नई दिल्ली। भारतीय वायु सेना (एआईएफ) के एयर चीफ मार्शल ए पी सिंह ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि देश में निर्मित तेजस लड़ाकू विमानों को शामिल करने में हो रही अत्यधिक देरी से वायुसेना को गंभीर नुकसान हो रहा है। उन्होंने बताया कि यह ऐसे महत्वपूर्ण समय में हो रहा है जब सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने के लिए हवाई ताकत और भी अधिक आवश्यक होती जा रही है, जबकि लड़ाकू जेट स्क्वाड्रन की संख्या लगातार कम हो रही है। वायु सेना दिवस से पहले एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए, आईएएफ प्रमुख ने जोर दिया कि वायु सेना को अगले कुछ वर्षों तक हर साल कम से कम 36-40 लड़ाकू जेट शामिल करने की आवश्यकता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि देश में बने तेजस मार्क-1ए विमानों और मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट प्रोग्राम के तहत खरीदे जाने वाले राफेल लड़ाकू जेट के शामिल होने से इस स्थिति में सुधार होगा।
एयर चीफ मार्शल सिंह ने यह भी बताया कि अगर सब कुछ योजना के अनुसार रहा, तो भारत इस वित्तीय वर्ष में एमआरएफए डील को अंतिम रूप देने पर विचार कर रहा है। भारत ने अपनी अब तक की सबसे बड़ी रक्षा खरीद प्रक्रिया के तहत, फरवरी में फ्रांस के साथ सरकार-से-सरकार (जी2जी) फ्रेमवर्क के तहत 114 राफेल लड़ाकू जेट खरीदने के लंबे समय से लंबित प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। उन्होंने भारत और फ्रांस के बीच चल रही बातचीत का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय वायु सेना की लड़ाकू क्षमता को बढ़ाने के लिए यह योजना लगभग दो दशक पहले शुरू की गई थी। इस परियोजना से जुड़ी कीमत पर बातचीत और अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों को अभी अंतिम रूप दिया जा रहा है।
हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) द्वारा जेट की आपूर्ति में हो रही देरी के बारे में जवाब देते हुए एयर चीफ मार्शल ने स्पष्ट कहा, इससे हमें नुकसान होगा। फरवरी 2021 में, रक्षा मंत्रालय ने आईएएफ के लिए 83 तेजस एमके-1ए जेट खरीदने के लिए एचएएल के साथ 48,000 करोड़ रुपये की डील की थी। विमान का पहला सेट मार्च 2024 में डिलीवर किया जाना था, हालांकि, अब तक आईएएफ को एक भी जेट नहीं मिला है। आईएएफ इन लड़ाकू विमानों को तत्काल शामिल करना चाहती है, क्योंकि इसके फाइटर स्क्वाड्रन की संख्या आधिकारिक तौर पर मंजूर 42 से घटकर 29 रह गई है। रक्षा मंत्रालय ने पिछले साल सितंबर में आईएएफ के लिए 97 तेजस एमके-1ए लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट खरीदने के लिए एचएएल के साथ 62,370 करोड़ रुपये की एक और डील की थी।

