गुरुवार, 7 मई को ऑपरेशन सिंदूर Operation Sindoor के एक साल पूरे होने पर, पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में आतंकवाद के खिलाफ मिलिट्री स्ट्राइक को लीड करने वाली डिफेंस फोर्स टीम ने कहा कि यह ऑपरेशन खत्म नहीं हुआ है, बल्कि यह “बस शुरुआत” थी. उस समय के मिलिट्री ऑपरेशन्स के डायरेक्टर जनरल, लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई ने कहा कि ‘सिर्फ हंगामा खड़ा करना मकसद नहीं, बल्कि “बदलाव” लाना था.
ऑपरेशन सिंदूर 7 मई, 2025 को भारतीय सेना ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकी हमले के जवाब में शुरू किया था, जिसमें 26 लोग मारे गए थे.
भारतीय सेना ने पाकिस्तान और PoK में लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे संगठनों के आतंकी ढांचे को निशाना बनाया था.
‘हंगामा करना मकसद नहीं’- राजीव घई
तत्कालीन DGMO लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई ने गुरुवार को राजस्थान में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि आतंकवाद के खिलाफ भारत की लड़ाई जारी रहेगी.
घई ने कहा, “सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं. मेरी कोशिश है कि यह सूरत बदलनी चाहिए. ऑपरेशन सिंदूर कोई अंत नहीं था. यह तो बस शुरुआत थी. आतंक के खिलाफ भारत की लड़ाई जारी रहेगी.”
उन्होंने आगे कहा कि हमले के एक साल बाद, भारत न सिर्फ ऑपरेशन सिंदूर, बल्कि इसके पीछे के सिद्धांत को भी याद करता है.
तीनों सेना प्रमुखों ने किया था Operation Sindoor को लीड
पूर्व DGMO ने कहा, “भारत अपनी संप्रभुता, अपनी सुरक्षा और अपने लोगों की रक्षा पक्के तौर पर, प्रोफेशनली और पूरी ज़िम्मेदारी के साथ करेगा.”
लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई, एयर मार्शल एके भारती और वाइस एडमिरल एएन प्रमोद ने भारतीय आर्म्ड डिफेंस के चीफ होने के नाते ऑपरेशन सिंदूर को सबसे आगे रहकर लीड किया था.
Operation Sindoor एक ‘पक्के इरादे का बयान’
घई ने कहा कि यह मिलिट्री ऑपरेशन शायद भारत की स्ट्रेटेजिक यात्रा में एक अहम पल था. उन्होंने आगे कहा, “ऑपरेशन सिंदूर में भारत ने बहुत सोच-समझकर और सही तरीके से अपने पुराने तरीकों और तरीकों से आगे बढ़कर लाइन ऑफ़ कंट्रोल और पाकिस्तान के साथ हमारी इंटरनेशनल बाउंड्री के पार आतंक को टारगेट किया.”
उन्होंने ऑपरेशन को “एक देश द्वारा पक्के इरादे, ज़िम्मेदारी और स्ट्रेटेजिक रोक का बयान” बताया.
घई ने बताया की सरकार की ओर से कैसे निर्देश थे
घई ने फिर से कहा कि केंद्र ने आर्म्ड फोर्सेज़ को दो साफ़ निर्देश दिए थे — तय पॉलिटिकल-मिलिट्री मकसद और ऑपरेशनल फैसले लेने की फ्लेक्सिबिलिटी.
पूर्व DGMO ने कहा कि टॉप पर सख्त डायरेक्शन, और ऑपरेशनल लेवल पर प्रोफेशनल ऑटोनॉमी और फ्लेक्सिबिलिटी भारतीय आर्म्ड फोर्सेज़ की सफलता के लिए ज़रूरी थे.
घई ने आगे कहा, “ऑपरेशन सिंदूर ने भारत के बदलते पूरे सरकारी नज़रिए को दिखाया, जो लड़ाई के मैदान में घड़ी की सुई की तरह चलता था.”
लेफ्टिनेंट जनरल ने आगे बताया कि तीनों सेनाओं द्वारा किए गए नौ स्टैंडऑफ़ प्रिसिजन स्ट्राइक में से सात भारतीय सेना ने और दो भारतीय एयर फ़ोर्स ने किए. उन्होंने कहा कि स्ट्राइक “पूरी तरह से सही समय पर की गईं, पूरी तरह से सरप्राइज़ दीं और PoK और पाकिस्तान के अंदरूनी हिस्से में हर बने हुए हब में ज़्यादा से ज़्यादा नुकसान पहुंचाया,” “यह इशारा करते हुए कि कोई भी जगह सुरक्षित नहीं है.”
‘देश के हर हिस्से ने ज़िम्मेदारी निभाई’
पूर्व DGMO ने आगे कहा कि ऑपरेशन सिंदूर इस बात का सबूत है कि आत्मनिर्भर सिर्फ़ एक नारा नहीं है, “यह सच में एक फ़ोर्स मल्टीप्लायर है”.
