौरान मिले वित्तीय दस्तावेजों और लेनदेन के आधार पर इन संपत्तियों का संबंध सीधे मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा पाया गया है.
PMLA के तहत क्या होगी आगे की प्रक्रिया?
ईडी द्वारा दाखिल शिकायत पर अब पीएमएलए की एडजुडिकेटिंग अथॉरिटी सुनवाई करेगी. यदि अथॉरिटी ईडी के दावों से सहमत होती है, तो अस्थायी रूप से कुर्क की गई संपत्तियों की कुर्की को स्थायी रूप से बरकरार रखा जा सकता है. यह कार्रवाई मामले में वित्तीय अपराधों की जांच का महत्वपूर्ण चरण माना जा रहा है.
CBI की चार्जशीट से जांच को मिली रफ्तार
इधर, इस हाई-प्रोफाइल मामले में केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई लगातार तेज हो रही है. 10 जुलाई को केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने महादेव बेटिंग ऐप केस में छह आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है. चार्जशीट दाखिल होने के बाद जांच नए चरण में पहुंच गई है और आने वाले दिनों में अन्य आरोपियों तथा वित्तीय लेनदेन की भी गहन जांच होने की संभावना जताई जा रही है.
छत्तीसगढ़ से जुड़े होने के कारण बना चर्चा का केंद्र
महादेव बेटिंग ऐप मामला छत्तीसगढ़ से जुड़े कथित वित्तीय और प्रशासनिक संबंधों के कारण लंबे समय से राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में है. ईडी, सीबीआई और अन्य केंद्रीय एजेंसियां इस नेटवर्क के जरिए हुए कथित अवैध लेनदेन, हवाला चैनलों, निवेश और मनी लॉन्ड्रिंग की अलग-अलग पहलुओं से जांच कर रही हैं. ताजा कार्रवाई से साफ है कि जांच एजेंसियां अब कथित अवैध संपत्तियों को कानूनी रूप से जब्त करने की प्रक्रिया को भी तेजी से आगे बढ़ा रही हैं.

