युवाओं को कानून, सुरक्षा और जिम्मेदार नागरिकता का पाठ पढ़ाएगी मध्यप्रदेश पुलिस

भोपाल : युवाओं को कानूनों, मौलिक अधिकारों, नागरिक कर्तव्यों, साइबर सुरक्षा, सड़क सुरक्षा तथा सामाजिक सुरक्षा के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से मध्यप्रदेश पुलिस की सामुदायिक पुलिसिंग शाखा एवं मध्यप्रदेश शासन के उच्च शिक्षा विभाग द्वारा संयुक्त रूप से ‘जन सुरक्षा युवा सृजन संवाद’ पहल प्रारंभ की जा रही है। इस पहल के अंतर्गत प्रदेश के कॉलेजों एवं विश्वविद्यालयों में विद्यार्थियों के लिए कार्यशालाओं, संवाद सत्रों और व्यावहारिक गतिविधियों के माध्यम से कानून एवं सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों की जानकारी दी जाएगी। कार्यक्रम के प्रभावी एवं व्यवस्थित क्रियान्वयन के लिए 10 अक्टूबर से NITTTR, भोपाल में कॉलेज प्राध्यापकों एवं पुलिस अधिकारियों का प्रशिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम (ToT) प्रारंभ किया गया है। कॉलेजों में इसका क्रियान्वयन 22 अक्टूबर से प्रारंभ होगा।

कार्यक्रम में उच्च शिक्षा विभाग के संचालक श्री मनोज सिंह सहित विभिन्न अधिकारी एवं शिक्षाविद् उपस्थित रहे। कार्यक्रम में प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए सहायक प्राध्यापकों एवं प्राध्यापकों ने प्रशिक्षण में भाग लिया। इनमें विभिन्न विषयों के शिक्षकों के साथ एनसीसी एवं एनएसएस से जुड़े प्रभारी भी शामिल रहे। उच्च शिक्षा विभाग के आयुक्त श्री प्रबल सिपाहा ने पुलिस एवं उच्च शिक्षा विभाग के संयुक्त प्रयासों की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए बताया कि युवाओं को कानून, सुरक्षा एवं नागरिक जिम्मेदारियों की व्यवस्थित जानकारी देने के उद्देश्य से आठ क्रेडिट कोर्स तैयार किए गए हैं। उन्होंने नवीन आपराधिक कानूनों तथा इस पहल के प्रभावी क्रियान्वयन में पुलिस एवं प्राध्यापकों की भूमिका को ध्यान में रखते हुए विकसित की जा रही पाठ्य सामग्री की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण के माध्यम से प्राध्यापकों को कार्यक्रम की विषयवस्तु एवं उद्देश्यों से अवगत कराया जाएगा, ताकि वे महाविद्यालय स्तर पर विद्यार्थियों को जागरूक कर सकें। प्रशिक्षण के उपरांत जिला स्तर पर कार्ययोजना तैयार कर कार्यक्रम को व्यवस्थित रूप से लागू करने तथा युवाओं की सहभागिता से कानून, सुरक्षा और सामाजिक उत्तरदायित्व के प्रति जागरूकता बढ़ाने की दिशा में कार्य किया जाएगा।

पुलिस महानिरीक्षक श्रीमती श्रुचि वर्धन मिश्रा ने हार्टफुलनेस संस्था और मध्यप्रदेश पुलिस के बीच हुए एमओयू की जानकारी देते हुए बताया कि पुलिस महानिदेशक श्री कैलाश मकवाणा के मार्गदर्शन में पुलिसकर्मियों के मानसिक स्वास्थ्य, तनाव प्रबंधन एवं एकाग्रता बढ़ाने के उद्देश्य से ध्यान संबंधी गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। उन्होंने बताया कि प्रत्येक रविवार को थाना स्तर पर ध्यान सत्र आयोजित किए जाते हैं, जिनसे पुलिसकर्मियों को कार्य के दबाव के बीच मानसिक शांति एवं संतुलन बनाए रखने में सहायता मिलती है। उन्होंने पुलिसकर्मियों के व्यक्तिगत अनुभवों का उल्लेख करते हुए ध्यान के सकारात्मक प्रभावों को रेखांकित किया। साथ ही, बच्चों की क्षमताओं के विकास से जुड़ी ब्राइटर माइंड्स पहल की जानकारी भी दी। उन्होंने विभिन्न उपलब्धियों एवं पुरस्कारों का उल्लेख करते हुए प्राध्यापकों को प्रेरित किया कि जब पुलिसकर्मी अपनी व्यस्त एवं चुनौतीपूर्ण दिनचर्या के बावजूद ध्यान के लिए समय निकाल सकते हैं, तो विद्यार्थी भी इसे अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाकर एकाग्रता, आत्मविश्वास और मानसिक संतुलन विकसित कर सकते हैं।

