हैदराबाद। तेलंगाना के हैदराबाद में मलकाजगिरि स्थित यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) कानून से जुड़े एक विशेष न्यायालय ने केंद्रीय मंत्री बंदी संजय के पुत्र बंदी साई भागीरथ को सात दिनों की अवधि के लिए अंतरिम जमानत प्रदान कर दी है। आरोपी के विरुद्ध बशीर बाग पुलिस थाने में गंभीर धाराओं के तहत पॉक्सो अधिनियम का आपराधिक मामला पंजीकृत है। आधिकारिक सूत्रों से छनकर आई जानकारी के मुताबिक, इस हाई-प्रोफाइल मामले में विधिक प्रक्रिया के तहत आगामी कदम उठाए जा रहे हैं।
वार्षिक परीक्षा में सम्मिलित होने के लिए मिली कोर्ट से अस्थायी राहत
न्यायिक सूत्रों के अनुसार, विशेष अदालत ने आरोपी भागीरथ की अंतिम परीक्षाओं की अनिवार्यता को ध्यान में रखते हुए यह अस्थायी राहत दी है, ताकि वह बिना किसी बाधा के अपनी परीक्षा में उपस्थित होकर पर्चे दे सके। अदालत ने स्पष्ट किया है कि यह अंतरिम जमानत केवल सात दिनों की समयावधि के लिए ही मान्य होगी और आरोपी को न्यायालय द्वारा अधिरोपित की गई सभी सख्त शर्तों व विधिक नियमों का अनिवार्य रूप से पालन करना होगा। इससे पूर्व, कथित यौन उत्पीड़न के इस संगीन मामले में घिरे बंदी साई भागीरथ को कोर्ट के आदेश पर 29 मई तक के लिए न्यायिक अभिरक्षा (जेल) में भेज दिया गया था, जिसके प्रत्युत्तर में बचाव पक्ष के विधि विशेषज्ञों ने पुलिस की रिमांड अर्जी का पुरजोर विरोध करते हुए उसे खारिज करने के लिए एक विस्तृत प्रतिवाद पत्र दाखिल किया था।
telangana उच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों के तहत सख्त सुरक्षा उपायों की मांग
बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं की ओर से न्यायालय के समक्ष यह दलील पेश की गई कि यदि माननीय अदालत अभियोजन पक्ष को पूछताछ की अनुमति देती भी है, तो तेलंगाना हाईकोर्ट द्वारा पूर्व में क्रिमिनल रिवीजन पिटीशन संख्या 165/2022 में प्रतिपादित किए गए सभी सुरक्षात्मक विधिक सुरक्षा उपायों को कड़ाई से लागू किया जाए। आरोपी के वकील ने विशेष आग्रह किया कि किसी भी प्रकार की पूछताछ का समय केवल प्रातः 10:00 बजे से सायंकाल 5:30 बजे के मध्य ही नियत किया जाए और प्रक्रिया समाप्त होने के बाद भागीरथ को प्रतिदिन शाम 7:00 बजे तक चेरलापल्ली केंद्रीय कारागार के जेल अधीक्षक की सुरक्षित कस्टडी में वापस सुपुर्द कर दिया जाए।
चिकित्सीय परीक्षण की अनिवार्यता और कानूनी प्रक्रिया में पूर्ण सहयोग का दावा
बचाव पक्ष द्वारा रखे गए अन्य विधिक सुरक्षा उपायों में यह शर्त भी शामिल थी कि पुलिसिया पूछताछ की शुरुआत और उसकी समाप्ति के तुरंत बाद जेल के मुख्य चिकित्सा अधिकारियों द्वारा आरोपी की गहन शारीरिक व मानसिक जांच की जाए। इसके साथ ही यह भी निवेदन किया गया कि पूछताछ की अवधि समाप्त होते ही या अदालत द्वारा मुकर्रर की गई तय तारीख पर आरोपी को अविलंब संबंधित मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया जाए। आरोपी के मुख्य अधिवक्ता ने बताया कि भागीरथ ने स्वतः ही कानून का सम्मान करते हुए पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण किया था, जिसके बाद तय कानूनी प्रक्रियाएं शुरू की गईं। उन्होंने दावा किया कि उनके मुवक्किल ने जांच एजेंसी के साथ हर मोड़ पर पूरा सहयोग किया है और उन्हें पूर्ण विधिक विश्वास है कि निष्पक्ष न्यायिक प्रक्रिया के पूरा होने पर उनका मुवक्किल पूरी तरह बेदाग और निर्दोष साबित होकर बरी होगा।

