Char Dham Yatra 2026:उत्तराखंड की चारधाम यात्रा को स्वच्छ और पर्यावरण अनुकूल बनाने के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में विशेष अभियान चलाया जा रहा है. केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री धाम में सफाई व्यवस्था को मजबूत करने के साथ प्लास्टिक कचरे के सुरक्षित निस्तारण और रिसाइक्लिंग पर जोर दिया जा रहा है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, मौजूदा यात्रा सीजन में अब तक चारों धामों और संबंधित यात्रा मार्गों पर करीब 798 टन कचरा एकत्र किया जा चुका है.
इस अभियान में नगर पंचायतों, जिला पंचायत, सफाई एजेंसियों और स्थानीय प्रशासन की भूमिका अहम है. वहीं, मुख्यमंत्री धामी ने श्रद्धालुओं, स्थानीय लोगों और व्यापारियों से भी चारधाम की स्वच्छता बनाए रखने में सहयोग की अपील की है.
Char Dham Yatra 2026:चारधाम में सफाई अभियान तेज, प्लास्टिक कचरे पर विशेष फोकस
चारधाम यात्रा के दौरान हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु उत्तराखंड पहुंचते हैं. यात्रियों की बढ़ती आवाजाही के साथ धामों और पैदल मार्गों पर प्लास्टिक की बोतलों, खाद्य पदार्थों की पैकेजिंग और अन्य ठोस कचरे के प्रबंधन की चुनौती भी बढ़ जाती है.
इसे देखते हुए राज्य सरकार की ओर से सफाई अभियान को व्यवस्थित करने और कचरे को वैज्ञानिक तरीके से निस्तारित करने पर जोर दिया जा रहा है. चारों धामों में स्थानीय निकायों की ओर से कचरा एकत्र करने, उसे अलग-अलग श्रेणियों में बांटने और रिसाइक्लिंग योग्य प्लास्टिक को अलग करने का काम किया जा रहा है.
सरकार का उद्देश्य केवल कचरा उठाना नहीं, बल्कि उसका उचित निस्तारण सुनिश्चित करना और हिमालयी क्षेत्रों में प्लास्टिक प्रदूषण को कम करना भी है.
केदारनाथ: 32 टन कचरा जमा, पैदल मार्ग से भी 270 टन वेस्ट एकत्र
केदारनाथ धाम नगर पंचायत क्षेत्र में इस यात्रा सीजन के दौरान अब तक 32 टन ठोस कचरा एकत्र किया गया है. इसमें करीब 20 टन प्लास्टिक कचरा शामिल है.
कचरे के प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए शहरी विकास विभाग की ओर से धाम में एक अतिरिक्त कॉम्पेक्टर मशीन लगाई गई है. यहां एकत्र ठोस कचरे को गौरीकुंड पहुंचाया जा रहा है, जहां से इसे नीलामी के जरिए निस्तारित करने की व्यवस्था है.
केदारनाथ के पैदल यात्रा मार्ग पर सफाई का जिम्मा सुलभ इंटरनेशनल के पास है। संस्था के मुताबिक, इस यात्रा सीजन में अब तक 270 टन ठोस कचरा एकत्र किया गया है। इसमें से करीब 6.5 टन प्लास्टिक कचरे को रिसाइक्लिंग के लिए भेजा जा चुका है।
इस तरह केदारनाथ धाम के साथ पैदल मार्ग पर भी कचरा प्रबंधन के प्रयास किए जा रहे हैं.
बद्रीनाथ: 393 टन कचरा एकत्र, 24 टन प्लास्टिक अलग किया
बद्रीनाथ धाम में इस यात्रा सीजन के दौरान अब तक 393 टन कचरा एकत्र किया जा चुका है. इसमें करीब 161 टन सूखा कचरा शामिल है.
बद्रीनाथ नगर पंचायत धाम में ही ठोस कचरे को कॉम्पेक्ट कर रही है. इस प्रक्रिया के दौरान अब तक लगभग 24 टन प्लास्टिक कचरा अलग किया गया है. इसमें पानी की बोतलों से निकलने वाला प्लास्टिक सबसे अधिक है.
एकत्र प्लास्टिक कचरे को नीलामी के लिए तैयार किया जा रहा है. इससे रिसाइक्लिंग योग्य सामग्री का दोबारा इस्तेमाल संभव होगा और खुले में प्लास्टिक फेंके जाने की समस्या को कम करने में मदद मिल सकती है.
