बांग्लादेश में मजदूरों का बवाल, 690 फैक्ट्रियों में काम ठप! भारत भी अलर्ट, विदेश मंत्रालय ने दिया बड़ा बयान

Bangladesh Violence नई दिल्ली : पड़ोसी देश बांग्लादेश में कपड़ा उद्योग के मजदूरों का आंदोलन हिंसक होता जा रहा है. वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर सड़कों पर उतरे श्रमिकों और सुरक्षा बलों के बीच कई जगहों पर झड़पें हुई हैं. ढाका से लेकर गाजीपुर और आशुलिया तक प्रदर्शनकारियों ने सड़कें जाम कीं और वाहनों में आगजनी व तोड़फोड़ की घटनाएं सामने आई हैं. हालात को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है. इस घटनाक्रम पर भारत भी नजर बनाए हुए है.

भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मंगलवार को नियमित प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि भारत बांग्लादेश के घटनाक्रमों पर लगातार नजर रख रहा है. भारत की यह प्रतिक्रिया ऐसे समय आई है, जब पड़ोसी देश में कपड़ा उद्योग के मजदूरों का आंदोलन कई औद्योगिक क्षेत्रों में फैल गया है.

ढाका से गाजीपुर तक हिंसा, पुलिस से भिड़े प्रदर्शनकारी

बांग्लादेश में कपड़ा मजदूरों का प्रदर्शन वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर शुरू हुआ था, लेकिन अब यह आंदोलन हिंसक रूप ले चुका है. राजधानी ढाका के मीरपुर, आशुलिया, गाजीपुर और नारायणगंज जैसे औद्योगिक इलाकों में प्रदर्शनकारियों और कानून लागू कराने वाली एजेंसियों के बीच झड़पें हुई हैं.

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों ने कई प्रमुख सड़कों को जाम कर दिया. पुलिस वाहनों और अन्य सार्वजनिक संपत्तियों में तोड़फोड़ की गई. कुछ स्थानों पर पुलिस वाहनों और सुरक्षा चौकियों को आग के हवाले करने की घटनाएं भी सामने आई हैं.

प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े, पानी की बौछारों का इस्तेमाल किया और लाठीचार्ज किया. इन झड़पों में पुलिसकर्मियों और प्रदर्शनकारियों के घायल होने की खबरें हैं.

12,500 से बढ़ाकर 30,000 टका वेतन करने की मांग

बांग्लादेश में कपड़ा मजदूरों का मुख्य विरोध न्यूनतम मासिक वेतन को लेकर है. श्रमिकों की मांग है कि उनका न्यूनतम मासिक वेतन मौजूदा 12,500 टका से बढ़ाकर 30,000 टका किया जाए.

मजदूरों का कहना है कि महंगाई, मकान का किराया, खाद्य पदार्थों और रोजमर्रा की जरूरतों की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण मौजूदा वेतन में परिवार चलाना मुश्किल हो गया है.

दूसरी तरफ, फैक्ट्री मालिकों का कहना है कि उत्पादन लागत बढ़ने और अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धा के कारण वेतन में इतनी बड़ी वृद्धि करना उनके लिए चुनौतीपूर्ण है.

स्थिति को देखते हुए बांग्लादेश सरकार ने एक छह सदस्यीय वेतन बोर्ड का गठन किया है, जिसे कपड़ा श्रमिकों के वेतन की समीक्षा करने की जिम्मेदारी दी गई है. हालांकि, इस फैसले के बावजूद विरोध-प्रदर्शन थमने के संकेत नहीं मिले हैं.

690 फैक्ट्रियों में उत्पादन प्रभावित, 17 लाख से ज्यादा मजदूरों पर असर

बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था के लिए कपड़ा उद्योग बेहद महत्वपूर्ण है.मजदूरों के आंदोलन का सीधा असर इस उद्योग पर पड़ रहा है.

बांग्लादेश के अखबार ‘द बिजनेस स्टैंडर्ड’ की 3 नवंबर की रिपोर्ट के मुताबिक, आंदोलन के चलते कम से कम 690 गारमेंट फैक्ट्रियों में उत्पादन रोकना पड़ा है. इनमें करीब 670 BGMEA की सदस्य फैक्ट्रियां और नारायणगंज की लगभग 20 अन्य फैक्ट्रियां शामिल हैं.

