‘7 दिन में खोल देंगे होर्मुज…’: ईरान ने युद्ध रोकने के लिए अमेरिका के सामने रखा नया प्रस्ताव, दी सख्त चेतावनी

Strait of Hormuz नई दिल्ली/तेहरान: मिडिल ईस्ट में जारी भारी तनाव के बीच ईरान और अमेरिका के बीच बैक-चैनल कूटनीति तेज हो गई है. संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के मंच पर ईरान ने कतर के जरिए वाशिंगटन को एक ठोस प्रस्ताव भेजा है। इस प्रस्ताव में महज सात दिनों के भीतर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) को दोबारा खोलने और युद्ध रोकने की बात कही गई है। हालांकि, इस शांति प्रस्ताव के बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने अमेरिका को स्पष्ट कर दिया है कि तेहरान किसी भी दबाव के आगे झुकने वाला नहीं है।

Strait of Hormuz:‘फैसला अब अमेरिका के पाले में’- ईरानी विदेश मंत्री अराघची

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि तेहरान ने कतर के जरिए सात दिनों का एक स्पष्ट और ठोस प्लान अमेरिका को सौंपा है.

“अगर जरूरी शर्तें पूरी होती हैं, तो सात दिनों के अंदर होर्मुज स्ट्रेट को जहाजों की सामान्य आवाजाही के लिए बहाल किया जा सकता है। अगर अमेरिकी पक्ष वास्तव में समझौता करने को लेकर गंभीर है, तो हमारी तरफ से सब तैयार है। अब अंतिम फैसला वाशिंगटन को करना है। ईरान धमकियों या दबाव में आकर अपने संप्रभु अधिकारों से समझौता नहीं करेगा।” — अब्बास अराघची, विदेश मंत्री (ईरान)

ईरान ने यह संकेत भी दिया है कि अगर अमेरिका उसकी शर्तें मान लेता है, तो नाकेबंदी हटाने के साथ-साथ अपने परमाणु कार्यक्रम पर भी बातचीत सात दिनों के भीतर दोबारा शुरू की जा सकती है. इसके बदले ईरान को अमेरिका द्वारा जब्त (फ्रोजन) किए गए अपने फंड वापस मिलने की उम्मीद है.

डोनाल्ड ट्रंप ने खारिज किया प्रस्ताव, रॉयटर्स का चरणबद्ध योजना का दावा

खबरों के मुताबिक, इस प्रस्ताव को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं.’वॉल स्ट्रीट जर्नल’ की रिपोर्ट के अनुसार, पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस समझौते को सिरे से खारिज कर दिया है.

दूसरी ओर, समाचार एजेंसी ‘रॉयटर्स’ ने दावा किया है कि दोनों देशों के अधिकारी पर्दे के पीछे एक ‘चरणबद्ध योजना’ (Phased Plan) पर विचार-विमर्श कर रहे हैं,ताकि अंतरराष्ट्रीय जहाजों की सुरक्षित आवाजाही शुरू कराई जा सके और अमेरिकी नाकेबंदी को धीरे-धीरे खत्म किया जा सके.

राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने खींची ‘लक्ष्मण रेखा’

अल जजीरा को दिए एक इंटरव्यू में ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने अमेरिका के साथ भविष्य के संबंधों को लेकर अपना रुख बेहद कड़ा रखा। उन्होंने कहा:

  • भरोसे का संकट: लगातार अमेरिकी हमलों और प्रतिबंधों के चलते अब ईरान का अमेरिका पर से भरोसा पूरी तरह उठ चुका है।

  • मध्यस्थों की भूमिका: कतर और पाकिस्तान इस समय दोनों देशों के बीच मध्यस्थता कर रहे हैं और तेहरान का संदेश वाशिंगटन तक पहुंचा रहे हैं। यह वार्ता पहले से हस्ताक्षरित एक ज्ञापन (MoU) पर आधारित है।

  • प्रतिबंध बेअसर: जिन्होंने प्रतिबंधों के जरिए ईरानी जनता को दबाने का भ्रम पाला था, उनका आकलन पूरी तरह गलत साबित हुआ है।

पेजेशकियान ने जोर देकर कहा कि अमेरिका और इजरायल द्वारा खड़ी की जा रही तमाम रुकावटों के बावजूद ईरान आत्मनिर्भर बनने और अपनी जनता के सशक्तिकरण के रास्ते पर आगे बढ़ता रहेगा।

क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरण और सऊदी-पाकिस्तान की हलचल

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास हालात काफी पेचीदा बने हुए हैं. हूती विद्रोहियों द्वारा लाल सागर और आसपास के समुद्री मार्गों पर किए जा रहे हमलों से निपटने के लिए सऊदी अरब, तुर्किए और पाकिस्तान के बीच आपातकालीन सैन्य स्तर पर बातचीत चल रही है.

इन सबके बीच, ईरान खुद को हूती विद्रोहियों की कार्रवाइयों से अलग दिखाने की रणनीति पर काम कर रहा है. साथ ही, समुद्री व्यापार मार्ग को सुरक्षित करने और होर्मुज संकट को सुलझाने के लिए तेहरान सीधे रियाद (सऊदी अरब) के साथ भी कूटनीतिक संपर्क में बना हुआ है.

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