नई दिल्ली। केंद्र सरकार आगामी वर्ष जनवरी 2027 से देश में रोजगार आंकड़ों के साथ-साथ घरों और परिवारों में बिना किसी वेतन के किए जाने वाले कार्यों का व्यापक आकलन शुरू करने जा रही है। आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (पीएलएफएस) के नए ढांचे के तहत 15 वर्ष तथा उससे अधिक आयु वर्ग के नागरिकों द्वारा भोजन पकाने, घर की साफ-सफाई करने, बच्चों व बुजुर्गों की देखभाल करने, स्वैच्छिक सेवाओं और अवैतनिक प्रशिक्षण में बिताए जाने वाले समय का विस्तृत ब्योरा जुटाया जाएगा। हालांकि, शासन ने यह स्पष्ट किया है कि इन घरेलू जिम्मेदारियों को आधिकारिक तौर पर रोजगार की श्रेणी में शामिल नहीं किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, इस नई संशोधित प्रश्नावली के माध्यम से देश में तेजी से उभर रहे गिग वर्कर्स और डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए आजीविका कमाने वाले युवाओं की भी अलग से पहचान और गणना की जाएगी।
ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के लिए तैयार होगा नया सैंपल फ्रेम
इस वृहद सर्वेक्षण के अंतर्गत बेरोजगारी की दर के साथ-साथ श्रम शक्ति के अपर्याप्त या आंशिक इस्तेमाल का भी सटीक मूल्यांकन किया जाएगा। प्रक्रिया के तहत प्रत्येक चयनित परिवार का लगातार चार महीनों तक सर्वे किया जाएगा, जिसमें प्रथम माह में विस्तृत और पश्चातवर्ती तीन महीनों में संक्षिप्त प्रश्नावली के आधार पर जानकारी संकलित की जाएगी। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के लिए एक नया सैंपल फ्रेम निर्मित किया जा रहा है, जिसकी सहायता से दस लाख से अधिक आबादी वाले महानगरों और चुनिंदा प्रमुख जिलों के श्रम बाजार की वास्तविक स्थिति का गहराई से अध्ययन संभव हो सकेगा।
घरेलू कार्यों और समय आवंटन का तलाशा जाएगा उत्तर
सर्वेक्षण के इन नवीन प्रश्नों से यह स्पष्ट हो सकेगा कि 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के नागरिक अपने दैनिक जीवन में घरेलू कामों, परिजनों की देखभाल, स्वैच्छिक योगदान तथा स्वयं के उपयोग के लिए वस्तुओं के उत्पादन में कितना समय व्यतीत करते हैं। पूर्व में यह आंकड़े समय उपयोग सर्वेक्षण के माध्यम से प्राप्त किए जाते थे, जिसका आयोजन वार्षिक आधार पर नहीं होता था। इस नए नियमित आकलन से देश के कुल श्रम बल और उसमें महिलाओं व अन्य नागरिकों के वास्तविक आर्थिक व सामाजिक योगदान की एक व्यापक और पारदर्शी तस्वीर प्रस्तुत हो सकेगी।

