नई दिल्ली| राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में महिलाओं और नाबालिग बच्चियों के खिलाफ लगातार बढ़ रहे गंभीर अपराधों और सुरक्षा में भारी चूक के विरोध में बुधवार को 'स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया' (SFI) के बैनर तले एक विशाल रोष मार्च निकाला गया। यह मार्च सलीमगढ़ फ्लाईओवर से शुरू होकर दिल्ली सचिवालय तक गया, जिसमें दिल्ली के विभिन्न विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों (कॉलेजों) और स्कूलों से आए हजारों छात्र-छात्राओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
सितंबर माह में बढ़े अपराध और एसएफआई के आंकड़े
छात्र संगठन एसएफआई के अनुसार, केवल सितंबर के महीने में ही राष्ट्रीय राजधानी में नाबालिग बच्चियों से दुष्कर्म और यौन उत्पीड़न के लगभग 13 जघन्य मामले सामने आए हैं। इन वारदातों में मुख्य रूप से कालकाजी स्थित आस्था कुंज पार्क में 17 वर्षीय किशोरी के साथ सामूहिक दुष्कर्म, सदर बाजार इलाके में 11 वर्षीय बच्ची से यौन उत्पीड़न और दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र के अंतर्गत चलती स्लीपर बस में 17 वर्षीय युवती के साथ सामूहिक दुष्कर्म जैसी शर्मनाक घटनाएँ शामिल हैं। संगठन ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि कानून-व्यवस्था और पुलिस प्रशासन सीधे तौर पर केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस के नियंत्रण में आते हैं, जबकि सार्वजनिक सुविधाओं, शिक्षा तथा महिलाओं व बच्चों के कल्याण से जुड़ी बुनियादी सेवाओं की जिम्मेदारी दिल्ली सरकार की भी है।
प्रतिनिधिमंडल द्वारा ज्ञापन सौंपना और प्रमुख माँगे
इस प्रदर्शन और मार्च के पश्चात एसएफआई का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल दिल्ली सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग के संयुक्त सचिव प्रदीप तयाल से मिला और उन्हें एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा। इस ज्ञापन के माध्यम से संगठन ने कई प्रमुख माँगे रखीं, जिनमें निम्नलिखित बिंदु शामिल हैं:
यौन हिंसा और अपराधों के मामलों में एफआईआर दर्ज करने में अनावश्यक देरी करने वाले अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई हो।
राजधानी में समयबद्ध तरीके से सुरक्षा ऑडिट कराया जाए और संवेदनशील इलाकों में सीसीटीवी कैमरे तथा स्ट्रीट लाइटें लगाई जाएँ।
सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को महिलाओं के लिए पूरी तरह सुरक्षित बनाया जाए।
महिलाओं के लिए विशेष सहायता केंद्र (हेल्प डेस्क) और सुरक्षित सार्वजनिक शौचालयों का निर्माण किया जाए।
स्कूलों और शिक्षण संस्थानों के पाठ्यक्रम में लैंगिक संवेदनशीलता (जेंडर सेंसिटिविटी) की शिक्षा को अनिवार्य किया जाए।
समाज में लैंगिक और यौन अल्पसंख्यकों (क्वीन व एलजीबीटीक्यू समुदाय) की सुरक्षा भी सुनिश्चित की जाए।
डीयू और श्यामा प्रसाद मुखर्जी कॉलेज की छात्राओं का प्रदर्शन
इसी कड़ी में, दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) के श्यामा प्रसाद मुखर्जी कॉलेज फॉर वुमेन समेत कई अन्य प्रमुख कॉलेजों की सैकड़ों छात्राओं ने भी बुधवार को महिलाओं की सुरक्षा और अधिकारों को लेकर एक प्रभावी मार्च निकाला। कॉलेज परिसर से शुरू होकर पंजाबी बाग पुलिस स्टेशन तक निकाले गए इस मार्च में छात्राओं ने सड़कों पर उतरकर पुलिस गश्त तेज करने और शैक्षणिक संस्थानों के आसपास सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद करने की पुरजोर माँग की। ज्ञात हो कि कालकाजी के आस्था कुंज पार्क में हुई दर्दनाक घटना के बाद से छात्राओं का यह चौथा बड़ा विरोध प्रदर्शन था।
नारे, बैनर और छात्राओं की अन्य प्रमुख माँगे
इससे पूर्व, नॉर्थ कैंपस सहित शहर के विभिन्न कॉलेज परिसरों के बाहर भी छात्राओं द्वारा लगातार विरोध प्रदर्शन निकाले जा चुके हैं। 'पितृसत्ता को खत्म करो- महिला सुरक्षा मार्च' के बैनर तले आयोजित इस प्रदर्शन में छात्राएँ हाथों में तख्तियाँ और नारे लिखे बैनर लेकर शामिल हुईं। उनके पोस्टरों पर लिखे संदेशों में समाज की दबी हुई आवाज़ और गहरे रोष को दर्शाया गया था, जैसे— "यह अजीब है कि मेरे कपड़े आपकी सोच जाहिर करते हैं", "पितृसत्ता को पूरी तरह खत्म करो", "घास को छुओ, महिलाओं को नहीं", और "औरतें क्यों हैं पर्दों में?"।
प्रदर्शनकारी छात्राओं ने प्रशासन से यह भी माँग की कि सभी कॉलेजों के भीतर 'पिंक हेल्प डेस्क' की स्थापना की जाए, परिसरों के बाहर बेहतर सीसीटीवी कवरेज सुनिश्चित हो और असामाजिक तत्वों पर नकेल कसने के लिए नियमित पुलिस गश्त बढ़ाई जाए।

