Ram temple donation theft: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को अयोध्या में राम मंदिर में कथित दान की चोरी की मॉनिटरिंग बंद कर दी. ऐसा तब हुआ जब उत्तर प्रदेश सरकार ने कोर्ट को बताया कि आठ आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट फाइल कर दी गई है. इससे याचिकाकर्ताओं को पब्लिक इंटरेस्ट को देखते हुए कार्रवाई में ट्रायल कोर्ट की मदद करने की इजाज़त मिल गई.
कानून के हिसाब से केस आगे बढ़ाया जाए- सुप्रीम कोर्ट
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची और वी मोहना की बेंच ने ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट को कानून के हिसाब से केस आगे बढ़ाने का निर्देश दिया. साथ ही, यह साफ किया कि टॉप कोर्ट के आदेश से किसी भी पार्टी को कोई नुकसान नहीं होना चाहिए, क्योंकि उसने आरोपों के मेरिट पर कोई राय नहीं दी है.
याचिकाकर्ता को दी केस में मदद करने की इजाज़त
बेंच ने रिट पिटीशन और उससे जुड़े मामलों का निपटारा करते हुए अपने ऑर्डर में कहा, “क्योंकि इसमें पब्लिक इंटरेस्ट का एलिमेंट शामिल है, इसलिए पिटीशनर को ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट की कोर्ट की मदद करने की आज़ादी दी जाती है, क्योंकि कानून क्राइम के विक्टिम्स को भी कोर्ट की मदद करने का अधिकार देता है.”
यूपी सरकार ने कोर्ट को क्या बताया
यह ऑर्डर तब आया जब उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने एडिशनल एडवोकेट जनरल और सीनियर वकील शरण देव सिंह ठाकुर के साथ बेंच को बताया कि जांच पूरी हो गई है और चार्जशीट फाइल कर दी गई है.
मेहता ने बेंच को बताया, “गिनती के समय चोरी हुई थी और गिनती करने वाले चोरी कर रहे थे. हालांकि रिकॉर्डर के पास 45 दिनों तक की रिकॉर्डिंग हो सकती है, हमने इसे उनके बैंक अकाउंट और ज़मीन वगैरह समेत प्रॉपर्टी की खरीद तक ट्रेस किया. एक ऑडिट भी हुआ है. सभी आर्टिफैक्ट और डोनेशन का हिसाब रखा गया है.”
60,000 से ज़्यादा पेज की चार्जशीट सितंबर में फाइल की गई
60,000 से ज़्यादा पेज की चार्जशीट सितंबर में अयोध्या में एंटी-करप्शन कोर्ट में फाइल की गई थी.
कोर्ट को राम जन्मभूमि केस ट्रस्ट की एक नई पिटीशन के बारे में भी बताया गया, जिसमें सुप्रीम कोर्ट के 2019 के फैसले के बारे में कुछ डायरेक्शन मांगे गए थे, जिसने मंदिर बनाने का रास्ता बनाया था. इस पिटीशन में 2019 के फैसले में तय ज़मीन का एक स्वतंत्र, तकनीकी रूप से योग्य सर्वेक्षण और सत्यापन मांगा गया था, जिसमें राजस्व, भू-आरेखीय, सर्वेक्षण, अधिग्रहण और योजना रिकॉर्ड पेश करना शामिल था, ताकि यह पता लगाया जा सके कि मौजूदा राम जन्मभूमि मंदिर ठीक उसी तय जगह पर है या नहीं.
कोर्ट की बनाई SIT ने क्या जांच की
हालांकि, बेंच ने ट्रस्ट से कहा कि वह इन प्रार्थनाओं के साथ सिविल कोर्ट जा सकता है.
जुलाई में, सुप्रीम कोर्ट ने मंदिर में दान की चोरी और कीमती सामान की हैंडलिंग में गड़बड़ियों के आरोपों की जांच के लिए लखनऊ रेंज के पुलिस इंस्पेक्टर जनरल किरण एस की अगुवाई में एक दूसरी स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) बनाई.
