केरल में बच्चों के शोषण का मामला, CWC जांच में सामने आईं हैरान करने वाली जानकारियां

पथानामथिट्टा। केरल के पथानामथिट्टा जिले में संचालित एक ईसाई प्रार्थना केंद्र में रह रहे 17 वर्षीय किशोर द्वारा संस्थान के स्टाफ पर बेरहमी से मारपीट करने का सनसनीखेज आरोप लगाने के बाद हड़कंप मच गया है। इस गंभीर मामले का संज्ञान लेते हुए बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) ने जब अपनी शुरुआती जांच आगे बढ़ाई, तो चौंकाने वाले खुलासे हुए। जांच में सामने आया कि न केवल वह शिकायतकर्ता लड़का, बल्कि वहां रहने वाले कई अन्य नाबालिग बच्चे भी लंबे समय से कर्मचारियों के दुर्व्यवहार, अमानवीय व्यवहार और शारीरिक शोषण का सामना कर रहे थे। एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी ने शनिवार को इस पूरे घटनाक्रम की पुष्टि करते हुए बताया कि मामले की सघन कानूनी जांच जारी है।

शिक्षा और नौकरी के झांसे में बंधक बनाकर शोषण का खेल

यह पूरा मामला सबसे पहले 17 जून को इडुक्की जनपद के कट्टप्पना पुलिस स्टेशन में दर्ज हुआ था, जहां अनाक्कारा के रहने वाले एक किशोर पर जानलेवा हमला करने के आरोप में 'एलोहिम ग्लोबल वर्शिप सेंटर' के तीन कर्मचारियों के खिलाफ नामजद मुकदमा कायम किया गया। जांच में पता चला है कि बेहद गरीब और आर्थिक रूप से लाचार परिवारों के बच्चों को पढ़ाई का पूरा खर्च उठाने और बाद में अच्छी नौकरी दिलवाने का बड़ा प्रलोभन देकर इस केंद्र में लाया जाता था। पीड़ित किशोर भी पिछले कुछ महीनों से इसी सुनहरे भविष्य की चाह में यहां आया था, लेकिन केंद्र संचालकों ने उसे स्कूल भेजने के बजाय बंधक बनाकर जबरन मजदूरी करानी शुरू कर दी और विरोध करने पर उसके साथ क्रूरता से मारपीट की जाती थी।

प्रार्थना केंद्र पर जड़ा ताला और अवैध रूप से रखे गए बच्चे का रेस्क्यू

मामले की गंभीरता और न्यायिक क्षेत्र को देखते हुए केस को तत्काल पथानामथिट्टा के एलावुमथिट्टा पुलिस स्टेशन में स्थानांतरित कर दिया गया है। सीडब्ल्यूसी की अध्यक्ष लीना के सुभाष ने आधिकारिक तौर पर बताया कि इन गंभीर आरोपों और अनियमिताओं के उजागर होने के तुरंत बाद प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए उक्त प्रार्थना केंद्र को पूरी तरह से बंद करवा दिया है। सीडब्ल्यूसी की टीम ने वहां अवैध रूप से रखे गए एक अन्य बच्चे को भी सकुशल रेस्क्यू (बचाव) किया है, जिसकी चिकित्सीय जांच (मेडिकल टेस्ट) कराने पर उसके शरीर पर गंभीर चोटों के निशान पाए गए हैं। इसके अतिरिक्त, वहां बिना किसी प्रशासनिक अनुमति और पंजीकरण के रह रहे कई बुजुर्गों के बयान भी दर्ज किए गए हैं।

बिना वेतन के मजदूरी और किशोर न्याय अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज

बाल कल्याण समिति के अनुसार, केंद्र में रहने वाले बच्चों ने रोते हुए अपनी आपबीती सुनाई कि उन्हें सुबह से रात तक बिना कोई वेतन या पारिश्रमिक दिए जबरन कमरतोड़ काम करने के लिए विवश किया जाता था। समिति को यह भी इनपुट मिला है कि एक मां और उसका बच्चा भी वहां रह रहे थे जो फिलहाल लापता हैं, जिनकी तलाश के लिए पुलिस टीमों को लगाया गया है। पुलिस प्रशासन ने बाल उत्पीड़न और बंधुआ मजदूरी के इस गंभीर मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपियों के खिलाफ 'किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम' (जेजे एक्ट) के साथ-साथ 'भारतीय न्याय संहिता' की विभिन्न संगीन और गैर-जमानती धाराओं के तहत मामला दर्ज कर आगे की दंडात्मक कार्रवाई शुरू कर दी है।

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