LPG से बैंकिंग तक बदले नियम, आज से आपकी जेब पर पड़ेगा असर

मुंबई। आज 1 अक्टूबर से कई महत्वपूर्ण नियमों और दरों में बदलाव होने की संभावना है, जिसका सीधा असर आम लोगों के घरेलू बजट और रोजमर्रा के खर्च पर पड़ सकता है। एलपीजी सिलेंडर और विमान ईंधन की कीमतों से लेकर एटीएम शुल्क, इलेक्ट्रॉनिक सामान की कीमतों और फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) से जुड़े नियमों में कई बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में बदलाव

तेल कंपनियां हर महीने की पहली तारीख को एलपीजी सिलेंडर की कीमतों की समीक्षा करती हैं। ऐसे में 1 अक्टूबर को घरेलू और व्यावसायिक एलपीजी सिलेंडर के नए दाम जारी होने की संभावना है। इसके अलावा, एलपीजी ग्राहकों के लिए ई-केवाईसी और बायोमेट्रिक सत्यापन भी महत्वपूर्ण है, जिसे पूरा न करने पर सब्सिडी से जुड़ी दिक्कतें आ सकती हैं। कुछ क्षेत्रों में सिलेंडर डिलीवरी के लिए ओटीपी आधारित सत्यापन की व्यवस्था भी लागू हो सकती है।

विमान यात्रा और एटीएफ की कीमतें

एलपीजी के साथ तेल कंपनियां हर महीने की पहली तारीख को एविएशन टर्बाइन फ्यूल (एटीएफ) की कीमतों की भी समीक्षा करती हैं। एटीएफ की कीमत घटने या बढ़ने से विमान कंपनियों की परिचालन लागत प्रभावित होती है, जिसका सीधा असर आगे चलकर हवाई टिकटों की कीमतों पर भी पड़ सकता है।

एसबीआई ग्राहकों के एटीएम शुल्क में संशोधन

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) के कुछ ग्राहकों के लिए एटीएम से नकद निकासी के शुल्क में बदलाव की संभावना है। बेसिक सेविंग्स बैंक डिपॉजिट (बीएसबीडी) खातों में मुफ्त सीमा पार होने के बाद प्रत्येक एटीएम लेनदेन पर 15 रुपये और जीएसटी का शुल्क लग सकता है। वहीं, कुछ सैलरी अकाउंट ग्राहकों के लिए मुफ्त सीमा समाप्त होने के बाद वित्तीय लेनदेन पर 23 रुपये और जीएसटी, तथा गैर-वित्तीय लेनदेन पर 11 रुपये और जीएसटी का शुल्क लागू हो सकता है।

इलेक्ट्रॉनिक सामानों के महंगे होने के आसार

त्योहारी सीजन में टीवी, फ्रिज, एसी या अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामान खरीदने की योजना बना रहे लोगों के लिए कीमतें बढ़ सकती हैं। तांबा, स्टील, एल्युमिनियम और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के कारण विनिर्माण और परिवहन लागत बढ़ने से कुछ इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों की कीमतों में करीब 8 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है।

फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) के नियमों में पारदर्शिता

फिक्स्ड डिपॉजिट कराने वाले ग्राहकों के लिए भी अक्टूबर से कुछ बदलाव अहम हैं। बैंकों द्वारा एफडी पर लागू ब्याज दरों की जानकारी अधिक पारदर्शी तरीके से उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है, जिससे ग्राहकों को वेबसाइट पर स्पष्ट और सटीक जानकारी मिल सके। साथ ही, बड़ी रकम की जमाओं और समान प्रकार की जमाओं पर लागू दरों से जुड़े प्रावधानों में भी बदलाव संभव हैं।

 

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