Air India Phuket to Delhi Flight नई दिल्ली : फुकेत से दिल्ली आ रही एअर इंडिया की फ्लाइट AI-2379 में 4 अगस्त को हुई गंभीर घटना को लेकर एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) की प्रारंभिक रिपोर्ट सामने आई है. रिपोर्ट में उड़ान के दौरान हुई एक बड़ी तकनीकी गड़बड़ी के साथ-साथ विमान के कमांडर के साइको-एक्टिव पदार्थों की जांच में आए नॉन-निगेटिव परिणाम का भी उल्लेख किया गया है.
हालांकि, AAIB ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट में इन दोनों घटनाओं के बीच किसी तरह का संबंध स्थापित नहीं किया है. जांच अभी जारी है और अंतिम निष्कर्ष विस्तृत जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा.
Air India Phuket to Delhi Flight:36 हजार फीट की ऊंचाई पर फेल हुए विमान के तीनों हाइड्रॉलिक सिस्टम
AAIB की रिपोर्ट के मुताबिक, एयरबस A320-251N विमान ने 4 अगस्त को फुकेत से दिल्ली के लिए उड़ान भरी थी. शुरुआत में उड़ान सामान्य रही. बाद में कोलकाता फ्लाइट इन्फॉर्मेशन रीजन में पहुंचने के बाद एयर ट्रैफिक कंट्रोल ने विमान को 34 हजार फीट से बढ़ाकर 36 हजार फीट की ऊंचाई पर जाने का निर्देश दिया.
करीब 36 हजार फीट की ऊंचाई पर पहुंचने के कुछ समय बाद विमान के हाइड्रॉलिक सिस्टम में लगातार खराबी सामने आई.
रिपोर्ट के अनुसार:
- 04:02:43 UTC पर ग्रीन हाइड्रॉलिक सिस्टम में दबाव खत्म होने की चेतावनी मिली.
- करीब चार सेकंड बाद ब्लू और येलो हाइड्रॉलिक सिस्टम भी प्रभावित हो गए.
- इसके तुरंत बाद विमान का ऑटोपायलट डिस्कनेक्ट हो गया.
- कॉकपिट में कई चेतावनियां सक्रिय हुईं.
- कुछ ही सेकंड के लिए स्टॉल वॉर्निंग भी आई.
- विमान अपनी निर्धारित ऊंचाई से करीब 372 फीट ऊपर गया और फिर करीब 292 फीट नीचे आया.
इस दौरान को-पायलट विमान उड़ा रहे थे, जबकि कमांडर निगरानी की भूमिका में थे. स्थिति बिगड़ने के बाद कमांडर ने विमान का नियंत्रण संभाला.
कुछ सेकंड में दोबारा काम करने लगे हाइड्रॉलिक सिस्टम
घटना के दौरान स्थिति गंभीर जरूर हुई, लेकिन कुछ ही सेकंड में हाइड्रॉलिक सिस्टम दोबारा काम करने लगे. करीब 04:02:52 UTC पर ब्लू हाइड्रॉलिक सिस्टम स्वत: बहाल हुआ. इसके बाद येलो और ग्रीन सिस्टम भी वापस काम करने लगे.
हाइड्रॉलिक सिस्टम बहाल होने के बाद विमान की कंट्रोल सरफेस सामान्य रूप से काम करने लगीं और पायलटों ने विमान को नियंत्रित कर लिया. इसके बाद उड़ान जारी रही और विमान सुरक्षित रूप से दिल्ली पहुंचा.
विमान में सवार थे 145 लोग, 24 हुए घायल
AI-2379 में कुल 145 लोग सवार थे। इनमें 137 यात्री, छह केबिन क्रू और दो पायलट शामिल थे. यात्रियों में तीन शिशु भी थे.
विमान के अचानक ऊपर-नीचे होने के दौरान सीट बेल्ट का साइन बंद था. कुछ यात्री अपनी सीटों से बाहर थे, जबकि कुछ बिना सीट बेल्ट के बैठे थे. विमान के अचानक ऊंचाई बदलने के कारण यात्री और केबिन क्रू उछल गए.
इस घटना में कुल 24 लोग घायल हुए, जिनमें 20 यात्री और चार केबिन क्रू सदस्य थे. इनमें से 20 लोगों को मामूली चोटों के उपचार के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई, जबकि चार गंभीर रूप से घायल लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया.
