Himachal Disaster: कुल्लू में ताश के पत्तों के जैसे भरभरा कर गिरी 8 इमारतें, देखिए वीडियो

गुरुवार सुबह कुल्लू में भवन के नाम से मशहूर आठ बहुमंजिला इमारतें ताश के पत्तों की तरह ढह गईं. हिमाचल प्रदेश में बारिश के कारण हो रहे भूस्खलन ने लोगों को डरा दिया है.
शुरुआती रिपोर्टों के मुताबिक, इस घटना में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है क्योंकि इन इमारतों को पिछले हफ्तें ही असुरक्षित घोषित कर खाली करा लिया गया था. ये “असुरक्षित” इमारतें में बड़े पैमाने पर व्यावसायिक काम के लिए इस्तेमाल हो रही थी.

सुबह करीब सवा नौ बजे हुआ हादसा

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक हादसा सुबह करीब सवा नौ बजे आनी सब डिवीजन बस स्टैंड के पास हुआ. कुल्लू जिला प्रशासन ने जुलाई के दूसरे सप्ताह में भारी बारिश के बाद पिछले महीने इमारतों को असुरक्षित घोषित कर दिया था और रहने वालों को इमारत खाली करने का नोटिस दिया था.

2 और इमारतों के गिरने का है खतरा- एसडीएम नरेश वर्मा

हादसे के बाद आनी उपमंडल के उपमंडल मजिस्ट्रेट (एसडीएम) नरेश वर्मा स्थिति का जायजा लेने के लिए मौके पर पहुंचें. इंडियन एक्सप्रेस अखबार को दी जानकारी में उन्होंने कहा कि हिमाचल सहकारी बैंक एक भवन में काम करता है जबकि दूसरे में अन्य कार्यालयों के अलावा एसबीआई शाखा संचालित होती है.
“सामने की चार और पीछे की चार इमारतें ढह गईं. सामने की इमारतें व्यावसायिक थीं और पीछे की इमारतें आवासीय थीं. व्यावसायिक भवनों के स्थान के किनारे दो और इमारतों को खतरा पैदा हो गया है. पिछले सप्ताह दरारें पूरी तरह से दिखाई दे रही थीं. अभी तक किसी जानमाल के नुकसान की खबर नहीं है.”

जुलाई की बारिश के बाद पड़ गई थी इमारतों में दरारें

अधिकारियों के मुताबिक, जुलाई के मध्य में अचानक आई बाढ़ और भूस्खलन के बाद इमारत में दरारें पड़ गईं और इसके कोनों से मिट्टी का कटाव शुरू हो गया. इंडियन एक्सप्रेस अखबार को कुल्लू जिला प्रशासन के एक अधिकारी ने कहा, “कोई भी यह अनुमान लगा सकता है कि इमारत कभी भी गिर सकती है और इसलिए इसे खाली करा लिया गया है.”

बारिश से बेहाल है हिमाचल प्रदेश

आपको बता दें हिमाचल प्रदेश में 13 से 15 अगस्त तक भारी बारिश हुई, इसके बाद 23 अगस्त को फिर से भारी बारिश हुई. हालांकि, इमारत गिरने के समय बारिश नहीं हो रही थी.
सूत्रों ने बताया कि भवन के पास की अन्य इमारतों के भी ढहने का खतरा मंडरा रहा है. सूत्रों से पता चला है कि इमारत गिरने के बाद पहाड़ी की चोटी पर बने कुछ घरों में रहने वाले लोगों ने अपने घर खाली करना शुरू कर दिया है.

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