बिहार की नई सरकार के 3 ‘चाणक्य’: कौन हैं सम्राट, विजय और विजेंद्र? जानें इनके रसूख की पूरी कहानी

Bihar New Government , पटना: बिहार की सत्ता में आए बड़े बदलाव के बाद अब सबकी नजरें उन चेहरों पर हैं जो सरकार के इंजन को रफ्तार देंगे. एनडीए की नई सरकार में तीन ऐसे नाम उभरे हैं, जो न केवल अनुभवी हैं बल्कि अपने-अपने वोट बैंक और क्षेत्र के बेताज बादशाह माने जाते हैं. ये नाम हैं— सम्राट चौधरी, विजय कुमार चौधरी और विजेंद्र प्रसाद यादव.

इन तीनों नेताओं का सियासी कद इतना बड़ा है कि इन्हें बिहार की राजनीति का ‘चाणक्य’ कहा जाता है. आइए जानते हैं इन दिग्गजों के बारे में कुछ ऐसी बातें जो शायद आप नहीं जानते होंगे.

सम्राट चौधरी: भाजपा का ‘आक्रामक’ चेहरा और उभरता सितारा

सम्राट चौधरी आज बिहार भाजपा के सबसे मुखर चेहरों में से एक हैं. मुंगेर की धरती से आने वाले सम्राट ने बहुत कम समय में अपनी एक अलग पहचान बनाई है. इन्होंने शिक्षक से राजनेता तक का सफर तय किया है. राजनीति में आने से पहले सम्राट चौधरी एक शिक्षक के तौर पर समाज को दिशा दे रहे थे. यही कारण है कि उनकी बातों में तार्किकता और गहराई नजर आती है. सम्राट चौधरी  2017 से 2022 तक मुंगेर से विधानसभा सदस्य रहे और वर्तमान में बिहार विधान परिषद में विपक्ष के नेता के रूप में अपनी धाक जमा चुके हैं. सम्राट चौधरी को बिहार की राजनीति में ‘भविष्य का मुख्यमंत्री’ भी कहा जाता रहा है. उनकी आक्रामक भाषण शैली और जमीनी पकड़ उन्हें युवाओं के बीच बेहद लोकप्रिय बनाती है. वे कुशवाहा समाज के बड़े नेता माने जाते हैं.

विजय कुमार चौधरी: नीतीश कुमार के सबसे भरोसेमंद ‘संकटमोचक’

अगर नीतीश कुमार के ‘सबसे करीबी’ दोस्तों की सूची बनाई जाए, तो विजय कुमार चौधरी का नाम सबसे ऊपर होगा. सौम्य स्वभाव और गहरी विधायी समझ उनकी पहचान है. विजय चौधरी बिहार विधानसभा के अध्यक्ष (स्पीकर) रह चुके हैं. सदन चलाने की उनकी कला और विपक्षी नेताओं को शांत करने का हुनर बेजोड़ है. इन्हें बिहार सरकार के भारी-भरकम मंत्रालयों का अनुभव है.  इन्होंने वित्त, शिक्षा और जल संसाधन जैसे विभागों को बखूबी संभाला है. विजय चौधरी को जेडीयू का ‘दिमाग’ कहा जाता है. कठिन से कठिन राजनीतिक परिस्थितियों में नीतीश कुमार के लिए रास्ता निकालने में वे माहिर हैं. उनकी साफ-सुथरी छवि और प्रशासनिक पकड़ की तारीफ उनके विरोधी भी करते हैं.

विजेंद्र प्रसाद यादव: सीमांचल और कोसी के ‘अजेय’ योद्धा

विजेंद्र प्रसाद यादव बिहार की राजनीति के उन गिने-चुने नेताओं में से हैं जो दशकों से अपनी सीट पर अजेय बने हुए हैं. इन्हें सुपौल का पर्याय कहा जाता है. विजेंद्र यादव और सुपौल विधानसभा सीट एक-दूसरे के पूरक बन चुके हैं. वे कई बार यहां से चुनाव जीत चुके हैं, जो साबित करता है कि जनता के बीच उनका जुड़ाव कितना गहरा है. बिहार में उर्जा व्यवस्था को  नई उंचाइयों तक पहुंचाने के श्रेय काफी हद कर विजेंदर यादव को जाता है. इन्हें बिहार में ऊर्जा पुरुष के रुप में भी जाना जाता है. 

 विजेंद्र यादव को ‘जमीन से जुड़ा नेता’ कहा जाता है. वे तामझाम से दूर रहते हैं और अपनी सादगी के लिए जाने जाते हैं. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार उन पर इतना भरोसा करते हैं कि सरकार की हर बड़ी रणनीति में उनकी राय अनिवार्य मानी जाती है.

बिहार की नई सरकार अनुभव और युवा जोश का संतुलन

इन तीनों नेताओं का नई एनडीए सरकार में उपमुख्यमंत्री (डिप्टी सीएम) के तौर पर शामिल होना यह दिखाता है कि बिहार में अनुभव और जोश के बीच एक संतुलन बनाने की कोशिश की गई है. जहां सम्राट चौधरी भाजपा के आधार को मजबूत करेंगे, वहीं विजय चौधरी और विजेंद्र यादव जेडीयू और सरकार के बीच एक सेतु का काम करेंगे.

बिहार की जनता को अब इन तीनों ‘दिग्गजों’ से बड़ी उम्मीदें हैं कि वे मिलकर राज्य को विकास की नई राह पर ले जाएंगे।

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