मधुबनी बिजली विभाग की मनमानी, उपभोक्ता हो रहे हैं परेशान

Bihar Electricity Department पटना : बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने वादा किया था कि नई सरकार बनते ही बिहार में कई बदलाव दिखेंगे. सरकारी विभाग और सरकारी अधिकारियों पर खास नजर रहेगी ताकी उनकी वजह से बिहार की जनता को कोई परेशानी ना हो और सरकार की बदनामी ना हो लेकिन बिहार में भ्रष्टाचार ने ऐसा जड़ जमा रखा है कि उससे छुटकारा मिलता नहीं दिख रहा. भ्रष्टाचार में लिप्त सरकारी अधिकारियों ने भी ये ठान रखा है कि सीएम सम्राट चौधरी के ऐलान को अंगूठा दिखाना है और सरकार को बदनाम करना है.

बिहार के उर्जा मंत्रालय की अजब कहानी 

ये कहानी है मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के कैबिनेट मिनिस्टर शैलेश कुमार उर्फ बुलो मंडल के बिजली मंत्रालय की.मधुबनी के एक उपभोक्ता अरविंद कुमार झा जो वार्ड नंबर 29/20,हनुमान नगर कॉलोनी में रहते हैं, वो अपना घर बनवा रहे हैं लेकिन इसमें बिजली विभाग का एक पोल रुकावट बन रहा है.

Government pole on private land
निजी जमीन पर बिजली विभाग का पोल

बिजली विभाग का य़े पोल उपभोक्ता अरविंद कुमार झा की जमीन पर ही लगा हुआ है जिससे पूरे मुहल्ले की बिजली आपूर्ति हो रही है. जब तक ये बिजली का पोल हटेगा नहीं मकान बनेगा नहीं. लिहाजा एक जिम्मेदार नागरिक के नाते अरविंद झा ने मधुबनी बिजली विभाग के जेई अनिल कुसुम को अपनी समस्या बताई तो उन्होंने सलाह दी कि एई (एसडीओ) सुधांशु कुमार के नाम से आवेदन दीजिये. एसडीओ साहब को आवेदन दिया गया. उपभोक्ता अरविंद कुमार झा ने आवेदन में ये भी लिखा कि तार-पोल हटाने में जो भी खर्च आयेगा उसका वहन वो खुद करेंगे. आवेदन देने के बाद महीनों तक दौड़ने के बाद जेई अनिल कुसुम साइट पर पहुंचे. घर को देखा और बिजली के पोल को देखा मुआयना किया और फिर चले गये. फिर सब कुछ ठंडे बस्ते में चला गया.
इसके बाद फिर मधुबनी बिजली दफ्तर के कई चक्कर लगाने के बाद जेई अनिल कुसुम की नींद खुली और फिर वो दुबारा साइट विजिट करने पहुंचे लेकिन पहली बार की तरह दूसरी बार भी विजिट का कोई फायदा नहीं हुआ. बिजली का पोल अपनी जगह खड़ा रहा.
इसके बाद फिर मधुबनी बिजली दफ्तर के चक्कर लगाने के बाद जेई अनिल कुसुम अपने एक ठेकेदार मनीष कुमार के साथ तीसरी बार साइट विजिट करने पहुंचे लेकिन उपभोक्ता अरविंद झा का कहना है कि इस बार उन्होंने जानबूझकर गलत निरीक्षण रिपोर्ट दे दिया.

जब परेशान उपभोक्ता अरविंद झा ने ये बात मधुबनी एसडीओ सुधांशु कुमार को बताया तो उन्होंने जेई के खिलाफ कोई कार्रवाई करने के बजाय कहा कि अगर जेई अनिल कुसुम ने गलत रिपोर्ट दी है तो उसके खिलाफ केस कर दीजिये.

मधुबनी बिजली विभाग द्वारा परेशान किये जाने के बावजूद उपभोक्ता अरविंद झा ने हार नहीं मानी और अपनी शिकायत लिखित तौर पर एक्जीक्यूटिव इंजीनियर मोहम्मद अरमान को सौंप दी. दरअसल बिहार में एक्जीक्यूटिव इंजीनियर का पोस्ट बहुत बड़ा माना जाता है इतना बड़ा कि एक्जीक्यूटिव इंजीनियर आम लोगों से नहीं मिलते हैं. अगर किसी को दर्शन दे दें तो उसकी किस्मत बदल जाती है. खैर एक्जीक्यूटिव इंजीनियर से लिखित शिकायत करने का भी कोई फायदा नहीं हुआ.
अपनी निजी जमीन से बिजली विभाग के तार पोल को हटाने के लिये आखिरकार अरविंद कुमार झा सुपरिंटेंडेंट इंजीनियर (अधीक्षण अभियंता), दरभंगा सर्किल-अजय कुमार से 1 अक्तूबर 2026 को दरभंगा में जाकर मुलाकात की. उन्होंने उपयुक्त कार्यवाही का आश्वासन दिया लेकिन आजतक कोई कार्यवाही नहीं हुई.

जूनियर भी नहीं सुनते सीनियर अधिकारी की बात !

इस मामले में सबसे चौंकाने वाली बात ये है कि माननीय मंत्री बुलो मंडल के विभाग में जूनियर स्टाफ सीनियर की बात सुनने को तैयार नहीं है. अरविंद कुमार झा की जमीन से तार-पोल हटाने के लिये एक्जीक्यूटिव इंजीनियर यानी कार्यपालक अभियंता मधुबनी ने एक चिट्ठी लिखी है जिसकी तारीख 24/09/2026 और पत्रांक 22/5 है. ये आधिकारिक चिट्ठी सहायक विद्युत अभियंता और कनीय विद्युत अभियंता को लिखी गई है जिसमें एक्जीक्यूटिव इंजीनियर ने लिखा है कि दिनांक 01/09/2026 को पत्रांक- 2041 के माध्यम से अरविंद कुमार झा के परिसर में स्थित तार-पोल के स्थानांतरण का आदेश दिया गया था लेकिन उस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई. इसलिये फिर से निर्देशित किया जाता है कि 24 घंटे के अंदर कार्यवाही सुनिश्चित करें.

Arvind Kumar Letter To EE

एक्जीक्यूटिव इंजनीयर को भेजी गई चिट्ठी 

स्थानीय लोगों का आरोप है कि  मंत्री बुलो मंडल के मंत्रालय में इतनी अराजकता है कि एक्जीक्यूटिव इंजीनियर के निर्देश को भी जूनियर इंजीनियर तक दरकिनार ककर रहे हैं. मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी जिस सुशासन की बात करते हैं, भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस का दावा करते हैं उसकी धज्जियां उड़ाई जा रही है. जेई अनिल कुसुम एक पोल को हटाने के लिये तीन बार साइट विजिट करते हैं लेकिन तीसरी बार गलत रिपोर्ट दे देते हैं.

अनिल कुसुम ऐसा क्यों कर रहे हैं ये उपभोक्ता की समझ में तो आ रहा है (संभतह रिश्वत की चाह हो) लेकिन माननीय मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और माननीय मंत्री बुलो मंडल की समझ में आ रहा है कि नहीं ,ये समझ से परे है , लेकिन उपभोक्ता अरविंद झा के साथ हुए इस सारे प्रकरण में में इतना तो जरूर है कि बिजली विभाग की मनमानी से सरकार और मंत्रालय की बदनामी हो रही है और उपभोक्ता बेवजह परेशान हो रहे हैं.

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