44 साल का इंतजार खत्म! इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, नोएडा के किसानों को मिलेगा कई गुना अधिक मुआवजा

Allahabad HC Verdict: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 1976 के नोएडा जमीन अधिग्रहण मामले में एक ऐसा फैसला सुनाया है जिसने दशकों से न्याय की उम्मीद लगाए बैठे किसानों के चेहरे खिल उठे हैं. कोर्ट ने 44 साल पुराने  इस मामले का निपटारा करते हुए किसानों को मिलने वाले मुआवजे में भारी बढ़ोतरी करने का आदेश दिया है. अब प्रभावित किसानों को उनकी जमीन के लिए मात्र 6 रुपये प्रति वर्ग गज के बजाय 28.12 रुपये प्रति वर्ग गज की दर से भुगतान किया जाएगा.

Allahabad HC Verdict : नोयडा के किसानों को मिलेगा मुआवजा 

यह पूरा मामला नोएडा के मोरना, परगना और तहसील दादरी की जमीनों से जुड़ा है, जो अधिग्रहण के समय गाजियाबाद जनपद का हिस्सा हुआ करती थीं. इस मामले में फैासला इलाहबाद हाई कोर्ट के जस्टिस संदीप जैन की सिंगल बेंच ने सुनाया.  कोर्ट ने अपने आदेश में वर्ष 2022 के सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले का भी हवाला दिया जो अजय पाल सिंह बनाम उत्तर प्रदेश सरकार मामले में दिया गया था.

 जमीन के मालिक सोलेशियम के हकदार 

कानूनी बारीकियों को स्पष्ट करते हुए अदालत ने बताया कि चूंकि कलेक्टर और रेफरेंस कोर्ट का अवार्ड 30 अप्रैल 1982 से पहले जारी हो चुका था, इसलिए किसान अधिग्रहण अधिनियम में बाद में हुए संशोधनों के तहत 30 प्रतिशत की दर से बढ़ा हुआ मुआवजा पाने के पात्र नहीं हैं. हालांकि, अधिनियम की धारा 4 के तहत 1 जून 1976 को अधिग्रहित की गई इस जमीन के लिए किसान 15 प्रतिशत की दर से सोलेशियम (तुष्टीकरण राशि) के हकदार जरूर हैं.

राम करण और अन्य किसानों के पक्ष में आए इस फैसले ने 44 साल लंबी कानूनी लड़ाई को एक मुकाम पर पहुंचा दिया है. जिन खेतों पर आज आधुनिक नोएडा की गगनचुंबी इमारतें खड़ी हैं, उनके असली मालिकों को अब उचित मूल्य मिलने की राह साफ हो गई है. किसानों के बीच इस फैसले को लेकर भारी उत्साह है और वे इसे सत्य की जीत मान रहे हैं. अब उम्मीद जताई जा रही है कि कोर्ट के आदेश के बाद प्रशासन जल्द ही बढ़े हुए मुआवजे के वितरण की प्रक्रिया शुरू कर देगा.

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