गंगोत्री: प्लास्टिक रिसाइक्लिंग से ₹55 हजार की आय
गंगोत्री धाम में यात्रा अवधि के दौरान अब तक 98 टन कचरा एकत्र किया गया है. इसमें से 22 टन प्लास्टिक कचरे को रिसाइकिल कर नगर पंचायत ने करीब 55 हजार रुपये की आय अर्जित की है.
यहां कचरे के प्रबंधन के साथ जैविक अपशिष्ट के उपयोग पर भी ध्यान दिया जा रहा है. नगर पंचायत के अनुसार, कचरे से करीब ढाई टन खाद तैयार की गई है.
गंगोत्री धाम क्षेत्र में स्वच्छता बनाए रखने के लिए हर दिन विशेष सफाई अभियान चलाया जा रहा है. प्लास्टिक कचरे की रिसाइक्लिंग और जैविक कचरे से खाद बनाने की प्रक्रिया से कचरे के उपयोगी प्रबंधन को बढ़ावा मिल रहा है.
यमुनोत्री: जानकीचट्टी से डामटा तक प्लास्टिक कचरे का निस्तारण
यमुनोत्री धाम यात्रा क्षेत्र में अब तक 4.85 टन प्लास्टिक कचरा एकत्र कर उसका सुरक्षित निस्तारण किया गया है. यहां सफाई व्यवस्था की जिम्मेदारी जिला पंचायत के पास है.
उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, जानकीचट्टी बाजार से ग्रामीण बाजार डामटा तक के क्षेत्र से 1,790 किलोग्राम प्लास्टिक कचरा एकत्र किया गया. वहीं, जानकीचट्टी से खरसाली बाजार क्षेत्र तक 3,060 किलोग्राम प्लास्टिक कचरा जुटाया गया.
इस तरह यात्रा मार्ग के बाजारों और आसपास के क्षेत्रों में भी सफाई अभियान चलाया जा रहा है, ताकि श्रद्धालुओं की आवाजाही के दौरान जमा होने वाले प्लास्टिक कचरे का उचित निस्तारण हो सके.
सीएम धामी बोले- चारधाम की स्वच्छता में सभी की भागीदारी जरूरी
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि चारधाम केवल आस्था और संस्कृति के केंद्र नहीं हैं, बल्कि हिमालय की संवेदनशील पारिस्थितिकी का भी महत्वपूर्ण हिस्सा हैं. इसलिए चारधाम यात्रा को स्वच्छ, सुगम और पर्यावरण के अनुकूल बनाना सरकार की प्राथमिकता है.
मुख्यमंत्री ने कहा कि चारों धामों को प्लास्टिक मुक्त बनाने के लिए कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण और प्लास्टिक की रिसाइक्लिंग पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है. उन्होंने इस अभियान की सफलता के लिए श्रद्धालुओं, स्थानीय निवासियों और व्यापारियों की सहभागिता को भी जरूरी बताया.
सरकार की ओर से लोगों से अपील की जा रही है कि वे यात्रा के दौरान प्लास्टिक और अन्य कचरा निर्धारित स्थानों पर ही डालें और धामों की स्वच्छता बनाए रखने में सहयोग करें.
हिमालयी पर्यावरण के लिए क्यों अहम है यह अभियान?
चारधाम यात्रा के प्रमुख पड़ाव ऊंचाई वाले हिमालयी क्षेत्रों में स्थित हैं. इन इलाकों में प्लास्टिक कचरे का लंबे समय तक बने रहना स्थानीय पर्यावरण, जल स्रोतों और प्राकृतिक पारिस्थितिकी के लिए चुनौती बन सकता है.
ऐसे में कचरे को स्रोत पर अलग करना, प्लास्टिक को रिसाइक्लिंग के लिए भेजना और जैविक कचरे से खाद तैयार करना महत्वपूर्ण कदम हैं. हालांकि, चारधाम को पूरी तरह प्लास्टिक मुक्त बनाने के लिए नियमित सफाई के साथ कचरे के उत्पादन को कम करना और श्रद्धालुओं की भागीदारी बढ़ाना भी जरूरी होगा.
यात्रा सीजन में अब तक एकत्र किए गए करीब 798 टन कचरे का आंकड़ा सफाई अभियान के बड़े स्तर को दर्शाता है. अब इस अभियान की सफलता इस बात से भी आंकी जाएगी कि एकत्र कचरे का कितना हिस्सा सुरक्षित तरीके से निस्तारित या रिसाइकिल किया जाता है और धामों में प्लास्टिक कचरे को दोबारा जमा होने से किस हद तक रोका जा पाता है.

