‘विकास और विरासत साथ लेकर आगे बढ़ रहा भारत’, सोमनाथ से पीएम मोदी का संदेश

सोमनाथ/अहमदाबाद: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमनाथ मंदिर और भारत की परमाणु शक्ति के गहरे संबंध को जोड़ते हुए देशवासियों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि सोमनाथ का नाम 'सोम' यानी अमृत से जुड़ा है, जिसे कोई भी कभी मिटा नहीं सकता। इतिहास गवाह है कि महमूद गजनवी और अलाउद्दीन खिलजी जैसे कई लुटेरों ने मंदिर के वैभव को खत्म करने की कोशिश की, लेकिन वे सिर्फ ईंट-पत्थरों से टकराते रह गए। उन्हें यह अंदाजा नहीं था कि भारत की असली ताकत उसकी आत्मा और वैचारिक सामर्थ्य में बसी है। पीएम मोदी ने जोर देकर कहा कि मंदिर जितनी बार गिराया गया, उतनी ही भव्यता के साथ फिर से उठ खड़ा हुआ क्योंकि शिव सर्वात्मा हैं और उनकी चेतना अविनाशी है।

शिव-शक्ति का विचार और परमाणु सामर्थ्य

अपने संबोधन में पीएम ने खास तौर पर 11 मई के दिन को याद किया, जब 1998 में भारत ने पोखरण में परमाणु परीक्षण किया था। उन्होंने बताया कि इस मिशन को 'ऑपरेशन शक्ति' नाम इसलिए दिया गया क्योंकि शिव के साथ शक्ति की पूजा ही हमारी प्राचीन परंपरा है। शिव और शक्ति का यही तालमेल आज देश की वैज्ञानिक तरक्की के लिए सबसे बड़ी प्रेरणा बन रहा है। प्रधानमंत्री ने भगवान सोमनाथ के चरणों में नमन करते हुए सभी देशवासियों को 'ऑपरेशन शक्ति' की वर्षगांठ पर बधाई दी और वैज्ञानिकों के साहस को सराहा।

दुनिया के दबाव के सामने अटल भारत

पीएम मोदी ने उस दौर की मुश्किलों का जिक्र करते हुए कहा कि जब भारत ने परमाणु परीक्षण किए, तो पूरी दुनिया की बड़ी शक्तियां हमारे खिलाफ हो गई थीं। भारत पर कई तरह के कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगा दिए गए ताकि हमें दबाया जा सके, लेकिन भारत झुका नहीं। 11 मई के बाद 13 मई को फिर से दो परीक्षण करके दुनिया को यह दिखा दिया गया कि भारत की राजनीतिक इच्छाशक्ति कितनी मजबूत है। अटल बिहारी वाजपेयी जी के नेतृत्व में उस समय की सरकार ने साफ कर दिया था कि हमारे लिए राष्ट्र हित सबसे पहले है और कोई भी दबाव हमें डिगा नहीं सकता।

स्वतंत्र चेतना का प्रतीक और भविष्य का संकल्प

सोमनाथ मंदिर की पुनर्स्थापना को लेकर उन्होंने कहा कि यह कोई मामूली घटना नहीं थी। जिस तरह 1947 में भारत को आजादी मिली, वैसे ही 1951 में सोमनाथ की प्राण-प्रतिष्ठा ने भारत की स्वतंत्र चेतना का पूरी दुनिया में ऐलान किया था। प्रधानमंत्री ने विश्वास जताया कि सोमनाथ का यह अमृत महोत्सव सिर्फ बीते हुए कल का जश्न नहीं है, बल्कि यह आने वाले एक हजार सालों के लिए भारत की नई ऊर्जा और प्रेरणा का उत्सव है। सोमनाथ का गौरव आज के युवाओं को यह सिखाता है कि सत्य और साहस के सामने बड़ी से बड़ी चुनौतियां भी हार मान लेती हैं।

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