शिलांग: मेघालय में वर्ष 2026 की शुरुआती तिमाही में एचआईवी संक्रमण के 574 नए मामले दर्ज किए गए हैं, जिनमें 16 गर्भवती महिलाएं भी शामिल हैं। राज्य में लगातार बढ़ रहे इन मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग और मेघालय एड्स कंट्रोल सोसाइटी (MACS) ने स्थिति पर चिंता जताते हुए जांच, उपचार और रोकथाम के प्रयासों को गति दे दी है।
संक्रमण के मुख्य कारण और आंकड़े
मेघालय एड्स कंट्रोल सोसाइटी द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, राज्य में एचआईवी फैलने के प्रमुख कारणों का विवरण इस प्रकार है:
आकस्मिक यौन संबंध: कुल मामलों में सबसे अधिक लगभग 52 प्रतिशत संक्रमण आकस्मिक यौन संपर्क के कारण हुए हैं।
नियमित पार्टनर/पति-पत्नी: लगभग 32 प्रतिशत मामले अपने जीवनसाथी या नियमित पार्टनर के जरिए फैले हैं।
संक्रमित सुई का उपयोग: नशीली दवाओं के इंजेक्शन के दौरान दूषित सुई/सीरिंज साझा करने से 9 प्रतिशत मामले सामने आए हैं।
अन्य कारण: व्यावसायिक यौन संबंध से 4 प्रतिशत तथा मां से बच्चे में संक्रमण (एमटीसीटी) के लगभग 2.5 प्रतिशत मामले दर्ज किए गए हैं।
'स्टेटवाइड इंटेंसिफाइड आईईसी कैंपेन 3.0' की शुरुआत
अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस पर शिलांग के लेडी कीन कॉलेज से 'स्टेटवाइड इंटेंसिफाइड आईईसी कैंपेन 3.0' की शुरुआत की गई। कार्यक्रम में पहुंचे स्वास्थ्य मंत्री वाइलाडमिकि शायला ने कहा कि एचआईवी के खिलाफ लड़ाई में केवल सरकारी तंत्र ही नहीं, बल्कि शिक्षण संस्थानों, युवाओं और समाज के सभी वर्गों की सक्रिय भूमिका आवश्यक है। इस अभियान के तहत 126 गांवों, 3,000 स्कूलों, 85 कॉलेजों और 15 हजार से अधिक घरों तक पहुंचकर सीधे जन-जागरूकता फैलाने का लक्ष्य रखा गया है।
सामाजिक भेदभाव और पांच वर्षीय नीति पर जोर
मेघालय एड्स कंट्रोल सोसाइटी के परियोजना निदेशक डॉ. के.एल. इआबोर ने स्पष्ट किया कि समाज में व्याप्त भ्रांतियां और भेदभाव आज भी शुरुआती जांच में सबसे बड़ी बाधा हैं। वहीं, स्वास्थ्य मंत्री ने जानकारी दी कि राज्य सरकार ने एचआईवी/एड्स से निपटने के लिए एक विस्तृत पांच वर्षीय योजना को स्वीकृति दे दी है। इसके तहत सुरक्षित व्यवहार, गर्भवती माताओं की जांच, संक्रमित रक्त से बचाव और सुई के सुरक्षित उपयोग को लेकर बड़े पैमाने पर लोगों को जागरूक किया जाएगा।

