Vikramshila Setu Collapse : भागलपुर/पटना : बिहार में पुलों के गिरने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है. नया कांड भागलपुर जिले के अंदर आने वाले ऐतिहासिक स्थान विक्रमशिला में हुआ है. रविवार- सोमवार की रात (4 मई 2026) को करीब 12:50 से 1:10 बजे के बीच भागलपुर में गंगा नदी पर बने प्रसिद्ध विक्रमशिला सेतु का पिलर नंबर 133 के पास का एक बड़ा हिस्सा (स्लैब) ढहकर नदी में गिर गया. 4.7 किलोमीटर लंबा यह पुल उत्तर और दक्षिण बिहार के बीच कनेक्टिविटी की रीढ़ माना जाता है.
बिहार की 21 वर्षों की एनडीए सरकार में पुल गिरने का वर्ल्ड रिकॉर्ड बना। pic.twitter.com/NBO5EaFLxW
— Tejashwi Yadav (@yadavtejashwi) May 4, 2026
Vikramshila Setu Collapse : कैसे टला बड़ा हादसा?
घटना से कुछ घंटे पहले, रविवार रात करीब 11:33 बजे ड्यूटी पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने पिलर नंबर 133 के पास जमीन धंसने और दरारें देखीं. तुरंत वरिष्ठ अधिकारियों को सूचित किया गया और पुल पर यातायात रोक दिया गया. महज डेढ़ घंटे बाद ही करीब 25 से 33 मीटर का स्लैब नदी में समा गया. अगर समय रहते ट्रैफिक न रोका जाता, तो कई बसें और वाहन हादसे का शिकार हो सकते थे.
भ्रष्टाचार की ‘लाइफ सपोर्ट’ पर पुल?
हैरानी की बात यह है कि इस पुल की मरम्मत का काम हाल ही में मार्च 2026 में पूरा किया गया था. विशेषज्ञों का कहना है कि यह पुल काफी समय से ‘लाइफ सपोर्ट’ पर था. पुल के एक्सपेंशन जॉइंट्स में 6 इंच तक की दरारें आ चुकी थीं, जिससे भारी वाहनों के गुजरने पर पुल बुरी तरह कांपता था. मरम्मत के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद पुल का गिरना सीधे तौर पर घटिया निर्माण सामग्री और भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है.
बिहार में ‘गिरते पुलों’ का काला इतिहास
विक्रमशिला सेतु की यह घटना कोई अपवाद नहीं है. पिछले कुछ वर्षों में बिहार में पुलों का गिरना एक डरावना ‘ट्रेंड’ बन गया है:
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मार्च 2026: गोपालगंज में 2.89 करोड़ की लागत से बन रहा आरसीसी पुल ढलाई के तुरंत बाद गिर गया.
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जून-जुलाई 2024: महज 15 दिनों के भीतर बिहार के अलग-अलग जिलों (अररिया, सीवान, मधुबनी, किशनगंज) में 12 से अधिक पुल ताश के पत्तों की तरह ढह गए थे.
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अगुआनी-सुल्तानगंज पुल: खगड़िया में बन रहा यह महासेतु दो बार (2022 और 2023) गिर चुका है, जो बिहार में इंजीनियरिंग फेलियर और कमीशनखोरी का सबसे बड़ा उदाहरण बना.
सरकार की कार्रवाई
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने घटना को गंभीरता से लेते हुए सड़क निर्माण विभाग के एक कार्यकारी अभियंता (Executive Engineer) को लापरवाही के आरोप में निलंबित कर दिया है. पुल की जल्द मरम्मत के लिए भारतीय सेना से भी मदद मांगी जा रही है. फिलहाल 16 जिलों का संपर्क टूट गया है और यातायात को मुंगेर और सुल्तानगंज की ओर डायवर्ट किया गया है.

