NPCI के एक बयान के अनुसार, UPI और सर्विसेज़ स्टीयरिंग कमेटी ने मंगलवार को दिवाली के तुरंत बाद कुछ खास पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) UPI ट्रांज़ैक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू करने का फ़ैसला किया.
त्योहारों को देखते हुए टाला गया UPI चार्ज
नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ़ इंडिया (NPCI) का यह फैसला त्योहारों के मौसम को ध्यान में रखकर लिया गया है, और इसे लागू करने की तारीख अलग से बताई जाएगी, ऐसा रिपोर्ट में कहा गया है.
UPI MDR on Select Merchant Transactions Shall be Implemented Post Diwali
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— NPCI (@NPCI_NPCI) October 13, 2026
क्या है MDR
MDR एक फीस है जो डिजिटल पेमेंट प्रोसेस करने के लिए मर्चेंट्स से ली जाती है. यह प्रस्तावित कदम सिर्फ़ कुछ चुनिंदा मर्चेंट ट्रांज़ैक्शन पर लागू होगा, हालांकि बयान में यह नहीं बताया गया कि किस कैटेगरी के ट्रांज़ैक्शन पर यह चार्ज लगेगा.
नए फ्रेमवर्क के तहत, ₹2,000 से ज़्यादा के UPI पेमेंट लेने वाले मर्चेंट्स को ट्रांज़ैक्शन वैल्यू का 0.4% फ़ीस देनी होगी. हालांकि, एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति के ट्रांसफ़र पर इस चार्ज से छूट होगी, और कुछ कैटेगरी में पेमेंट पर, रकम चाहे कितनी भी हो, एकमुश्त ₹5 फ़ीस लगेगी.
सरकार में संसद में पास कराया था टैक्सेशन एंड अदर लॉज़ (अमेंडमेंट) बिल
MDR फ्रेमवर्क तब आया जब पार्लियामेंट ने 11 अगस्त को टैक्सेशन एंड अदर लॉज़ (अमेंडमेंट) बिल, 2026 को मंज़ूरी दे दी. इस बिल में पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट, 2007 के सेक्शन 10A में बदलाव किया गया था, ताकि सरकार को कुछ खास डिजिटल पेमेंट मोड पर चार्ज लगाने की इजाज़त मिल सके.
इसके आधार पर, ₹2,000 से ज़्यादा के UPI पेमेंट पर दो तरह की फ़ीस लगेंगी. पहली, चार खास कैटेगरी — रेलवे, टेलीकॉम सर्विस, इंश्योरेंस और फ़्यूल में मर्चेंट को किए जाने वाले पेमेंट पर हर ट्रांज़ैक्शन पर ₹5 का एक फ़्लैट MDR है.
दूसरी फ़ीस ₹2,000 से ज़्यादा के दूसरे पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) UPI पेमेंट पर 0.4% का MDR है, जिसकी लिमिट हर ट्रांज़ैक्शन पर ₹300 है.
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