काठमांडू | नेपाल में महाविनाश लाने वाला सैलाब लगभग 188 किलोमीटर प्रति घंटे की भयानक रफ्तार से आया था। नेपाल के समयानुसार सुबह 8:37 बजे लेन्दे नदी के स्रोत के ऊपरी हिस्से में भारी बर्फ, चट्टानों और मलबे के साथ भीषण भूस्खलन हुआ था। इसके ठीक करीब सात मिनट बाद ही यह सैलाब केरुंग जा पहुंचा, जबकि स्रोत से केरुंग की कुल दूरी लगभग 22 किलोमीटर मानी गई है।
बुलेट ट्रेन जैसी रफ्तार और हिरोशिमा बम से तुलना
पहाड़ों से सुनामी की तरह उतरे इस सैलाब ने महज सात मिनट में 22 किलोमीटर की दूरी तय कर ली थी, जिसके कारण इसकी गति की तुलना सीधे बुलेट ट्रेन से की जा रही है। जाने-माने जलवायु विशेषज्ञ डॉ. उत्तम बाबू श्रेष्ठ ने सोशल मीडिया पर अपने विश्लेषण के जरिए यह चौंकाने वाला दावा किया है। उन्होंने भूस्खलन के आकार और मलबे के नीचे गिरने की दूरी को आधार बनाते हुए इसकी गुरुत्वाकर्षण स्थितिज ऊर्जा का अनुमान करीब 51 किलोटन के बराबर लगाया है।
इसी आधार पर कुछ विशेषज्ञों द्वारा इसकी तुलना हिरोशिमा पर गिराए गए परमाणु बम की विभीषिका से की जा रही है। चीनी शोधकर्ताओं की एक अध्ययन रिपोर्ट के अनुसार, नेपाल के लांगटांग लिरुंग पर्वत के पास करीब 5,200 मीटर की ऊंचाई से बुधवार सुबह एक बहुत बड़ा हिमखंड खाई में आ गिरा था, जो अपने साथ भारी मात्रा में मिट्टी और चट्टानें बहाकर ले गया। वैज्ञानिकों के मुताबिक, लगभग 1,800 मीटर की ऊंचाई पर स्थित सीमा क्षेत्र तक पहुंचते-पहुंचते इस बाढ़ की गति करीब 50 मीटर प्रति सेकंड हो गई थी।
तबाही के बीच जिंदगी को दोबारा पटरी पर लाने की कोशिश
इस विनाशकारी बाढ़ ने कई हरे-भरे इलाकों को पूरी तरह वीरान बना दिया है। पहले जहाँ सब कुछ आबाद था, वहाँ अब सिर्फ तबाही और मलबे की निशानियां बची हैं। बागमती प्रांत के धाडिंग जिले का गलछी क्षेत्र भी इनमें से एक है, जहाँ के लोग जान बचाने के लिए सुरक्षित स्थानों पर चले गए थे। अब जब वे धीरे-धीरे अपने घरों की ओर लौट रहे हैं, तो बचे-खुचे सामान के सहारे जिंदगी को फिर से संवारने में जुटे हैं। घरों के भीतर से कीचड़ और रेत निकाली जा रही है। इस मुश्किल वक्त में कक्षा 11 के छात्र नयन तिवारी और उनकी चचेरी बहन निवी तिवारी ने हौसला दिखाते हुए कहा है कि वे कड़ी मेहनत करेंगे और अपने आशियानों को फिर से पहले जैसा बनाएंगे।
बैरियर झील खाली और लापता नागरिकों के आंकड़े
चीन की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, ग्लेशियर टूटने के बाद ग्यिरोंग क्षेत्र में बनी बैरियर झील अब खाली हो चुकी है, जिससे किसी बड़े और आसन्न सैलाब का खतरा फिलहाल टल गया है। हालांकि, नेपाल की छोछेन खोला नदी में अभी भी लगभग 14 लाख घन मीटर पानी जमा हुआ है।
दूसरी ओर, चीन ने आधिकारिक रूप से पहली बार यह जानकारी साझा की है कि तिब्बत क्षेत्र में भारत-नेपाल सीमा के पास स्थित ग्यिरोंग पोर्ट पर आए इस बाढ़ और भूस्खलन के दौरान 23 देशों के कुल 261 विदेशी नागरिक लापता हुए हैं। इनमें 104 नेपाली, 49 भारतीय, 33 लातवियाई, 18 अमेरिकी और 15 ब्रिटिश नागरिक शामिल हैं।
डीआरडीओ के पूर्व प्रमुख सुरक्षित स्वदेश लौटे
इस पूरी प्राकृतिक आपदा के बीच एक राहत भरी खबर यह है कि रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के पूर्व प्रमुख डॉ. जी. सतीश रेड्डी और उनके साथ कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर गया 31 सदस्यीय दल पूरी तरह सुरक्षित बच गया है। नेपाल में यह भयंकर आपदा आने से ठीक पहले ही उनका यह दल प्रभावित इलाके को पार कर चुका था, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया।

