कांग्रेस Congress ने शुक्रवार को भारतीय जनता पार्टी की सरकार पर आरोप लगाया कि वह सरकार के खिलाफ बोलने वाली मुस्लिम और दलित महिलाओं को निशाना बना रही है. उन्होंने स्टूडेंट प्रोटेस्टर निशु आज़ाद, मुस्लिम पत्रकार शाहीन खान और नफीसा खान, और दिल्ली यूनिवर्सिटी की स्टूडेंट आकृति चौधरी के मामलों का हवाला दिया.
पुलिस प्रशासन से जुड़े महिला उत्पीड़न के मामलों पर Congress की प्रेस कॉन्फ्रेंस
कांग्रेस लीडर अलका लांबा ने कहा, “BJP और [उसकी सोच की जड़] RSS [राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ] महिला विरोधी हैं. वे दलित और मुस्लिम महिलाओं के विरोधी हैं…और वे खुद सामने नहीं आते. उन्होंने अपने गुर्गे और गुंडे पाल रखे हैं. उनके पाले-पोसे गुर्गे और गुंडे ऐसे काम कर रहे हैं ताकि ये लोग सीधे तौर पर शामिल न हों.”
उन्होंने आरोप लगाया कि BJP और उसके समर्थक महिला प्रदर्शनकारियों और पत्रकारों को चुप कराने के लिए पुलिस कार्रवाई, क्रिमिनल केस और डराने-धमकाने का इस्तेमाल कर रहे हैं. लांबा ने इन्फ्लुएंसर स्वतंत्र भारद्वाज की गिरफ्तारी की मांग की, जब एक वीडियो सामने आया जिसमें वह दिल्ली के जंतर-मंतर पर एग्जाम में गड़बड़ी के खिलाफ स्टूडेंट प्रोटेस्ट के दौरान आजाद के पिता संजय कुमार पर हमला करने की शेखी बघारते दिखे.
भारद्वाज ने एक पॉडकास्ट में दावा किया कि दिल्ली के BJP मंत्री कपिल मिश्रा के एक फोन कॉल ने उन्हें जेल जाने से बचा लिया.
निशु आज़ाद मामले में कांग्रेस ने की स्वतंत्र भारद्वाज की गिरफ्तारी की मांग
लांबा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में भारद्वाज का वीडियो दिखाया जिसमें उन्हें कथित तौर पर यह कहते हुए सुना जा सकता है, “हम जेल भी नहीं गए. पूरी दुनिया को पता होना चाहिए कि हम जेल भी नहीं गए. हम पूरी रात घूमते रहे…हमारे बड़े भाई कपिल मिश्रा का थोड़ा सा सपोर्ट है. वे कहते हैं कि कपिल मिश्रा का फोन आया और हम रिहा हो गए.”
लांबा ने कहा कि कुमार के सिर में गंभीर चोट लगी थी, फिर भी भारद्वाज के खिलाफ कोई केस दर्ज नहीं किया गया. उन्होंने आरोप लगाया कि भारद्वाज के आज़ाद और उनके परिवार के खिलाफ जाति-सूचक भाषा का इस्तेमाल करने के बावजूद, शेड्यूल्ड कास्ट्स एंड शेड्यूल्ड ट्राइब्स (प्रिवेंशन ऑफ एट्रोसिटीज) एक्ट या SCT/ST एक्ट के तहत कोई कार्रवाई नहीं की गई.
उन्होंने कहा, “दलित समुदाय की एक बेटी, जिसे यह व्यक्ति [भारद्वाज] जाति-सूचक शब्द का इस्तेमाल करके ‘नीला कबूतर’ कहकर बेइज्जत कर रहा है. संविधान के तहत, ऐसे जातिवादी शब्दों के इस्तेमाल के लिए SC/ST एक्ट के तहत तुरंत FIR [फर्स्ट इन्फॉर्मेशन रिपोर्ट] और गिरफ्तारी का हक है, जो पुलिस नहीं कर रही है.”
पत्रकार शाहीन खान और नफीसा खान मामले में पुलिस को सस्पेंड किया जाए
लांबा ने 4PM न्यूज़ नेटवर्क की पत्रकार शाहीन खान और नफीसा खान के बारे में बात की, जिन्हें कथित तौर पर 3 सितंबर को साकेत के एक प्राइवेट अस्पताल में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के एक इवेंट को कवर करते समय हिरासत में लिया गया और उन पर हमला किया गया.
