Uttarakhand Tourism देहरादून: उत्तराखंड में पर्यटन को सालभर बढ़ावा देने, स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने और राज्य के प्रमुख पर्यटन स्थलों को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में कई पहल की जा रही हैं. विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में प्रदेश में पर्यटन क्षेत्र का विस्तार हो रहा है। होम स्टे, साहसिक पर्यटन और डिजिटल तकनीक के जरिए उत्तराखंड को देश-दुनिया के पर्यटकों के लिए आकर्षक गंतव्य बनाने पर जोर दिया जा रहा है।
पर्यटन मंत्री ने बताया कि प्रदेश में 6,000 से अधिक पंजीकृत होम स्टे संचालित हो रहे हैं। वहीं, राज्य के 100 प्रमुख ट्रेकिंग और हाइकिंग मार्गों की GPS और GIS तकनीक से मैपिंग की जा रही है। इससे ट्रेकिंग मार्गों की सटीक जानकारी उपलब्ध कराने, यात्रियों की सुरक्षा बढ़ाने और उत्तराखंड के ट्रेकिंग स्थलों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
Uttarakhand Tourism : विश्व पर्यटन दिवस 2026 की थीम पर उत्तराखंड का फोकस
विश्व पर्यटन दिवस 2026 रविवार, 27 सितंबर को मनाया जा रहा है। इस वर्ष इसकी थीम ‘डिजिटल एजेंडा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से पर्यटन को नया रूप देना’ (Digital Agenda and Artificial Intelligence to Redesign Tourism) है। संयुक्त राष्ट्र ने इस थीम के जरिए पर्यटन क्षेत्र में डिजिटल तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की बढ़ती भूमिका को रेखांकित किया है।
पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज के मुताबिक, उत्तराखंड में भी पर्यटन को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की दिशा में काम किया जा रहा है। डिजिटल मैपिंग, ट्रेकिंग नेविगेशन ऐप और पर्यटन स्थलों की बेहतर जानकारी उपलब्ध कराने जैसी पहल से यात्रियों को सुविधाजनक अनुभव देने का प्रयास है।
6,000 से अधिक होम स्टे से स्थानीय लोगों को रोजगार
सतपाल महाराज ने कहा कि उत्तराखंड में होम स्टे योजना स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। प्रदेश में 6,000 से अधिक पंजीकृत होम स्टे संचालित हैं। इनके माध्यम से पर्यटकों को स्थानीय संस्कृति, खानपान और रहन-सहन को करीब से जानने का अवसर मिलता है।
होम स्टे के बढ़ते नेटवर्क से ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार के अवसर भी पैदा हो रहे हैं। इससे स्थानीय परिवार पर्यटन गतिविधियों से सीधे जुड़ सकते हैं और उनकी आमदनी के नए रास्ते खुल सकते हैं। खासकर पहाड़ी और दूरस्थ इलाकों में होम स्टे पर्यटन को स्थानीय आजीविका से जोड़ने का माध्यम बन रहे हैं।
100 ट्रेकिंग रूट्स की GPS-GIS मैपिंग, बनेगा मोबाइल ऐप
उत्तराखंड के पर्यटन मंत्री ने बताया कि हाल ही में राज्य के 100 प्रमुख ट्रेकिंग और हाइकिंग मार्गों की GPS एवं GIS मैपिंग के लिए सर्वेक्षण दलों को रवाना किया गया। इस अभियान में गढ़वाल के 50 और कुमाऊं के 50 मार्ग शामिल हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 18 सितंबर को इस अभियान को हरी झंडी दिखाई थी।
मैपिंग का काम पूरा होने के बाद इन मार्गों की जानकारी के आधार पर एक मोबाइल ट्रेकिंग नेविगेशन ऐप तैयार किया जाएगा। इसके साथ ही ‘द ट्रेक्स ऑफ उत्तराखण्ड’ नाम से कॉफी टेबल बुक भी प्रकाशित करने की योजना है।
इस पहल का उद्देश्य ट्रेकिंग मार्गों की सटीक डिजिटल जानकारी उपलब्ध कराना है। इससे पर्यटकों को रास्तों की पहचान करने और अपनी यात्रा की बेहतर योजना बनाने में मदद मिलेगी। साथ ही, उत्तराखंड के ट्रेकिंग स्थलों को देश-विदेश के साहसिक पर्यटन प्रेमियों तक पहुंचाने में भी सहायता मिल सकती है।
आदि कैलाश परिक्रमा 2.0 से सीमांत क्षेत्रों को मिलेगा बढ़ावा
