सेंसेक्स 200 अंक फिसला, निफ्टी 24,350 के नीचे; बाजार में दबाव

Share Market Today मुंबई: पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल के ऊंचे दामों और दिग्गज कंपनियों के शेयरों में बिकवाली के दबाव के चलते भारतीय शेयर बाजार में कमजोरी का सिलसिला लगातार बना हुआ है। निफ्टी के 24,500 के अहम प्रतिरोध स्तर के आसपास अटकने से निवेशकों की धड़कनें तेज हो गई हैं, जिससे बाजार की चाल को लेकर अनिश्चितता गहरी होती जा रही है।

Share Market Today :शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट

गुरुवार को कारोबार की शुरुआत होते ही घरेलू शेयर बाजार लाल निशान पर फिसल गए। प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही कमजोर शुरुआत के साथ खुले। स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज पर तनातनी का माहौल बने रहने के कारण क्रूड ऑयल की कीमतें आसमान पर हैं, जिसने निवेशकों के भरोसे को बुरी तरह डिगा दिया है। इस वैश्विक हलचल और कच्चे तेल के दबाव का असर भारतीय मुद्रा पर भी साफ दिखाई दिया, जहां शुरुआती कारोबार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया सात पैसे लुढ़ककर 95.40 के स्तर पर पहुंच गया।

प्रमुख शेयरों का हाल और बाजार के आंकड़े

कारोबार के दौरान तीस शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 172.48 अंकों की गिरावट के साथ 77,786.41 के स्तर पर आ गया, जबकि पचास शेयरों वाला एनएसई निफ्टी भी 90.35 अंक टूटकर 24,343.50 पर कारोबार करता नजर आया। सेंसेक्स के शेयरों में टाइटन, अल्ट्राटेक सीमेंट, रिलायंस इंडस्ट्रीज, आईसीआईसीआई बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक और इंफोसिस को सबसे ज्यादा नुकसान उठाना पड़ा। इसके विपरीत, इंटरग्लोब एविएशन, टेक महिंद्रा, इटरनल और एनटीपीसी जैसे चुनिंदा शेयरों में खरीदारी का रुझान दिखा और वे हरे निशान में कारोबार कर रहे थे।

विशेषज्ञों की राय और कच्चे तेल की स्थिति

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को लेकर बना गतिरोध कच्चे तेल की कीमतों को ऊंचा बनाए हुए है, जो घरेलू इक्विटी बाजार के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। हालांकि ब्रेंट क्रूड मामूली नरमी के साथ 88.25 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है, लेकिन भू-राजनीतिक जोखिमों के कारण ऊर्जा बाजार में अभी भी भारी अनिश्चितता बनी हुई है। जानकारों के मुताबिक इस तरह का माहौल निवेशकों के बीच नकारात्मक भावना पैदा कर रहा है और बाजार की चाल को बाधित कर रहा है।

एशियाई बाजारों का मिलाजुला रुख और विदेशी निवेशकों की निकासी

एक तरफ जहां घरेलू बाजार दबाव में हैं, वहीं एशियाई बाजारों में दक्षिण कोरिया के कोस्पी, जापान के निक्केई 225, शंघाई कंपोजिट और हांगकांग के हैंग सेंग इंडेक्स में बढ़त का रुख देखने को मिला। अमेरिकी बाजारों से मिले सकारात्मक संकेतों और अमेरिकी मुद्रास्फीति के आंकड़ों से फेडरल रिजर्व के सख्त रुख को लेकर चिंताएं कुछ कम हुई हैं। इसके बावजूद विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की लगातार बिकवाली भारतीय बाजार के लिए बड़ी सिरदर्द बनी हुई है। हालिया आंकड़ों के मुताबिक, एफआईआई ने बाजार से 1,002.50 करोड़ रुपये की निकासी की है, जिससे बाजार पर अतिरिक्त दबाव साफ महसूस किया जा रहा है।

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