नई दिल्ली| राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के विभिन्न सरकारी अस्पतालों में इलाज कराने आने वाले मरीजों और उनके तीमारदारों को मुफ्त दवाइयाँ प्राप्त करने के लिए रोजाना लंबी और थका देने वाली कतारों से गुजरना पड़ रहा है। कई मरीज तो दवा काउंटर खुलने से दो से तीन घंटे पहले ही अस्पताल पहुँचकर लाइनों में अपनी बारी का इंतजार करने लगते हैं। इसके बावजूद जब काउंटर पर उनकी बारी आती है, तो डॉक्टर द्वारा लिखी गई पर्ची की सभी दवाएँ एक साथ नहीं मिल पाती हैं। कई महत्वपूर्ण दवाइयाँ अनुपलब्ध होने के कारण मरीजों को मजबूरन बाहर के निजी मेडिकल स्टोर्स का रुख करना पड़ता है, जिससे उनकी जेब पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है।
सरदार वल्लभ भाई पटेल अस्पताल और अन्य केंद्रों का हाल
स्थानीय सरदार वल्लभ भाई पटेल अस्पताल में दवा लेने के लिए करीब एक घंटे से लाइन में खड़े गौरव ने अपना अनुभव साझा करते हुए बताया कि जब आखिरकार उनकी बारी आई, तो उन्हें पर्ची में लिखी सभी दवाएँ नहीं मिल सकीं। जो दवाइयाँ अस्पताल के काउंटर पर उपलब्ध नहीं थीं, उन्हें अंततः बाहर से ही खरीदनी पड़ीं। दवा काउंटर पर मौजूद कई अन्य मरीजों ने भी यही शिकायत की कि डॉक्टर की पर्ची मिलने के बाद दवा प्राप्त करने के लिए उन्हें एक और लंबी कतार में खड़ा होना पड़ता है। सामान्य कार्यदिवसों में भी काउंटर तक पहुँचने और दवा मिलने की प्रक्रिया में लगभग एक घंटे का समय आसानी से बीत जाता है।
सफदरजंग और आरएमएल अस्पतालों में 'दवा उपलब्ध नहीं' की समस्या
प्रसिद्ध सफदरजंग अस्पताल के दवा काउंटर पर खड़े मोहम्मद हुसैन को भी बिल्कुल ऐसी ही दुविधा का सामना करना पड़ा। लंबी कतार में घंटों इंतजार करने के बाद जब उन्हें काउंटर पर दवा दी गई, तो डॉक्टर द्वारा लिखी गई कई दवाइयाँ वहाँ मौजूद नहीं थीं। हुसैन को मजबूर होकर अस्पताल परिसर से बाहर जाकर निजी मेडिकल स्टोर से पैसे चुकाकर दवाइयाँ खरीदनी पड़ीं। मरीजों का कहना है कि घंटों अपनी बारी का इंतजार करने के बाद काउंटर पर अक्सर यह सुनने को मिलता है कि 'यह दवा उपलब्ध नहीं है', 'स्टॉक खत्म हो गया है' या 'इसे बाहर से ले लें'। इससे मुफ्त और सुलभ इलाज की उम्मीद लेकर सरकारी अस्पताल पहुँचने वाले गरीब मरीजों का खर्च अनावश्यक रूप से बढ़ जाता है।
बुजुर्गों, दिव्यांगों और गंभीर मरीजों के लिए विकट स्थिति
इन लंबी और अंतहीन कतारों का सबसे बुरा प्रभाव बुजुर्गों, दिव्यांगों और शारीरिक रूप से कमजोर मरीजों पर पड़ता है। पहले से ही किसी गंभीर बीमारी या शारीरिक पीड़ा से जूझ रहे मरीजों के लिए घंटों तक खड़े रहकर अपनी बारी का इंतजार करना बेहद कष्टदायक और चुनौतीपूण होता है। हालांकि, कुछ अस्पतालों में वरिष्ठ नागरिकों की सुविधा के लिए अलग से विशेष दवा काउंटर बनाए गए हैं, जैसे कि लाल बहादुर शास्त्री अस्पताल में इस तरह की व्यवस्था का उल्लेख मिलता है, लेकिन इसके बावजूद भीड़भाड़ अधिक होने के कारण कई बार असुविधा बनी रहती है।
आरएमएल अस्पताल की स्थिति और सरकारी दिशा-निर्देश
आरएमएल अस्पताल में कतार में खड़े रहीम ने भी अपनी परेशानी बताते हुए कहा कि डॉक्टर ने उन्हें कई दवाइयाँ लिखकर दी थीं, जिनमें से कुछ तो मिल गईं, परंतु बाकी के लिए उन्हें बाहर जाना पड़ा। अन्य मरीजों की पर्चियों पर भी लगभग ऐसी ही स्थिति देखने को मिली, जहाँ लिखी गई दवाओं के आगे 'नॉट अवेलेबल' (उपलब्ध नहीं) लिख दिया जाता है।
नियमानुसार दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में निर्धारित ड्रग फॉर्मुलरी के अनुसार मरीजों को सभी आवश्यक दवाइयाँ मुफ्त उपलब्ध कराई जानी चाहिए, जिसका उल्लेख विभिन्न अस्पतालों की आधिकारिक वेबसाइटों पर भी किया गया है। उदाहरण के लिए, दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल सभी रोगियों को मुफ्त दवा देने का दावा करता है, और लाल बहादुर शास्त्री अस्पताल भी दिल्ली सरकार की सूची के तहत मुफ्त दवाइयाँ देने की बात कहता है, परंतु जमीनी स्तर पर स्टॉक की कमी के कारण मरीजों को पूरी राहत नहीं मिल पा रही है।

