नई दिल्ली:विदेश मंत्रालय की ओर से दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, वर्तमान में रणनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील और महत्वपूर्ण होरमुज स्ट्रेट के पश्चिमी क्षेत्र में कुल छह भारतीय पोत सुचारू रूप से संचालित हो रहे हैं। इन सभी भारतीय जहाजों पर कुल 125 भारतीय नाविक अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इसके साथ ही, इसी क्षेत्र के समुद्री जलमार्ग से गुजरने वाले अन्य विदेशी पोतों पर भी 41 भारतीय नाविक तैनात हैं, जिनकी सुरक्षा और संरक्षा को लेकर सरकार पूरी तरह से गंभीर बनी हुई है।
विदेश मंत्रालय और दूतावास नाविकों की सुरक्षा पर रख रहे नजर
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग के दौरान स्पष्ट किया कि पोत परिवहन मंत्रालय क्षेत्र में सक्रिय भारतीय जहाजों और वहां कार्यरत नाविकों की सुरक्षा तथा उनके कल्याण पर पैनी नजर रखे हुए है। संबंधित क्षेत्र में स्थित सभी भारतीय दूतावास भी पोत मंत्रालय के साथ निरंतर संपर्क और समन्वय में हैं, ताकि किसी भी आपात स्थिति या आवश्यकता पड़ने पर भारतीय नाविकों को बिना किसी विलंब के हरसंभव मदद मुहैया कराई जा सके।
एलपीजी टैंकर पर हमले के बाद भारतीय चालक दल सुरक्षित
बीती 24 जुलाई को मोजाम्बिक देश के ध्वज वाले एलपीजी टैंकर 'दिशा' पर ईरान के क्षेत्रीय जलक्षेत्र के भीतर एक अप्रत्याशित हमला हुआ था। इस दुर्घटनाग्रस्त जहाज पर कुल 28 भारतीय चालक दल के सदस्य सवार थे। इस घटना के तुरंत बाद ईरान स्थित भारतीय दूतावास ने आधिकारिक रूप से पुष्टि की थी कि सभी 28 भारतीय नाविक पूरी तरह सुरक्षित हैं। दूतावास स्थानीय अधिकारियों के साथ लगातार संवाद बनाए रखते हुए इस पूरे घटनाक्रम पर करीबी नजर रख रहा है।
समुद्री नियामक का होर्मुज मार्ग पर तैनाती से बचने का निर्देश
बढ़ते सुरक्षा जोखिमों को देखते हुए समुद्री प्रशासन के महानिदेशालय ने सभी जहाज मालिकों, शिप मैनेजमेंट कंपनियों तथा आरपीएसएल लाइसेंस धारकों को यह सख्त निर्देश जारी किया है कि वे अगली सूचना तक होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर भारतीय नाविकों की नई तैनाती से बचें। विश्व के इस सबसे व्यस्त समुद्री मार्ग से वैश्विक तेल आपूर्ति का एक बहुत बड़ा हिस्सा गुजरता है, जिसके कारण क्षेत्र में सुरक्षा के मद्देनजर भारत सरकार बेहद सतर्कता बरत रही है।