पर्यटन मंत्री ने कहा कि साहसिक पर्यटन उत्तराखंड की प्रमुख पहचान बन रहा है। उच्च हिमालयी क्षेत्रों में आयोजित होने वाले विभिन्न कार्यक्रमों से सीमांत गांवों को पर्यटन के नए नक्शे पर लाने का प्रयास किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि 24 से 26 अक्टूबर 2026 तक आयोजित होने वाली आदि कैलाश परिक्रमा 2.0 से आदि कैलाश और ॐ पर्वत क्षेत्र को नई पहचान मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा आदि कैलाश परिक्रमा रन और नीति वैली अल्ट्रा जैसे आयोजनों ने भी उच्च हिमालयी क्षेत्रों में साहसिक पर्यटन की संभावनाओं को सामने रखा है।
महाराज के अनुसार, ऐसे आयोजनों का लाभ स्थानीय समुदायों तक पहुंच सकता है। पर्यटकों की आवाजाही बढ़ने से होम स्टे, स्थानीय उत्पादों, परिवहन और अन्य पर्यटन सेवाओं से जुड़े लोगों को आर्थिक अवसर मिलते हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि नवंबर 2026 में प्रस्तावित हिमालयन कार रैली के जरिए इस दिशा में प्रयासों को आगे बढ़ाया जाएगा।
शीतकालीन पर्यटन से सालभर पर्यटकों को आकर्षित करने की तैयारी
उत्तराखंड को केवल चारधाम यात्रा के पारंपरिक मौसम तक सीमित न रखते हुए बारहमासी पर्यटन गंतव्य के रूप में विकसित करने पर भी जोर दिया जा रहा है। पर्यटन मंत्री ने कहा कि शीतकालीन चारधाम यात्रा, स्नो ट्रेकिंग, एस्ट्रो टूरिज्म और वन्यजीव पर्यटन जैसी गतिविधियां अलग-अलग मौसम में पर्यटकों को आकर्षित करने की क्षमता रखती हैं।
शीतकालीन पर्यटन को बढ़ावा मिलने से उन क्षेत्रों में भी पर्यटन गतिविधियां जारी रह सकती हैं, जहां सामान्यतः यात्रा का मुख्य सीजन सीमित रहता है। इससे स्थानीय कारोबार और रोजगार को पूरे साल सहारा देने की संभावना है।
हालांकि, हिमालयी क्षेत्रों में पर्यटन के विस्तार के साथ पर्यावरण संरक्षण, यात्रियों की सुरक्षा और स्थानीय संसाधनों पर पड़ने वाले दबाव का ध्यान रखना भी जरूरी होगा।
भारत पर्व और लंदन के वर्ल्ड ट्रैवल मार्केट में दिखेगी देवभूमि
सतपाल महाराज ने बताया कि उत्तराखंड की पर्यटन संभावनाओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर प्रदर्शित करने की तैयारी है। नवंबर में एकता नगर में आयोजित होने वाले भारत पर्व और लंदन में होने वाले वर्ल्ड ट्रैवल मार्केट के माध्यम से राज्य के पर्यटन स्थलों, संस्कृति और आध्यात्मिक विरासत को सामने रखा जाएगा।
इन मंचों के जरिए उत्तराखंड के पर्यटन उत्पादों और गंतव्यों को व्यापक पहचान दिलाने का प्रयास किया जाएगा। अंतरराष्ट्रीय पर्यटन बाजार में राज्य की मौजूदगी बढ़ने से विदेशी पर्यटकों और पर्यटन कारोबार से जुड़े भागीदारों तक पहुंच बनाने के अवसर मिल सकते हैं।
‘भारत की आध्यात्मिक राजधानी’ बनाने का रोडमैप
पर्यटन मंत्री ने कहा कि उत्तराखंड को ‘भारत की आध्यात्मिक राजधानी’ के रूप में स्थापित करने के लिए सरकार ने धार्मिक और आध्यात्मिक पर्यटन सर्किट विकसित करने का रोडमैप तैयार किया है।
इसमें शाक्त, शैव और वैष्णव सर्किट के साथ विवेकानंद, नरसिंह, गोल्ज्यू, गुरुद्वारा, नवग्रह, नागराजा, हनुमान और महासू देवता सर्किट शामिल हैं।
इन सर्किटों के माध्यम से प्रदेश के विभिन्न धार्मिक स्थलों को एक व्यापक पर्यटन नेटवर्क से जोड़ने की योजना है। इससे श्रद्धालुओं को अपनी यात्रा की योजना बनाने में सुविधा मिल सकती है और कम चर्चित धार्मिक स्थलों को भी पहचान मिलने का अवसर मिलेगा।
पर्यटन विकास के साथ स्थानीय हितों पर भी जोर
उत्तराखंड में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए होम स्टे, डिजिटल मैपिंग, साहसिक गतिविधियों, शीतकालीन पर्यटन और आध्यात्मिक सर्किटों पर एक साथ काम किया जा रहा है। सरकार की इन पहलों का उद्देश्य पर्यटन को राज्य की अर्थव्यवस्था और स्थानीय रोजगार से जोड़ना है।
विश्व पर्यटन दिवस 2026 की डिजिटल थीम के अनुरूप तकनीक का इस्तेमाल पर्यटन स्थलों की जानकारी, नेविगेशन और यात्रियों की सुविधा बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभा सकता है। अब इन योजनाओं का वास्तविक लाभ इस बात पर निर्भर करेगा कि डिजिटल सुविधाएं कितनी प्रभावी ढंग से लागू होती हैं और पर्यटन से होने वाले आर्थिक लाभ स्थानीय समुदायों तक किस हद तक पहुंचते हैं।