मिडिल ईस्ट और रूस और यूक्रेन के बीच संघर्षों का ज़िक्र करते हुए, लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई ने कहा, “दुनिया भर में लंबे समय तक चले संघर्षों के दौर में, हमने ज़ोरदार हमला किया, साफ़ तौर पर तय लक्ष्य हासिल किए और फिर जब पाकिस्तान बातचीत करने के लिए मजबूर हुआ और हमसे रुकने की रिक्वेस्ट की, तो हमने दुश्मनी खत्म करने का फ़ैसला किया.”
उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सिर्फ़ भारतीय सेना ही नहीं, बल्कि देश के हर हिस्से ने ज़िम्मेदारी निभाई.
घई ने डिटेल में बताया, “इंटेलिजेंस एजेंसियों ने एकदम सही जानकारी दी, जो सटीक टारगेटिंग के लिए बहुत ज़रूरी है. साइबर और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर यूनिट्स ने जानकारी पर अपना दबदबा बनाए रखा. सरकार ने इंटरनेशनल माहौल के साथ-साथ अंदरूनी सुरक्षा और लोगों को भरोसा दिलाया. सेना ने अनुशासन, सटीकता और कम से कम असर के साथ काइनेटिक फेज़ को पूरा किया. यह मल्टी-एजेंसी, मल्टी-डोमेन कोऑर्डिनेशन भविष्य के ऑपरेशन्स के लिए एक मिसाल बना रहेगा.”
तीनों चीफ ‘लगभग हर दिन मिलते थे’
एयर मार्शल अवधेश कुमार भारती ने कहा कि हालांकि हम 22 अप्रैल, 2025 को जान गंवाने वालों को वापस नहीं ला सकते, लेकिन भारत यह पक्का कर सकता है कि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों.
एके भारती ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर उसी इरादे की तरफ एक कोशिश है. उन्होंने यह भी कहा कि, बहुत पुराने समय से, भारत जियो और जीने दो की सीधी-सादी सोच के साथ जीता आया है.
उन्होंने आगे कहा, “लेकिन जब शांति की हमारी इच्छा को कमज़ोरी समझ लिया जाता है, और हमारी चुप्पी को गैर-मौजूदगी समझा जाता है, तो कार्रवाई करने के अलावा कोई चारा नहीं बचता. और जब हम कार्रवाई करते हैं, तो कोई आधा-अधूरा उपाय नहीं होता. यह निर्णायक होता है, यह जानलेवा होता है, और यह ऑपरेशन सिंदूर में बदल जाता है.”
उन्होंने कहा कि जब 7 मई, 2025 की सुबह पहला हमला हुआ, तो निर्णायक चमक भारत के लोगों की ताकत और इरादे की थी, जो दुश्मन के गढ़ में दिखाई दे रही थी.
एके भारती ने याद किया कि वह, उस समय के DGMO और वाइस एडमिरल एएन प्रमोद, हर दिन मिलते थे, और एक से ज़्यादा मौकों पर, “हमारा मकसद सिर्फ़ हमला करना नहीं था”.
उन्होंने आगे कहा, “इसे जानलेवा होना था. इसे सटीक होना था, ताकि कोई नुकसान न हो. इसलिए, टारगेट चुनना, टाइमिंग, इस्तेमाल किए जाने वाले हथियार, हर चीज़ पर ध्यान से सोचना था.”
भारत ने पाक के न्यूक्लियर धोखे का पर्दाफ़ाश किया-वाइस एडमिरल एएन प्रमोद
वाइस एडमिरल एएन प्रमोद ने कहा कि इंडियन नेवी ने पाकिस्तानी नेवी और एयर यूनिट्स को डिफेंसिव पोजीशन में आने के लिए मजबूर किया, जो ज़्यादातर बंदरगाहों तक ही सीमित थी या उनके कोस्टलाइन के पास काम कर रही थी.
प्रमोद ने आगे कहा कि पाकिस्तान के बीचों-बीच लंबी दूरी के सटीक हथियारों से आतंकी ठिकानों पर हमला करके, “भारत ने पाकिस्तान के न्यूक्लियर ब्लैकमेल का पर्दाफ़ाश कर दिया.”
इंडियन नेवी के स्वदेशी क्षमता में इन्वेस्टमेंट को सही ठहराते हुए, प्रमोद ने कहा, “एयरक्राफ्ट कैरियर विक्रांत, कोलकाता और विशाखापत्तनम क्लास डिस्ट्रॉयर जैसे स्वदेशी जहाजों के परफॉर्मेंस ने इंडियन नेवी के स्वदेशी क्षमता, ब्लू वॉटर रेडीनेस और इंटीग्रेटेड वॉर फाइटिंग में इन्वेस्टमेंट को सही साबित किया, इस तरह ऑपरेशनल सफलता के लिए आत्मनिर्भरता को एक ज़रूरी चीज़ के तौर पर फिर से साबित किया.”
उन्होंने कहा कि अगर ऑपरेशन सिंदूर सोचे-समझे इरादे का सबूत है, तो भारत का अगला जवाब “लगातार जीत हासिल करने के बारे में होगा.”
उन्होंने आगे कहा, “अगर दोबारा चुनौती दी गई, तो हम सिर्फ़ जवाब नहीं देंगे, बल्कि शुरू से ही लड़ाई की जगह तय करेंगे.”
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