उत्तर प्रदेश के पीलीभीत में बिना फॉर्म-8 बदले 10 हजार नाम, पूरे यूपी में जांच के आदेश

UP Voter List Scam Pilibhit लखनऊ / पीलीभीत: उत्तर प्रदेश की मतदाता सूची (वोटर लिस्ट) में एक बड़ी लापरवाही और धांधली का मामला सामने आया है. पीलीभीत जिले में बिना किसी आधिकारिक आवेदन (फॉर्म-8) के ही 10 हजार से ज्यादा मतदाताओं के नाम, पिता के नाम और अन्य व्यक्तिगत विवरण बदल दिए गए. हलांकि जब  इस गड़बड़ी को लेकर सियासी बवाल मचने लगा तो राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) नवदीप रिनवा ने कड़ा रुख अपनाया है. उन्होंने कहा कि यह कोई मामूली चूक नहीं बल्कि एक संगीन अपराध है. मामले की गंभीरता को देखते हुए अब पूरे उत्तर प्रदेश में इस तरह की संदिग्ध प्रविष्टियों की व्यापक जांच के आदेश जारी कर दिए गए हैं.

सपा की शिकायत से खुला फर्जीवाड़े का राज

यह पूरा मामला तब प्रकाश में आया जब समाजवादी पार्टी (सपा) ने एक मतदाता के पहचान पत्र (EPIC Card) में नाम और पिता का नाम बिना अनुमति बदले जाने की लिखित शिकायत दर्ज कराई. 19 तारीख को ज्ञापन मिलने के बाद मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने तुरंत पीलीभीत के जिलाधिकारी को विस्तृत जांच के निर्देश दिए.

प्रारंभिक जांच में शिकायत सही पाई गई. इसके बाद जब पूरी विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची का गहन विश्लेषण किया गया, तो हैरान करने वाली सच्चाई सामने आई. 31 मई से 31 अगस्त के बीच 10 हजार से अधिक ऐसी ऑनलाइन एंट्री मिलीं, जिनके लिए नियमानुसार आवश्यक फॉर्म-8 भरा ही नहीं गया था.

क्या होता है फॉर्म-8?

नियम के मुताबिक, मतदाता सूची में नाम, पता, पिता का नाम या अन्य किसी भी विवरण में सुधार कराने के लिए फॉर्म-8 भरना अनिवार्य होता है। इसके साथ पहचान और पते से जुड़े वैध दस्तावेज भी संलग्न करने होते हैं.

ऑपरेटर बर्खास्त, दो अफसरों पर विभागीय गाज

बिना किसी दस्तावेज या आवेदन के जानकारी बदलने के इस मामले में निर्वाचन आयोग ने त्वरित और सख्त कदम उठाए हैं:

  • वीआरसी ऑपरेटरों पर शिकंजा: ऑनलाइन एंट्री करने वाले वीआरसी (VRC) ऑपरेटरों की सेवाएं तत्काल समाप्त करने का प्रस्ताव मांगा गया है.

  • अधिकारियों पर कार्रवाई: 31 मई से 31 अगस्त की अवधि के दौरान तैनात दो निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों को इसके लिए जिम्मेदार पाया गया है. उनके खिलाफ विभागीय जांच शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं.

  • कानूनी एफआईआर: संबंधित कर्मचारियों और अधिकारियों के खिलाफ लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम (Representation of the People Act) की धारा 30 और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की सुसंगत धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जा रही है.

  • चुनावी काम से हटाया: दोषी पाए गए सभी कर्मियों को तत्काल प्रभाव से मतदाता सूची के सभी कार्यों से अलग कर दिया गया है.

अब पूरे उत्तर प्रदेश में होगी जांच

पीलीभीत में मिले इस संगठित खेल के बाद मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिनवा ने पूरे प्रदेश के जिलों में अलर्ट जारी कर दिया है. अब राज्य के सभी जिलों में यह जांच की जाएगी कि कहीं अन्य जगह भी तो बिना फॉर्म-8 और बिना दस्तावेज जमा किए ऑनलाइन स्तर पर डेटा में फेरबदल नहीं किया गया है.

मुख्य निर्वाचन अधिकारी का कहना है कि चुनाव आयोग की सर्वोच्च प्राथमिकता मतदाता सूची की निष्पक्षता और पारदर्शिता बनाए रखना है. किसी भी मतदाता के पहचान संबंधी ब्योरे में मनमाने तरीके से किए गए बदलाव को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और सभी फर्जी बदलावों को निरस्त कर सूची को शुद्ध किया जाएगा.

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