नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जैसे बड़े नेता युद्ध रोकने में नाकाम रहे, वहीं भारत की कूटनीतिक पहल ने दोनों देशों का ध्यान आकर्षित किया है। यूक्रेन के विदेश मंत्री एंड्री सिबिहा ने भारत के युद्धविराम प्रस्ताव को अमेरिका, तुर्की और मिस्र द्वारा दिए गए प्रस्तावों में सबसे संतुलित, प्रभावी और व्यावहारिक बताया है। यूक्रेन अब अपने ऊर्जा ठिकानों और काला सागर में हमलों को रोकने की शर्त पर युद्धविराम के लिए तैयार है, जिसके लिए रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की के बीच सीधी मुलाकात हो सकती है। पुतिन पहले ही पीएम मोदी के विचारों की सार्वजनिक रूप से प्रशंसा कर चुके हैं।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक कीव में एंड्री सिबिहा ने कहा कि भारत का सीजफायर प्रस्ताव सबसे ठोस है और यह पहला मौका है जब भारत ने इस संघर्ष में सीधी मध्यस्थ की भूमिका निभाने के संकेत दिए हैं। यूक्रेन ने रूस के साथ शांति वार्ता के लिए अपनी शर्तें रखी हैं। पहला- रूस उसके बिजली स्टेशनों और ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर पर मिसाइल हमले पूरी तरह रोके। दूसरा- काला सागर के समुद्री मार्ग पर जहाजों की आवाजाही को पूरी तरह सुरक्षित किया जाए। यूक्रेनी विदेश मंत्री का मानना है कि इन शर्तों पर संपर्क रेखा पर युद्धविराम तभी संभव है जब पुतिन और जेलेंस्की आमने-सामने बैठें और भारत का प्रस्ताव इसी सीधी मुलाकात का मार्ग प्रशस्त कर रहा है।
बता दें भारत का यह ऑल-इन-वन शांति फॉर्मूला अन्य देशों के प्रस्तावों से अलग है क्योंकि इसने युद्ध के सभी संवेदनशील पहलुओं को एक साथ पिरोया है। तुर्की और मिस्र का प्रस्ताव केवल काला सागर में अनाज आपूर्ति तक सीमित था, जबकि अमेरिकी प्रशासन ने सिर्फ ऊर्जा ठिकानों पर हमलों को रोकने का एक अधूरा ढांचा पेश किया था। पीएम मोदी ने युद्ध की शुरुआत में ही पुतिन के सामने कहा था कि आज का युग युद्ध का युग नहीं है। पश्चिमी देशों के विपरीत, भारत ने अपनी निष्पक्ष नीति बनाए रखते हुए दोनों पक्षों का भरोसा जीता है। अगर यह पहल सफल होती है, तो यह आधुनिक विश्व के इतिहास में भारत की सबसे बड़ी कूटनीतिक सफलता होगी।