इन फैक्ट्रियों में 17 लाख से अधिक मजदूर काम करते हैं. इससे देश के निर्यात कारोबार और अंतरराष्ट्रीय ऑर्डर की समय पर आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई है.

बांग्लादेश गारमेंट मैन्युफैक्चरर्स एंड एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन (BGMEA) के अनुसार, देश के कपड़ा उद्योग में 40 लाख से अधिक लोग काम करते हैं. यह उद्योग बांग्लादेश की कुल निर्यात आय में 80 फीसदी से अधिक योगदान देता है. चीन के बाद बांग्लादेश दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा परिधान निर्यातक देश है.

सुरक्षा के लिए BGB की 12 टुकड़ियां तैनात

हिंसा को देखते हुए बांग्लादेश प्रशासन ने औद्योगिक क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी है. गाजीपुर में पहले बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (BGB) की 10 टुकड़ियां तैनात की गई थीं. 3 नवंबर के अपडेट के अनुसार, गाजीपुर और नारायणगंज के औद्योगिक इलाकों में कुल 12 टुकड़ियां तैनात की गई हैं.

इसके अलावा प्रशासन ने ड्रोन और बॉडी कैमरों के जरिए निगरानी भी बढ़ाई है. पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियों को संवेदनशील इलाकों में सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं.

बांग्लादेशी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, ढाका के मीरपुर में हुई हिंसा से जुड़े पांच मामलों में 60 लोगों को गिरफ्तार भी किया गया है.

गृह मंत्री ने अवामी लीग से जुड़े लोगों पर लगाए आरोप

बांग्लादेश के गृह मंत्री सलाहुद्दीन अहमद ने हिंसा को लेकर राजनीतिक आरोप भी लगाए हैं. उन्होंने दावा किया है कि पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की अवामी लीग से जुड़े कुछ कपड़ा फैक्ट्री मालिक भी अशांति फैलाने में भूमिका निभा रहे हैं.

गृह मंत्री के मुताबिक, पूर्व सांसदों और अवामी लीग की राजनीति से जुड़े कुछ फैक्ट्री मालिकों की भी इस मामले में भूमिका हो सकती है। हालांकि, ये आरोप हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी.

भारत क्यों रख रहा है बांग्लादेश के हालात पर नजर?

बांग्लादेश भारत का महत्वपूर्ण पड़ोसी देश है. दोनों देशों के बीच व्यापार, सीमा सुरक्षा, परिवहन, ऊर्जा और आर्थिक सहयोग के कई महत्वपूर्ण संबंध हैं.

बांग्लादेश में लंबे समय तक चलने वाली हिंसा का असर केवल वहां के औद्योगिक और निर्यात क्षेत्र तक सीमित नहीं रह सकता. इससे सीमा से सटे इलाकों की सुरक्षा, व्यापारिक गतिविधियों और क्षेत्रीय स्थिरता से जुड़े सवाल भी पैदा हो सकते हैं.

इसी वजह से भारत सरकार पड़ोसी देश के घटनाक्रमों पर नजर बनाए हुए है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने भी स्पष्ट किया है कि भारत बांग्लादेश की स्थिति पर लगातार निगरानी कर रहा है.

फिलहाल भारत की ओर से किसी विशेष सीमा सुरक्षा अलर्ट या अतिरिक्त सैन्य तैनाती की आधिकारिक घोषणा सामने नहीं आई है.

बांग्लादेश सरकार ने मजदूरों की वेतन संबंधी मांगों पर विचार करने के लिए वेतन बोर्ड बनाया है, लेकिन औद्योगिक क्षेत्रों में तनाव बना हुआ है. फैक्ट्री मालिक उत्पादन शुरू कराने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं मजदूर अपनी मांगों पर कायम हैं.

अब निगाहें वेतन बोर्ड की सिफारिशों और सरकार के अगले फैसले पर हैं. यदि मजदूरों और फैक्ट्री मालिकों के बीच सहमति नहीं बनती है, तो बांग्लादेश के कपड़ा उद्योग और निर्यात कारोबार पर इसका असर आगे भी बना रह सकता है. भारत के लिए भी पड़ोसी देश के घटनाक्रम पर नजर रखना महत्वपूर्ण होगा.

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