नई दिल्ली। धनतेरस के पावन पर्व पर भारतीय परिवारों में सोने एवं चांदी की खरीदारी को पारंपरिक रूप से सुख-समृद्धि और वैभव का प्रतीक माना जाता है। हालांकि, इस वर्ष धनतेरस का सराफा बाजार बीते वर्षों के मुकाबले एक नया वित्तीय दृश्य प्रस्तुत कर रहा है। जहां वर्ष 2021 से 2026 के मध्य घरेलू बाजार में सोने की दरों में लगभग 192 प्रतिशत की अप्रत्याशित बढ़ोतरी दर्ज की गई थी, वहीं जनवरी 2026 में 1,80,000 रुपये प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड उच्चतम स्तर को स्पर्श करने के उपरांत कीमतों में 22 प्रतिशत से अधिक का संशोधन आया है। इसी प्रकार चांदी के भाव भी अपने रिकॉर्ड स्तर से 56 प्रतिशत से अधिक नीचे आए हैं। कीमतों में आई इस नरमी ने उन निवेशकों के लिए नए द्वार खोल दिए हैं जो पूर्व की तेजी में प्रवेश करने से चूक गए थे।
धनतेरस पर कीमती धातुओं के ताजा बाजार भाव
कारोबारी सप्ताह में धनतेरस के दिन बाजार खुलते ही सोने और चांदी के दामों में नरमी की प्रवृत्ति दिखाई दी। प्रातः काल के सत्र में घरेलू बाजार में 24 कैरेट सोने का भाव 1,820 रुपये की गिरावट के साथ 1,42,640 रुपये प्रति 10 ग्राम पर दर्ज किया गया। वहीं दूसरी ओर, एक किलोग्राम चांदी का भाव 2,680 रुपये टूटकर 1,84,860 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गया। आभूषण विक्रेताओं और बाजार जानकारों का मानना है कि त्योहारी सीजन में आई यह तात्कालिक गिरावट आम खरीदारों के साथ-साथ लंबी अवधि के निवेशकों के लिए खरीदारी का एक उत्तम अवसर बनकर उभरी है।
आभूषण, सिक्के या ईटीएफ: निवेश के विभिन्न विकल्प
वित्तीय सलाहकारों के अनुसार व्यक्तिगत उपभोग और विशुद्ध निवेश के उद्देश्यों के बीच स्पष्ट अंतर बनाकर चलना आवश्यक है। गहनों की खरीदारी को मुख्य रूप से निजी सजावट या उपहार के रूप में देखा जाना चाहिए, क्योंकि मेकिंग चार्ज और करों के कारण इन पर वास्तविक रिटर्न प्रभावित होता है। सिक्कों की खरीदारी आभूषणों की तुलना में कम लागत वाली होती है क्योंकि इन पर मेकिंग चार्ज सीमित होता है। वहीं दूसरी ओर, पारदर्शी निवेश के लिए गोल्ड ईटीएफ सबसे उपयुक्त माध्यम बनकर उभरा है, जहाँ निवेशकों को भौतिक भंडारण या शुद्धता की चिंता से मुक्ति मिलती है।
सोने का ऐतिहासिक सफर और सोवरेन गोल्ड बॉन्ड की स्थिति
वर्ष 2012 में 31,643 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर से शुरू होकर सोने ने वर्ष 2026 तक का ऐतिहासिक सफर तय किया है। वर्ष 2020 के वैश्विक घटनाक्रमों के दौरान इसमें भारी तेजी दर्ज की गई और 2025-2026 के दौरान यह धातु अपनी सर्वकालिक ऊंचाई के निकट पहुंच गई। जहां तक सोवरेन गोल्ड बॉन्ड (एसजीबी) का प्रश्न है, जिन्हें पूर्व में निवेश का बेहतरीन माध्यम माना जाता था, फरवरी 2024 के बाद से सरकार द्वारा नई किश्त जारी न किए जाने के कारण नए निवेशकों को द्वितीयक बाजार पर ही निर्भर रहना पड़ रहा है।
भविष्य के लक्ष्य और ब्रोकरेज हाउसेज का आउटलुक
बाजार विशेषज्ञों और ब्रोकरेज संस्थाओं के अनुसार मौजूदा गिरावट के चरण को संचय करने के लिए एक अनुकूल अवसर माना जा सकता है। विश्लेषकों का अनुमान है कि आगामी धनतेरस 2027 तक सोने में 20 से 25 प्रतिशत तक का संभावित रिटर्न देखा जा सकता है, जिसके लिए 1,65,000 से 1,71,000 रुपये प्रति 10 ग्राम तक का लक्ष्य आंका जा रहा है। इसी प्रकार चांदी में भी लंबी अवधि के लिए सकारात्मक रुझान देखा जा रहा है। वैश्विक परिदृश्य में भी वित्तीय विश्लेषकों ने धातुओं के दीर्घकालिक रुझान को मजबूत माना है। अतः अनिश्चितता से बचने के लिए निवेशकों को एकमुश्त पूंजी लगाने के बजाय व्यवस्थित तरीके से किश्तों में निवेश की रणनीति अपनाने की सलाह दी जा रही है।

