Akhilesh Yadav Azam Khan Meeting : सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव आज रामपुर जिला जेल पहुंचे और वरिष्ठ नेता आजम खान से करीब 45 मिनट तक मुलाकात की. जेल से बाहर आने के बाद उन्होंने मीडिया से बातचीत में स्पष्ट किया कि उन्होंने कोई सीट नहीं मांगी है, बल्कि सिर्फ सुझाव दिए हैं, जिन्हें उन्होंने स्वीकार कर लिया है. अखिलेश ने इस मुलाकात को राजनीतिक की बजाय भावनात्मक बताया और कहा कि दोनों का रिश्ता बहुत पुराना है.
रामपुर: जेल में आजम खान से मुलाकात के बाद बाहर आए अखिलेश यादव,
मीडिया से कहा- 2027 के विधानसभा चुनाव की सीटों को लेकर हुई चर्चा और विधानसभा प्रत्याशियों की एक सूची दिखाई… https://t.co/x6PZ10RMlH
— Arjun Chaudharyy (@Arjun5chaudhary) October 22, 2026
भावनात्मक मुलाकात और स्वास्थ्य पर चर्चा
अखिलेश यादव ने कहा कि आजम खान पूरी तरह स्वस्थ हैं और वह उम्मीद करते हैं कि वह जल्द ही और स्वस्थ होकर बाहर आएं और उन्हें न्याय मिले. जेल में मुलाकात के बाद सपा प्रमुख ने आजम खान के घर जाकर उनकी पत्नी तंजीन फातिमा से भी मुलाकात की. इस दौरान उनके साथ आजम खान के बड़े बेटे अदीब भी मौजूद रहे.
#WATCH | Rampur, UP: Samajwadi Party chief Akhilesh Yadav visited the residence of senior party leader Azam Khan to meet his family.
SP Chief met with Azam Khan’s wife, Dr. Tazeen Fatma, after a face-to-face meeting with Azam Khan at the Rampur Jail. https://t.co/jEE98IUZS2
— ANI (@ANI) October 22, 2026
बीजेपी पर साधा निशाना
मुलाकात के बाद अखिलेश यादव ने भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोला. उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी को पढ़ाई-लिखाई से कोई लेना-देना नहीं है और यूनिवर्सिटी को बर्बाद करने की साजिश रची गई है. शिक्षा के क्षेत्र को जितना नुकसान इस दौर में पहुंचाया गया है, उतना किसी सरकार या तानाशाह ने नहीं किया होगा. उन्होंने विश्वास जताया कि फर्जी मुकदमों में इतनी ताकत नहीं है कि वह सच्चाई को हमेशा कैद रख सकें.
पश्चिमी यूपी के सियासी समीकरणों के लिए अहम मुलाकात
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सियासी समीकरणों के लिहाज से अखिलेश यादव और आजम खान की यह मुलाकात काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है. मुरादाबाद मंडल सहित पश्चिमी यूपी की कई सीटों पर सपा और आजम खान का अच्छा खासा प्रभाव माना जाता है. जेल में होने के बावजूद पार्टी मामलों में उनका दखल और कद अब भी बरकरार है.

