प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी PM Modi ने गुरुवार को ईरान-US लड़ाई शुरू होने के 13 दिन बाद ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के साथ अपनी पहली फ़ोन कॉल में बात की और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और आम लोगों की जान जाने पर गहरी चिंता जताई. हलांकि पीएम ने ये नहीं बताया की उन्होंने ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत पर शोक व्यक्त किया की नहीं.
सोशल मीडिया पर लिखे पोस्ट में PM Modi ने क्या कहा
मोदी ने सोशल मीडिया पर कहा कि उन्होंने पेजेशकियन से “क्षेत्र की गंभीर स्थिति” पर चर्चा की.
उन्होंने कहा, “तनाव बढ़ने और आम लोगों की जान जाने के साथ-साथ सिविलियन इंफ्रास्ट्रक्चर को हुए नुकसान पर गहरी चिंता जताई.”
Had a conversation with Iranian President, Dr. Masoud Pezeshkian, to discuss the serious situation in the region.
Expressed deep concern over the escalation of tensions and the loss of civilian lives as well as damage to civilian infrastructure.
The safety and security of…
— Narendra Modi (@narendramodi) March 12, 2026
तेल और गैस में आ रही रुकावट पर की बात
मोदी ने पेजेशकियन के सामने भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और “सामान और एनर्जी के बिना रुकावट आने-जाने की ज़रूरत” का मुद्दा भी उठाया, और कहा कि ये भारत की “टॉप प्रायोरिटीज़” बनी हुई हैं.
उन्होंने कहा कि उन्होंने शांति और स्थिरता के लिए भारत के कमिटमेंट और देश के इस लगातार रुख को भी दोहराया कि मुद्दों को बातचीत और डिप्लोमेसी के ज़रिए सुलझाया जाना चाहिए.
बातचीत के बारे में भारत सरकार के एक रीडआउट में कहा गया कि पेजेशकियन ने मोदी को ईरान की मौजूदा स्थिति के बारे में जानकारी दी और इलाके में हाल के डेवलपमेंट्स पर अपना नज़रिया शेयर किया.
क्या पीएम मोदी ने ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत पर जताया दुख
ऐसे समय में जब ईरान के स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बाद होने से देश में तेल संकट खड़ा हो सकता है. पीएम मोदी ने ईरान में पहली बार बात की. लेकिन सवाल ये है कि क्या पीएम ने ईरान के राष्ट्रपति से उनके सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत का शोक जताया या नहीं. गुरुवार को ही नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने तेल और गैस संकट को खराब विदेश नीति का नतीजा बताया था. ऐसे में जब हम ईरान से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज हमारे लिए खोलने की उम्मीद कर रहे है तो क्या ये जरुरी नहीं था कि हम उनके नेता की मौत का शोक जताते. क्या आधे अधूरे मन से की गई बात से ईरान का मन पिघलेगा.
ईरान में करीब 9,000 भारतीय हैं
ईरान में करीब 9,000 भारतीय हैं, जिनमें स्टूडेंट, प्रोफेशनल, नाविक और तीर्थयात्री शामिल हैं. भारतीय अधिकारियों ने पहले ही सैकड़ों भारतीय नागरिकों को तेहरान से सुरक्षित जगहों पर पहुंचा दिया है. कई भारतीय भी घर लौटने के लिए फ्लाइट लेने के लिए ईरान से अज़रबैजान और आर्मेनिया चले गए हैं.
28 फरवरी को ईरान-US टकराव शुरू होने के बाद से, विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अपने ईरानी समकक्ष सैयद अब्बास अराघची से तीन बार बात की है ताकि बढ़ते तनाव और व्यापारी जहाजों की आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए उठाए जाने वाले कदमों पर चर्चा की जा सके.
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