जज की तबीयत खराब, सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में विरोध प्रदर्शन पर सुनवाई गुरुवार तक टाली,जानिए इंडिया गठबंधन की याचिकाओं का क्या होगा

Delhi Protest: सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को चीफ इलेक्शन कमिश्नर ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर हो रहे प्रदर्शन से पहले कथित तौर पर हिरासत में लिए जाने, प्रदर्शनकारियों पर हमले और पब्लिक ट्रांसपोर्ट पर बड़ी पाबंदियों को चुनौती देने वाली कई याचिकाओं पर सुनवाई 15 अक्टूबर तक के लिए टाल दी, क्योंकि बेंच के एक जज की तबीयत ठीक नहीं थी.

दिल्ली पुलिस को अवज्ञा नोटिस का जवाब देने बुधवार तक का समय दिया

भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी मोहना की पीठ ने लगभग एक दर्जन याचिकाओं को स्थगित कर दिया, जब दोनों पक्ष न्यायमूर्ति मोहना को स्वस्थ होने के लिए स्थगन पर सहमत हुए. अदालत ने दिल्ली पुलिस और अन्य प्राधिकारियों को उसके पहले के निर्देशों की अवज्ञा का आरोप लगाते हुए अवमानना कार्यवाही में जारी नोटिसों पर अपनी प्रतिक्रिया दाखिल करने के लिए बुधवार शाम तक का समय दिया.

पीठ ने कहा कि नई याचिकाओं पर गुरुवार को भी सुनवाई की जा सकती है, बशर्ते उनकी दाखिल संबंधी खामियां ठीक हो जाएं. यह स्पष्ट नहीं है कि भारत के चुनाव आयोग (ईसीआई) के कामकाज में कथित अनियमितताओं को चुनौती देने वाली कांग्रेस नेता राहुल गांधी और 10 अन्य भारतीय ब्लॉक नेताओं द्वारा दायर एक अलग याचिका पर बैच के साथ सुनवाई की जाएगी या नहीं.

सुप्रीम कोर्ट ने Delhi Protest को लेकर दिल्ली पुलिस को क्या आदेश दिए थे

यह स्थगन दिल्ली में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई और शनिवार को होने वाले प्रदर्शन से पहले लगाई गई पाबंदियों की बढ़ती कानूनी जांच के बीच हुआ है. यह प्रदर्शन कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और दूसरे राजनीतिक ग्रुप्स ने वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) में कथित गड़बड़ियों को लेकर बुलाया था.

