अजिंक्य रहाणे पर गावस्कर का बड़ा खुलासा, बोले- वह जितने सम्मान के हकदार थे, उतना नहीं मिला

नई दिल्लीभारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व महान कप्तान और दिग्गज बल्लेबाज सुनील गावस्कर ने हाल ही में संन्यास लेने वाले अनुभवी खिलाड़ी अजिंक्य रहाणे को लेकर बड़ी बात कही है। गावस्कर का मानना है कि अजिंक्य रहाणे को उनके शानदार योगदान और उपलब्धियों के मुकाबले वह सराहना या श्रेय कभी नहीं मिला, जिसके असल में वे हकदार थे। सुनील गावस्कर ने रहाणे की कप्तानी शैली की तुलना पूर्व भारतीय कप्तान राहुल द्रविड़ से की है, जिनकी अगुवाई में भारत ने कई ऐतिहासिक और यादगार जीतें दर्ज की थीं।

ज्ञात हो कि अजिंक्य रहाणे ने पिछले सप्ताह ही क्रिकेट के सभी प्रारूपों से अपने संन्यास का ऐलान किया है। रहाणे अपने शांत और गंभीर स्वभाव के लिए जाने जाते हैं, जो बिना किसी दिखावे या प्रचार के चुपचाप अपना काम करते रहे। उन्होंने कठिन परिस्थितियों में अपनी बेहतरीन कप्तानी का लोहा भी मनवाया। जब नियमित कप्तान विराट कोहली किसी कारणवश उपलब्ध नहीं होते थे, तब उन्होंने जिम्मेदारी संभालते हुए टीम का शानदार नेतृत्व किया। अजिंक्य की कप्तानी में भारत ने साल 2020-21 की ऐतिहासिक 'बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी' जीतकर इतिहास रचा था।

गावस्कर बोले— जीत का श्रेय खिलाड़ियों को, हार का ठीकरा कप्तान-कोच पर

एक प्रतिष्ठित समाचार पत्र के लिए लिखे गए अपने कॉलम में सुनील गावस्कर ने खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने लिखा कि एक कप्तान के रूप में टेस्ट क्रिकेट में अजिंक्य रहाणे का रिकॉर्ड बेहद असाधारण और शानदार रहा है, जिसमें उनकी कप्तानी में खेले गए मुकाबलों में 4 जीत और एक भी हार शामिल नहीं है।

राहुल द्रविड़ की तरह, जिनकी कप्तानी में भारत ने कई बेहतरीन मुकाबले जीते लेकिन उन्हें भी कभी उनका उचित श्रेय नहीं मिला, ठीक उसी तरह रहाणे के नेतृत्व को भी वह सराहना नहीं मिली जिसके वे असली पात्र थे। भारतीय क्रिकेट की यह एक पुरानी और आम प्रवृत्ति रही है कि जब टीम कोई मैच या सीरीज जीतती है, तो सारा श्रेय व्यक्तिगत प्रदर्शन करने वाले बल्लेबाजों या गेंदबाजों को दे दिया जाता है, लेकिन जब टीम को हार का सामना करना पड़ता है, तो उसका पूरा ठीकरा कप्तान और मुख्य कोच के सिर फोड़ दिया जाता है।

ऑस्ट्रेलिया में रहाणे की कप्तानी में रची गई थी ऐतिहासिक जीत

क्रिकेट इतिहास के पन्नों में दर्ज साल 2020-21 की बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी के लिए ऑस्ट्रेलिया दौरे पर टीम इंडिया के साथ एक वक्त ऐसा भी आया था जब एडिलेड में खेले गए पहले टेस्ट मैच की दूसरी पारी में भारतीय टीम मात्र 36 रनों के न्यूनतम स्कोर पर ढेर हो गई थी। उस शर्मनाक हार के बाद नियमित कप्तान विराट कोहली पितृत्व अवकाश (पर्साेनल रीजन्स) के चलते स्वदेश वापस लौट आए थे। इसके बाद पूरी मेहमान टीम एक के बाद एक खिलाड़ियों की चोटों से जूझती रही, लेकिन कार्यवाहक कप्तान अजिंक्य रहाणे के नेतृत्व में टीम ने गजब का मानसिकौशल दिखाते हुए 0-1 से पिछड़ने के बाद जबरदस्त वापसी की और सीरीज 2-1 से अपने नाम कर ली।

सुनील गावस्कर ने अपने संस्मरण में कहा कि वर्ष 2021 की उस चुनौतीपूर्ण सीरीज में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ शुरुआती टेस्ट में 36 रन पर ऑलआउट होने के बाद, रहाणे ने मुख्य कोच रवि शास्त्री के साथ मिलकर टीम को उस बेहद मुश्किल और निराशाजनक दौर से सफलतापूर्वक बाहर निकाला। उन्होंने एक ऐसी डूबती हुई नाव की कमान अपने हाथों में ली थी जो लगभग डूबने की कगार पर थी, और न केवल उसे उस भंवर से निकाला, बल्कि भारत को ऑस्ट्रेलिया के अजेय दुर्ग माने जाने वाले 'गाबा' मैदान पर एक अभूतपूर्व और ऐतिहासिक जीत दिलाई, जिसके दम पर भारत ने बॉर्डर-गावस्कर सीरीज पर भी शानदार कब्जा जमाया था।

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