राज्य की तरफ से टॉप कोर्ट में दी गई जानकारी के मुताबिक, SIT ने मंदिर परिसर के अंदर दान की गिनती के दौरान कैश को बिना इजाज़त निकालने या छिपाने के 105 मामलों की पहचान की. इसने मंदिर से बैंकों तक गिने गए कैश के मूवमेंट की भी जांच की, लेकिन उस समय चोरी का कोई सबूत नहीं मिला.
जांच में तीन बड़े एरिया शामिल थे — कैश कलेक्शन और उनकी हैंडलिंग, मंदिर को मिला कीमती दान, और आरोपियों के फाइनेंशियल लेन-देन और संपत्ति. स्टेटस रिपोर्ट में बताया गया था कि इन्वेस्टिगेटर्स ने CCTV फुटेज, गवाहों के बयान, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड, बैंकिंग डॉक्यूमेंट्स और रिकवरी मटीरियल की जांच की, साथ ही एक फोरेंसिक ऑडिट भी किया.
SIT ने 803 कीमती चीज़ों की भी फिजिकली जांच की, जिनकी रसीदें मंदिर ट्रस्ट के सॉफ्टवेयर से बनी थीं और 86 दूसरी चीज़ों की भी, जिनकी रसीदें मौजूद नहीं थीं. अधिकारियों ने बताया कि चीज़ों के मिलान में कोई गड़बड़ी नहीं मिली। सिक्योरिटी प्रिंटिंग एंड मिंटिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड को पिघलाने के लिए भेजी गई करीब 944.411 kg चांदी की भी जांच की गई.
जांच में मीडिया रिपोर्ट्स में बताए गए खास दान भी शामिल थे, जिनमें 200 kg और 38.288 kg चांदी की ईंटें, एक चांदी का हार, एक जोड़ी चरण पादुका और रामचरितमानस की एक दान की हुई कॉपी शामिल है, कोर्ट को पहले बताया गया था.
जांच में आठ आरोपियों और उनके करीबी रिश्तेदारों के फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन, प्रॉपर्टी, गाड़ियों, ज्वेलरी और खर्च की भी जांच की गई ताकि यह पता लगाया जा सके कि उनकी संपत्ति उनकी इनकम के जाने-पहचाने सोर्स के हिसाब से है या नहीं. मंदिर के अधिकारियों, दान गिनने वाले लोगों, बैंक अधिकारियों, सिक्योरिटी स्टाफ, CCTV ऑपरेटर, चार्टर्ड अकाउंटेंट और वेंडर समेत 173 गवाहों से पूछताछ की गई.
कब सामने आया Ram temple donation theft
यह विवाद 7 जून को तब सामने आया जब समाजवादी पार्टी के नेता तेज नारायण ‘पवन’ पांडे ने आरोप लगाया कि मंदिर के चढ़ावे से ₹5 करोड़ से ₹7.5 करोड़ तक का दान निकाला गया है. राज्य सरकार ने 13 जून को एक SIT बनाई, जिसके बाद 26 जून को दान की रकम को संभालने और गिनने से जुड़े आठ कर्मचारियों को गिरफ्तार किया गया.
लखनऊ डिविजनल कमिश्नर विजय विश्वास पंत की अगुवाई वाली पहली SIT ने अगस्त में अपनी आखिरी रिपोर्ट सौंपी थी, जिसमें मंदिर ट्रस्ट के कामकाज में बड़ी कमियों को बताया गया था और इसके दो बड़े पुराने अधिकारियों को बरी कर दिया गया था. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने आरोपों की स्वतंत्र रूप से जांच करने के लिए दूसरी SIT बनाई.
ये भी पढ़ें-2027 पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले AAP को बड़ा झटका, तीन MLA BJP में शामिल