रविवार को, जस्टिस बागची और मोहना की एक स्पेशल बेंच ने निर्देश दिया कि शांतिपूर्ण, बिना हथियार वाले प्रदर्शनकारियों को “कानून द्वारा तय प्रोसेस” के अलावा हिरासत में नहीं लिया जा सकता. इसने यह भी आदेश दिया कि मेट्रो और रेलवे सर्विस नॉर्मल रूप से चलें, इंटरनेट कनेक्टिविटी में कोई रुकावट न आए और कानूनी पाबंदियों के तहत फ्री मूवमेंट बहाल किया जाए. बेंच ने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया कि वे सुप्रीम कोर्ट और दूसरे कोर्ट कॉम्प्लेक्स के आसपास रोक लगाने वाले नोटिस हटा दें ताकि न्याय तक पहुंच को लेकर कोई डर न हो.
ये निर्देश उन आरोपों के बाद आए कि पब्लिक मूवमेंट पर बड़े पैमाने पर रोक लगाई गई थी, प्रदर्शनकारियों को रोक वाले इलाकों से बाहर हिरासत में लिया गया था और शहर में कर्फ्यू जैसी स्थिति थी. पिटीशनर्स ने यह भी आरोप लगाया कि अधिकारी पहले के आदेश का पालन करने में नाकाम रहे, जिसमें उन्हें मेट्रो और रेलवे सर्विस को पूरी तरह बंद करने के बजाय उन पर प्रस्तावित रोक पर फिर से विचार करने का निर्देश दिया गया था.
केंद्र और दिल्ली पुलिस की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने आरोपों को गलत बताया और कहा कि मेट्रो सर्विस नॉर्मल चल रही थीं, हालांकि दिल्ली-NCR नेटवर्क के 303 स्टेशनों में से 45 पर एंट्री और एग्जिट पर रोक थी. बेंच ने प्रभावित स्टेशनों की डिटेल्स मांगी और अधिकारियों को एफिडेविट फाइल करने का निर्देश दिया, जिसमें उन हालातों के बारे में बताया गया हो जिनमें प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया, उन्हें हिरासत में लेने का तरीका और कार्रवाई का कानूनी औचित्य बताया गया हो.
कोर्ट का दखल वकीलों द्वारा पुलिस की कथित ज्यादतियों, जिसमें सीनियर वकीलों को हिरासत में लेना और उनके साथ मारपीट करना शामिल है, पर जताई गई चिंताओं के बैकग्राउंड में आया. रविवार की सुनवाई के दौरान, सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड एसोसिएशन (SCAORA) की ओर से पेश सीनियर वकील शादान फरासत ने दिल्ली के हालात को दबाने वाला बताया, जबकि सीनियर वकील गोपाल शंकरनारायणन ने आरोप लगाया कि कार्रवाई के दौरान वकीलों, स्टूडेंट्स, महिलाओं और बच्चों को धक्का दिया गया, धकेला गया या उन पर हमला किया गया.

इंडिया गठबंधन ने ECI के खिलाफ दायर की याचिका

वहीं सोमवार को विपक्ष ने ECI के कामकाज को कानूनी चुनौती देते हुए याचिका दायर की. राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और इंडिया ब्लॉक के नौ अन्य नेता सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में खुद पेश हुए और कुमार द्वारा कथित तौर पर एकतरफा लिए गए फैसलों की स्वतंत्र, समयबद्ध जांच के लिए एक याचिका दायर की, साथ ही जांच लंबित रहने तक चल रही SIR एक्सरसाइज को रोकने की भी मांग की.

याचिका में 14 कमियों के चलते आज नहीं होगी सुनवाई

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री द्वारा 14 कमियों को चिह्नित करने के बाद मंगलवार को याचिका पर सुनवाई नहीं होगी, जिसमें कोर्ट फीस में ₹220 की कमी, खड़गे के पहचान पत्र की एक अस्पष्ट फोटोकॉपी और नौ याचिकाकर्ताओं के वकालतनामे गायब होना शामिल है. याचिकाकर्ताओं की कानूनी टीम ने कमियों को ठीक करने के बाद बुधवार को लिस्टिंग की मांग की है.
जिन लोगों के वकालतनामे गायब थे, उनमें समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी प्रसाद यादव, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की सांसद सुप्रिया सुले, शिवसेना (UBT) के सांसद संजय राउत और तृणमूल कांग्रेस के सांसद शामिल थे.

याचिका में क्या आरोप लगाए है इंडिया गठबंधन ने

पिटीशन में आरोप लगाया गया है कि चुनाव प्रक्रिया से जुड़े फैसले, जिसमें जून 2025 का SIR करने का फैसला भी शामिल है, चीफ इलेक्शन कमिश्नर ने साथी इलेक्शन कमिश्नर SS संधू और विवेक जोशी के एतराज़ के बावजूद एकतरफ़ा लिए थे. इसमें विवादित फैसलों से जुड़ी फाइलें, एजेंडा, मिनट्स, नोटिंग्स और एतराज़ पेश करने की मांग की गई है, और कहा गया है कि एक ही सदस्य द्वारा सामूहिक शक्तियों का कथित इस्तेमाल संविधान के आर्टिकल 324 और चीफ इलेक्शन कमिश्नर एंड अदर इलेक्शन कमिश्नर्स एक्ट, 2023 के पालन पर सवाल उठाता है.

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