उन्होंने कहा कि पत्रकार शाह और गुप्ता से AIIMS में इलाज करा रही एक 15 साल की लड़की की मौत और एक प्राइवेट बस में एक नाबालिग के रेप के बारे में सवाल करने के लिए इवेंट में गए थे. लांबा ने कहा कि इसके बजाय दो महिलाओं को कथित तौर पर गिरफ्तार कर लिया गया और उनके साथ मारपीट की गई, और जब पुलिस को पता चला कि वे मुस्लिम हैं तो उनके साथ बर्ताव और भी खराब हो गया.
लांबा ने पूछा ,“वे कह रहे हैं कि उन्हें उनके धर्म के आधार पर टारगेट किया जा रहा है. चाहे वह निशु आज़ाद हों या शाहीन और नफीसा. वे जवाब चाहते थे, लेकिन जवाब के बजाय, उन्हें वहां से भगा दिया गया और पुलिस कस्टडी में ले लिया गया. उन्हें साकेत पुलिस स्टेशन लाया गया. इतना तो ठीक था, लेकिन उनके शरीर पर निशान हैं, गंभीर चोटों के निशान हैं. वे चोटें कब, किसने और क्यों लगाईं?” “ऊपर से ऑर्डर आ रहा है कि चाहे वे दलित हों या मुस्लिम कम्युनिटी से, BJP सरकार और उसके गुंडे और पुलिस भी संविधान का उल्लंघन करके उन्हें टारगेट कर रहे हैं.”
लांबा ने मांग की कि हॉस्पिटल के CCTV फुटेज की जांच की जाए, अगर मारपीट के आरोप सही साबित होते हैं तो FIR दर्ज की जाए और जिम्मेदार लोगों को सस्पेंड किया जाए.
आकृति चौधरी मामले में भी कांग्रेस ने सरकार को घेरा
लांबा ने कहा कि 25 साल की दिल्ली यूनिवर्सिटी की स्टूडेंट चौधरी को नोएडा में मजदूरों के लिए आवाज उठाने पर नेशनल सिक्योरिटी एक्ट (NSA) के तहत हिरासत में लिया गया था. “नोएडा में मजदूरों का जो प्रोटेस्ट हो रहा था, आकृति चौधरी ने उसका सपोर्ट किया था.”
लांबा ने कहा कि चौधरी ने नोएडा की डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट मेधा रूपम के उस प्रोटेस्ट को दबाने की कोशिश के खिलाफ आवाज उठाई थी. उन्होंने रूपम पर चौधरी के खिलाफ उनका भविष्य बर्बाद करने के लिए झूठा केस बनाने का आरोप लगाया. लांबा ने कहा कि चौधरी को करीब पांच महीने तक जेल में रखा गया. “चौधरी को फंसाने के लिए, उन्होंने एक झूठा केस बनाया और सीधे उस झूठे केस में नेशनल सिक्योरिटी एक्ट लगाकर उन्हें जेल भेज दिया…NSA उनका करियर, उनका भविष्य बर्बाद करने के लिए लगाया गया.”
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 2 सितंबर को चौधरी की NSA हिरासत को मनमाना और गैर-कानूनी बताते हुए रद्द कर दिया. कोर्ट ने अधिकारियों को उन्हें ₹5 लाख मुआवजा देने का निर्देश दिया.
कांग्रेस सभी राजनीतिक धमकियों का सामना कर रही महिलाओं के साथ
लांबा ने कहा कि उन्हें मिसाल बनाकर, हिम्मत दिखाने वाली दूसरी महिलाओं को डराया जा रहा है. “तो कहीं न कहीं माता-पिता भी डर जाते हैं और अपने बच्चों को रोकते हैं, कहते हैं ‘अपनी आवाज़ मत उठाओ, कहीं किसी प्रोटेस्ट में मत जाओ’.” लांबा ने कहा कि कांग्रेस उन सभी महिलाओं का साथ देगी जो राजनीतिक धमकी का सामना कर रही हैं.
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