आधार के काम में मिलेगी सुविधा, पांच नई पहल लागू करने की तैयारी

नई दिल्ली। देश में डिजिटल गवर्नेंस को और अधिक पारदर्शी तथा सुगम बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए आधार कार्ड को नए हाईटेक सिस्टम से जोड़ा जा रहा है। भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) ने देशवासियों के लिए सेवाओं को आसान बनाने के उद्देश्य से पांच नई पहलों की घोषणा की है, जिससे सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में क्रांतिकारी बदलाव देखने को मिलेगा।

ईपीडीएस के लिए फेस रिकग्निशन सिस्टम

UIDAI द्वारा शुरू की गई इन नई पहलों में सबसे अहम इलेक्ट्रॉनिक पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम (ePDS) के लिए फेस ऑथेंटिकेशन सिस्टम है। इसके तहत मुफ्त या रियायती राशन वितरण में होने वाली गड़बड़ियों और धांधली पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकेगा। जिन मामलों में उंगलियों के निशान (बायोमेट्रिक) या आईरिस स्कैनिंग में तकनीकी दिक्कतें आती हैं, वहां यह फेस रिकग्निशन तकनीक प्रमाणीकरण को बेहद आसान और सटीक बनाएगी। देश के सभी राज्य और केंद्र शासित प्रदेश इस आधुनिक सुविधा को अपने वितरण तंत्र में इंटीग्रेट कर सकेंगे।

एसडब्ल्यूआईके पोर्टल 2.0 और नया टोकन सिस्टम

आधार प्रमाणीकरण की अनुमति मांगने वाली संस्थाओं की प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए नया 'एसडब्ल्यूआईके पोर्टल 2.0' लॉन्च किया गया है, जिससे विभिन्न सरकारी योजनाओं में सत्यापन का काम सुगम हो गया है। इसके अलावा, आधार सेवा केंद्रों और क्षेत्रीय कार्यालयों में आने वाले नागरिकों की भीड़ को प्रबंधित करने और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए एक नया 'टोकन मैनेजमेंट सिस्टम' भी लागू किया गया है।

नया फ्रेमवर्क और सुलभ वेबसाइट-ऐप

सरकारी और योग्य गैर-सरकारी संस्थानों के बीच आधार आधारित संचार को बेहतर बनाने के लिए एक नया फ्रेमवर्क लाया गया है, जिससे निजी सेक्टर में भी इसके उपयोग का दायरा बढ़ेगा। इसके साथ ही, आम जनता की सुविधा के लिए आधार की आधिकारिक वेबसाइट और मोबाइल ऐप को पूरी तरह से रिडिजाइन किया गया है। नए फीचर्स में स्क्रीन-रीडर कम्पैटिबिलिटी, एडजस्टेबल फॉन्ट साइज और कीबोर्ड नेविगेशन शामिल हैं, जिससे दिव्यांगजनों को भी डिजिटल सेवाओं का लाभ उठाने में आसानी होगी।

23 भाषाओं में सेवाओं का विस्तार

आम नागरिकों तक पहुंच को और व्यापक बनाने के लिए प्राधिकरण अब आधार सेवाओं को देश की 23 आधिकारिक भाषाओं में जोड़ने पर तेजी से काम कर रहा है। इस पहल से देश के हर कोने के लोग अपनी स्थानीय भाषा में आधार से जुड़ी जानकारी और संवाद का लाभ आसानी से उठा सकेंगे।

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