कमांडर का साइको-एक्टिव टेस्ट नॉन-निगेटिव
दिल्ली में विमान के सुरक्षित उतरने के बाद दोनों पायलटों का ब्रेथ एनालाइजर टेस्ट किया गया. दोनों का यह टेस्ट संतोषजनक रहा.
इसके बाद साइको-एक्टिव पदार्थों की जांच की गई. AAIB की प्रारंभिक रिपोर्ट के मुताबिक, कमांडर का सैंपल नॉन-निगेटिव आया. इसके बाद पुष्टि के लिए ब्लड सैंपल की जांच कराई गई, जिसमें भी कमांडर का परिणाम नॉन-निगेटिव रहा.
वहीं, को-पायलट के सैंपल की जांच दोनों स्तरों पर निगेटिव रही.
यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि AAIB की प्रारंभिक रिपोर्ट यह नहीं कहती कि कमांडर विमान उड़ाते समय किसी नशीले पदार्थ के प्रभाव में थे. रिपोर्ट में केवल साइको-एक्टिव पदार्थों की जांच के नतीजे दर्ज किए गए हैं. प्रारंभिक रिपोर्ट में यह भी नहीं बताया गया है कि किस पदार्थ की पुष्टि हुई.
इसलिए कमांडर की जांच के परिणाम को सीधे विमान में आई तकनीकी खराबी का कारण बताना फिलहाल उचित नहीं होगा.
जांच के घेरे में PTU और MEL छूट भी
AAIB की जांच में विमान के PTU यानी Power Transfer Unit से जुड़ा एक अहम तकनीकी पहलू भी सामने आया है.
फुकेत से उड़ान भरने से पहले विमान में एक MEL छूट लागू थी. यह छूट PTU से संबंधित थी और इसे 28 जुलाई को लगाया गया था, यानी घटना से करीब सात दिन पहले.
MEL यानी Minimum Equipment List के तहत कुछ उपकरणों में खराबी होने पर निर्धारित शर्तों के साथ विमान को संचालन की अनुमति दी जा सकती है.
PTU हाइड्रॉलिक सिस्टम के बीच दबाव संतुलित करने में मदद करने वाला एक महत्वपूर्ण बैकअप मैकेनिज्म है. हालांकि, AAIB ने अभी यह निष्कर्ष नहीं दिया है कि PTU से जुड़ी MEL छूट ही 4 अगस्त की घटना का कारण थी.
लेकिन तीनों हाइड्रॉलिक सिस्टम के एक साथ प्रभावित होने के कारण जांच में इस तकनीकी पहलू को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
A320 में हाइड्रॉलिक सिस्टम क्यों महत्वपूर्ण हैं?
एयरबस A320 में तीन अलग-अलग हाइड्रॉलिक सिस्टम होते हैं—ग्रीन, ब्लू और येलो. ये विमान के कई महत्वपूर्ण हिस्सों को संचालित करने में मदद करते हैं.
इनका इस्तेमाल फ्लाइट कंट्रोल सरफेस, लैंडिंग गियर, ब्रेक और अन्य महत्वपूर्ण प्रणालियों के संचालन में होता है. तीनों सिस्टम को अलग-अलग रखने का उद्देश्य यही है कि किसी एक सिस्टम में खराबी आने पर बाकी सिस्टम विमान को नियंत्रित रखने में सहायता कर सकें.
ऐसे में तीनों हाइड्रॉलिक सिस्टम का लगभग एक साथ प्रभावित होना असामान्य स्थिति मानी जाती है. यही वजह है कि AAIB की तकनीकी जांच में यह घटना एक महत्वपूर्ण सवाल बनी हुई है.
दिल्ली में पोस्ट-फ्लाइट जांच में भी मिली गड़बड़ी
दिल्ली पहुंचने के बाद विमान की मेंटेनेंस टीम ने पोस्ट-फ्लाइट जांच की. इसमें ग्रीन हाइड्रॉलिक सिस्टम के कम दबाव की चेतावनी दर्ज हुई. इसके बाद ब्लू और येलो सिस्टम से संबंधित चेतावनियां भी सामने आईं.
जांच में ऑटोपायलट डिस्कनेक्शन, दोनों एलिवेटर में फॉल्ट और ब्लू-येलो हाइड्रॉलिक टैंक में कम स्तर जैसी जानकारियां भी सामने आईं.