डीआईजी सामुदायिक पुलिसिंग डॉ. विनीत कपूर ने पुलिस और समाज के बीच विश्वासपूर्ण संबंध स्थापित करने तथा युवाओं को कानून, सुरक्षा एवं नागरिक जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक बनाने में सामुदायिक पुलिसिंग की महत्वपूर्ण भूमिका बताई। उन्होंने लैंगिक न्याय, महिलाओं के विरुद्ध हिंसा की रोकथाम और युवाओं में संवेदनशीलता विकसित करने पर जोर देते हुए ‘मैं हूँ अभिमन्यु’ अभियान के माध्यम से पुरुषों एवं बालकों को लैंगिक समानता और महिला सुरक्षा के प्रति जागरूक करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने सोशल मीडिया की लत, बच्चों एवं युवाओं पर इसके प्रभाव तथा संवाद आधारित जागरूकता गतिविधियों पर भी चर्चा की। उन्होंने बताया कि ‘जन सुरक्षा युवा सृजन संवाद’ के अंतर्गत कॉलेजों में विद्यार्थी स्वयंसेवकों एवं इच्छुक प्राध्यापकों को जोड़कर स्थानीय थानों और महिला थानों के साथ समन्वय स्थापित किया जाएगा, जिससे विद्यार्थी अपनी समस्याएं गोपनीय रूप से साझा कर सकेंगे। मंडीदीप में विद्यार्थियों द्वारा अवैध शराब बिक्री की सूचना दिए जाने पर पुलिस की त्वरित कार्रवाई का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि यह पहल युवाओं को जिम्मेदार नागरिक बनाने के साथ पुलिस की जवाबदेही और जनविश्वास बढ़ाने में भी सहायक होगी।

एआईजी सामुदायिक पुलिसिंग श्री अमृत मीना ने स्वागत संबोधन में कहा कि ‘जन सुरक्षा युवा सृजन संवाद’ पुलिस एवं उच्च शिक्षा विभाग की संयुक्त पहल है, जिसका उद्देश्य युवाओं को कानून, सुरक्षा, नागरिक जिम्मेदारियों और सामाजिक संवेदनशीलता के प्रति जागरूक करना है। उन्होंने कहा कि सामुदायिक पुलिसिंग पुलिस एवं आमजन के बीच सेतु का कार्य करती है और इसी अवधारणा को शैक्षणिक संस्थानों तक पहुंचाकर विद्यार्थियों में कानूनसम्मत व्यवहार को प्रोत्साहित किया जाएगा। उन्होंने प्राध्यापकों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि वे प्रशिक्षण के दौरान प्राप्त जानकारी को निर्धारित प्रशिक्षण पुस्तिका एवं प्रस्तुतीकरण के माध्यम से अपने-अपने महाविद्यालयों के विद्यार्थियों तक पहुंचाएंगे, जिससे प्रदेशभर में कार्यक्रम का एकरूपता के साथ प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित हो सके। उन्होंने विद्यार्थियों को अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्यों, सामाजिक उत्तरदायित्व और दूसरों के अधिकारों के सम्मान के प्रति जागरूक करने की आवश्यकता भी रेखांकित की।

प्रथम चरण में 500 कॉलेजों तक पहुंचेगा कार्यक्रम

‘ जन सुरक्षा युवा सृजन संवाद’ का उद्देश्य युवाओं को केवल कानूनों की सैद्धांतिक जानकारी देना ही नहीं, बल्कि उन्हें दैनिक जीवन में सुरक्षा संबंधी चुनौतियों को समझने, सही निर्णय लेने तथा जिम्मेदार नागरिक के रूप में अपनी भूमिका निभाने के लिए सक्षम बनाना है। प्रथम चरण में प्रदेश के 500 कॉलेजों में इस कार्यक्रम का संचालन किया जाएगा। इसके अंतर्गत सभी जिला मुख्यालयों के कॉलेजों में निर्धारित प्रशिक्षण पुस्तिका एवं प्रेजेंटेशन के माध्यम से मानकीकृत कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी, जिससे विद्यार्थियों तक विषयवस्तु एकरूपता एवं व्यवस्थित तरीके से पहुंचाई जा सके।

कार्यशालाओं में कानून से लेकर मानसिक स्वास्थ्य तक होंगे महत्वपूर्ण विषय शामिल

कार्यक्रम के अंतर्गत विद्यार्थियों को संविधान, मौलिक अधिकार एवं कर्तव्य, कानूनी जागरूकता, कानून-व्यवस्था तथा पुलिस की कार्यप्रणाली से परिचित कराया जाएगा। इसके साथ ही साइबर अपराध एवं डिजिटल सुरक्षा, यातायात नियम, सड़क सुरक्षा, जेंडर आधारित हिंसा, नशे से दूरी, नशे के दुष्प्रभाव, मानसिक स्वास्थ्य एवं तनाव प्रबंधन जैसे विषयों पर विशेष कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी।

इन सत्रों के माध्यम से विद्यार्थियों को साइबर ठगी एवं ऑनलाइन अपराधों से बचाव, आवश्यकता पड़ने पर सहायता प्राप्त करने के उचित माध्यमों तथा सामाजिक सुरक्षा से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी दी जाएगी। युवाओं को संवेदनशील सामाजिक मुद्दों को समझने, अपने अधिकारों के प्रति सजग रहने और दूसरों के अधिकारों का सम्मान करने के लिए भी प्रेरित किया जाएगा।

पुलिस से सीधा संवाद और डायल-112 सेवा की जानकारी

इस पहल की एक महत्वपूर्ण विशेषता विद्यार्थियों और पुलिस के बीच सीधा संवाद स्थापित करना है। पुलिस अधिकारी विद्यार्थियों से चर्चा कर उनकी जिज्ञासाओं का समाधान करेंगे तथा कानून, सुरक्षा और पुलिस की कार्यप्रणाली से संबंधित जानकारी साझा करेंगे। कार्यक्रम के अंतर्गत स्थानीय पुलिस थानों का भ्रमण भी कराया जाएगा, ताकि विद्यार्थी पुलिस की कार्यप्रणाली को नजदीक से समझ सकें। इसके साथ ही आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित सहायता उपलब्ध कराने वाली डायल-112 सेवा की कार्यप्रणाली एवं उपयोग के बारे में भी विद्यार्थियों को परिचित कराया जाएगा।

इससे युवाओं को यह समझने में सहायता मिलेगी कि किसी आपात स्थिति, अपराध अथवा सुरक्षा संबंधी समस्या के समय पुलिस से किस प्रकार संपर्क किया जाए और उपलब्ध सहायता सेवाओं का उपयोग कैसे किया जाए।

चार क्रेडिट कोर्स के माध्यम से कानून एवं नागरिक कर्तव्यों का अध्ययन

युवाओं में कानून और नागरिक जिम्मेदारियों की समझ को शैक्षणिक स्तर पर मजबूत करने के लिए इस पहल के अंतर्गत चार क्रेडिट कोर्स भी विकसित किए गए हैं। इनके माध्यम से विद्यार्थी पुलिस, कानून तथा नागरिक कर्तव्यों से संबंधित विषयों का व्यवस्थित अध्ययन कर सकेंगे। यह व्यवस्था विद्यार्थियों को नियमित शैक्षणिक गतिविधियों के साथ कानून एवं सामाजिक सुरक्षा संबंधी ज्ञान अर्जित करने का अवसर प्रदान करेगी।

प्राध्यापकों और पुलिस अधिकारियों को दिया जा रहा प्रशिक्षण

कार्यक्रम के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए आयोजित प्रशिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम में कॉलेज प्राध्यापकों एवं पुलिस अधिकारियों को प्रशिक्षण पुस्तिका, प्रेजेंटेशन तथा कार्यशाला संचालन की प्रक्रिया से अवगत कराया जा रहा है। इसका उद्देश्य प्रशिक्षकों को विषयवस्तु की स्पष्ट समझ प्रदान करना और कॉलेजों में संवाद आधारित, सहभागितापूर्ण एवं व्यावहारिक प्रशिक्षण सुनिश्चित करना है। प्रशिक्षित प्राध्यापक एवं पुलिस अधिकारी अपने-अपने स्तर पर विद्यार्थियों के साथ संवाद और जागरूकता गतिविधियों का संचालन करेंगे।

जागरूक युवा, सुरक्षित समाज

‘ जन सुरक्षा युवा सृजन संवाद’ मध्यप्रदेश पुलिस की सामुदायिक पुलिसिंग की अवधारणा को शैक्षणिक संस्थानों तक पहुंचाने की पहल है। इसके माध्यम से पुलिस और युवाओं के बीच विश्वास, सहयोग एवं सहभागिता को मजबूत करने के साथ विद्यार्थियों में कानून के प्रति सम्मान, सामाजिक संवेदनशीलता और जिम्मेदार नागरिकता की भावना विकसित करने पर जोर दिया जाएगा। यह संयुक्त पहल युवाओं को जागरूक, सुरक्षित एवं जिम्मेदार नागरिक बनाने तथा समाज में कानूनसम्मत व्यवहार और सकारात्मक सामाजिक सहभागिता को प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

 

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