AAIB ने विमान के डेटा और पोस्ट-फ्लाइट निरीक्षण के आधार पर तकनीकी गड़बड़ी से जुड़े कई पहलुओं को जांच के दायरे में रखा है.
केबिन में कई जगह मिला नुकसान
घटना के दौरान विमान के बाहरी हिस्से में कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ, लेकिन केबिन के भीतर कई जगह नुकसान पाया गया.
रिपोर्ट के मुताबिक पांचवीं से 29वीं रो तक कई स्थानों पर छत के पैनल टूटे और मुड़े हुए मिले. कुछ पैसेंजर सर्विस यूनिट पैनल अपनी जगह से खिसक गए थे. कुछ हैंडरेल टूटे हुए मिले.
इसके अलावा दो ओवरहेड बिन के दरवाजे अपने कब्जे से निकल गए थे. विमान के आगे दाईं ओर स्थित इमरजेंसी एग्जिट का हैंडल भी क्षतिग्रस्त मिला. एक लैवेटरी का कमोड अपनी जगह से उखड़ा हुआ पाया गया.
एक क्रू सीट मुड़ी हुई मिली, जबकि दूसरी सीट का हेडरेस्ट भी अलग हो गया था.
क्या टर्बुलेंस की वजह से हुई घटना?
शुरुआत में इस घटना को टर्बुलेंस से जोड़कर देखा गया था हालांकि, AAIB की प्रारंभिक रिपोर्ट के मुताबिक घटना के समय पायलटों या एयर ट्रैफिक कंट्रोल की ओर से किसी खराब मौसम की जानकारी नहीं दी गई थी.
मौसम पूर्वानुमान में हल्की गरज-चमक और बारिश की संभावना जरूर थी, लेकिन प्रारंभिक रिपोर्ट में इसे घटना का कारण नहीं बताया गया है.
AAIB ने शुरू की विस्तृत जांच
घटना की जानकारी एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के ऑपरेशनल कंट्रोल रूम से AAIB को मिली थी. शुरुआती तौर पर इसे टर्बुलेंस से जुड़ी घटना माना गया था, लेकिन विमान की तकनीकी स्थिति और यात्रियों के घायल होने की जानकारी सामने आने के बाद मामले की औपचारिक जांच शुरू की गई.
AAIB ने विमान के कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर और फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर को सुरक्षित कर उनका डेटा डाउनलोड किया है.
विमान फ्रांस में निर्मित होने के कारण अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत फ्रांस की विमान दुर्घटना जांच एजेंसी BEA को भी घटना की जानकारी दी गई. BEA के प्रतिनिधियों और एयरबस के तकनीकी विशेषज्ञों ने भी जांच में हिस्सा लिया.
13 से 15 अगस्त के बीच विमान की तकनीकी जांच की गई. हाइड्रॉलिक सिस्टम के कुछ पुर्जों और तेल के नमूने लिए गए. विमान के ईंधन और तेल के सैंपल भी जांच के लिए सुरक्षित किए गए.
इसके अलावा एयरलाइन से मेंटेनेंस और ऑपरेशन रिकॉर्ड मांगे गए हैं. दिल्ली और कोलकाता ATC से भी संबंधित डेटा लिया गया है. पायलटों, केबिन क्रू, एयरलाइन, एयरपोर्ट ऑपरेटर और मेडिकल टीम से भी पूछताछ की गई है.
अब जांच के सामने दो बड़े सवाल
AI-2379 की घटना में AAIB के सामने फिलहाल दो अहम सवाल हैं। पहला—36 हजार फीट की ऊंचाई पर विमान के तीनों हाइड्रॉलिक सिस्टम लगभग एक साथ क्यों प्रभावित हुए?
दूसरा—कमांडर के साइको-एक्टिव पदार्थों की जांच में आए नॉन-निगेटिव परिणाम का उड़ान के दौरान हुई घटना से कोई संबंध था या नहीं?
इन दोनों सवालों का जवाब अभी स्पष्ट नहीं है. AAIB की रिपोर्ट प्रारंभिक है और जांच जारी है. इसलिए किसी भी पहलू को अंतिम कारण मानना अभी सही नहीं होगा
अंतिम रिपोर्ट में तकनीकी जांच, फ्लाइट डेटा, कॉकपिट रिकॉर्डिंग, मेंटेनेंस रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों के आधार पर घटना के कारणों पर अधिक स्पष्ट निष्कर्ष सामने आने की उम्मीद है.

